Thursday, April 30, 2026
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अंधेर गर्दी: निगम की खड़ी पोर्कलेन मशीन पी गई तेल

  • जनवाणी की जांच पड़ताल में पकड़ में आया तेल का महाखेल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया है। नगर निगम के कर्मचारी भ्रष्टाचार मेें इतने डूब गए हैं कि उन्हें यह भी नहीं मालूम की जिस पोर्कलेन मशीन के लिए 1080 लीटर डीजल नगर निगम के कोश से प्रयोग होना दर्शाया गया है, वो पोर्कलेन मशीन एक माह तक जिस स्थान पर खड़ी थी, वहां से हिली भी नहीं, फिर कैसे तेल खर्च हो गया? यह बड़ा सवाल है। खड़ी मशीन तेल कैसे पी सकती है? इसका जवाब तो नगर निगम के अधिकारियों के पास भी नहीं है, लेकिन भ्रष्टाचार किस सीमा तक निगम के कर्मचारी और अधिकारी मिलकर कर रहे हैं, इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है।

दरअसल, ये तेल का पूरा खेल तब खुला जब जिस पोर्कलेन मशीन के लिए 1080 लीटर डीजल प्रयोग करना बताया गया, वो पोर्कलेन मशीन 25 सितंबर 2023 से 3 अक्टूबर 2023 तक एक ही स्थान पर दिल्ली रोड डिपो पर खड़ी थी। कहीं वहां से हिली भी नहीं, लेकिन यह पूरा खेल एक सीसीटीवी कैमरे ने खोल दिया। सीसीटीवी कैमर ेके फुटेज दी गई तिथियां के अनुसार हर रोज निकाले गए, जिसमें पोर्कलेन मशीन को जिस स्थान पर खड़ा किया था, उस स्थान से हिलाया तक नहीं गया और नगर निगम की स्टॉक बुक के अनुसार 1080 लीटर डीजल इसी पोर्कलेन मशीन में दी गई तिथि के अनुसार प्रयोग किया गया। ऐसा निगम के सरकारी दस्तावेज में दर्ज हैं।

यह बड़ा तेल का खेल नगर निगम के वाहनों में तेल में चल रहा है, जिसको लेकर अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं। कोई भी अधिकारी इस भ्रष्टाचार को रोकने की बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं। ैंदरअसल, हम जिस पर पोर्कलेन मशीन की बात कर रहे हैं, वो दिल्ली रोड डिपो पर वाहन संख्या 210 पोर्कलेन मशीन (जेसीबी) है। उस पर वर्तमान में ड्राइवर राजू सिंह की तैनाती है। इसी पोर्कलेन मशीन में स्टॉक बुक के अनुसार 1080 लीटर डीजल का प्रयोग करना सरकारी दस्तावेजों में दर्शाया गया है, जो बेहद गंभीर मामला है। महत्वपूर्ण बात ये है कि सूचना अधिकार के तहत सुधांशु कुमार ने इसकी सूचना नगर निगम से मांगी थी।

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नगर निगम ने जो सूचना दी है, उसमें इसी पोर्कलेन मशीन में 1080 लीटर डीजल प्रयोग करना भी स्वीकार किया है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी ये भूल गए कि जिस स्थान पर पोर्कलेन मशीन खड़ी है, वहां पर सीसीटीवी कैमरा भी लगा हुआ है। इसी सीसीटीवी कैमरे में पोर्कलेन मशीन हर रोज खड़ी होना दर्शाया गया है। पोर्कलेन मशीन को वहां से हिलाया तक नहीं गया, लेकिन नगर निगम के सरकारी दस्तावेजों में कर्मचारियों ने तेल का बड़ा खेल कर दिया। ये तो एक छोटा-सा उदाहरण है।

नगर निगम में व्यापक स्तर पर तेल का खेल चल रहा है, जिसमें कर्मचारी से लेकर अधिकारियों की भी संलिप्त हो सकती है। ये जांच का विषय हैं। यही वजह है कि तेल का खेल करने वालों के खिलाफ नगर आयुक्त भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और नगर आयुक्त की चुप्पी सवालों के घेरे में हैं। हाल ही में नगर आयुक्त को प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने खूब खरी खोटी सुनाई थी, इसके बावजूद भीअधिकारियों ने नहीं सुधरने की लगता है कसम खाली है। यहां नगर निगम सफाई के रैंक में धड़ाम हो गया,

लेकिन सफाई के नाम पर किस तरह से भ्रष्टाचार हो रहा हैं, ये एक छोटा सा सबूत हैं। ‘जनवाणी’ के पास इससे संबंधित तमाम सबूत हैं। सीसीटीवी फुटेज भी पूरे एक माह की हैं, जिसमें पोर्कलेन एक ही जगह पर रात-दिन खड़ी हैं। फिर क्या पोर्कलेन का भूत तेल पी रहा था। ये सब जांच का विषय हैं। अब देखना है कि इस भ्रष्टाचार पर भी नगरायुक्त पर्दा डाल जाएंगे या फिर इसमें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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