Tuesday, May 28, 2024
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योगी के मंत्री को जिंदा जलाने का ऐलान

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  • कलक्ट्रेट पर सपा के पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री मुकेश सिद्धार्थ के प्रदर्शन के दौरान बिगडेÞ बोल से मचा बवाल
  • कलक्ट्रेट पर दलित समाज का जोरदार प्रदर्शन, तीन सूत्रीय मांग पत्र एडीएम सिटी को सौंपा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री और मेरठ दक्षिण से विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर को जिंदा जलाने का ऐलान कर दिया। ये ऐलान किया है सपा सरकार में दर्जा मंत्री रहे मुकेश सिंद्धार्थ ने। मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया हैं। दरअसल, शनिवार को कलक्ट्रेट में दलित समाज के प्रदर्शन के दौरान भीड़ को पूर्व दर्जा मंत्री मुकेश सिद्धार्थ ने उकसाने का प्रयास किया। उन्होंने राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर के घर और उन्हें जिंदा जलाने का ऐलान कर दिया। मुकेश सिद्धार्थ ने ये भी कहा कि मंत्री को आग में जलाने के बाद उसका घर भी जलाया जाएगा।

कलक्ट्रेट पर दलित समाज के प्रदर्शन के दौरान शनिवार को दोपहर के समय सपा नेता के बिगड़े बोल ने बवाल मचा दिया। दलित समाज के हजारों की संख्या में लोग कमिश्नरी से कलक्ट्रेट जुलूस के रूप में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने निगम की बोर्ड बैठक में हुए बवाल के दौरान दलित पार्षदों के साथ मारपीट व उनकी तहरीर पर सही धाराओं में मुकदमा पंजीकृत नहीं होने व आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। तीन सूत्रीय मांग पत्र एडीएम सिटी को सौंपा गया।

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दलित समाज के हजारों की संख्या में लोग शनिवार सुबह कमिश्नरी चौराहा पर एकत्रित हुए। 30 दिसंबर को नगर निगम की बोर्ड बैठक में दलित पार्षदों के साथ की गई। मारपीट के मामले में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं करने पर आक्रोश व्यक्त किया। कमिश्नरी से शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में भीड़ कलक्ट्रेट पहुंची। सपा विधायक अतुल प्रधान, पूर्व विधायक विनोद हरित, पूर्व विधायक योगेश वर्मा द्वारा संयमित भाषा एवं भावुक अपील से दलित समाज के लोगों में उत्साह भरने की कोशिश की। शासन-प्रशासन को चेताया कि यदि उन्हे न्याय नहीं मिला तो शांतिपूर्ण तरीके से आरपार की लड़ाई लड़ी जायेगी।

इस दौरान सपा नेता एवं पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री मुकेश सिद्धार्थ के बिगड़े बोल ने बवाल मचा दिया। उन्होंने कहा कि शासन प्रशासन या तो 10 जनवरी को होने वाली महापंचायत से पूर्व मामले में ठोस कार्रवाई कर दे या फिर महापंचायत में निर्णय लिया जायेगा कि आग कहा लगानी हैं? उसके लिये वो सीने पर गोली खाने तक को तैयार हैं। राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर की गाड़ी में आग लगाएं, उसे जिंदा जलाएं या फिर शहर में आग लगाएं। इस दौरान भारी हंगामे के बीच एडीएम सिटी बृजेश सिंह को तीन सूत्रीय मांग पत्र सौंपा दिया गया।

मांग पत्र में निगम पार्षद एवं कार्यकारिणी सदस्य कुलदीप उर्फ कीर्ति घोपला के साथ मारपीट करने वालों में शामिल एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज व ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर के साथ उनके लोगों पर एससी/एसटी की संसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया जाए और सुरक्षा प्रदान कराई जाए। मामले में जो भी दोषी हैं उनकी तत्काल गिरफ्तारी की जाये। हमलावरों व उनके समर्थकों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है।

साथ ही पार्षदों पर झूठा मुकदमा दर्ज न कराया जाये उसका प्रयास किया जा रहा है। एडीएम सिटी को ज्ञापन देने वालों में पूर्व विधायक योगेश वर्मा, पूर्व विधायक विनोद हरित, सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ, धर्मबीर सिंह, दीपक प्रजापति, भूपेंद्रपाल, शाहिद, नूर आलम समेत तमाम दलित समाज के नेता व मुस्लिम समाज के पार्षद आदि शामिल रहे। इस दौरान कलक्ट्रेट छावनी में तब्दील रही। उधर, मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकेश के खिलाफ मुकदमा

सिविल लाइन थाने में पुलिस की तरफ से मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया हैं। मुकेश के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 153, 153-ए, 115, 353, 505, 2, 506 और 7 क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया हैं। पुलिस के अनुसार इस मामले में जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी तथा राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर की सुरक्षा भी बढ़ाई जाएगी।

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उनके संस्कार, विचाराधारा ऐसी ही है: डा. सोमेन्द्र

मुकेश सिद्धार्थ के जिंदा जलाने के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यमंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर ने कहा कि उनके ऐसे ही संस्कार है और ऐसी ही विचारधारा हैं। इसमें कानून अपना काम करेगा। हालांकि सुरक्षा बढ़ाने की मांग की या फिर नहीं, इस सवाल पर उनका कहना था कि अभी सुरक्षा बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं हैं। वो इतना भी नहीं घबराते हैं। कानून अपना काम कर रहा हैं। उन्हें कानून पर पूरा भरोसा हैं। जो शहर को आग लगाने की बात करते हैं, उनमें अच्छे संस्कार कैसे हो सकते हैं? शहर ने ही उनको भी पहचान दी है, वो शहर में आग लगाने की बात कर रहे हैं। ऐसे लोगों को जनता सबक सिखायेगी।

ये बोले भाजपा नेता

भाजपा नेता विनीत शारदा अग्रवाल ने कहा कि सपा नेता अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। उनकी जगह समाज में नहीं, बल्कि पागलखाने में होनी चाहिए। उनके द्वारा जो ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र के खिलाफ बयान दिया गया है वो अकेले उनके खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ दिया गया बयान है। सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ के बेटे द्वारा पूर्व में गोली चलाई गई थी,जिनका आपराधिक इतिहास भी रहा है। यह सपा का जंगल राज नहीं, बल्कि योगी सरकार में अपराध मुक्त प्रदेश में कानून का राज है।

प्रशासन भड़काऊ भाषण का संज्ञान ले: यशवीर

शनिवार को मुकेश सिद्धार्थ व अन्य नेताओं के द्वारा जिस तरह से जिलाधिकारी के कार्यालय के सामने अपने भाषण में जिले के निवासियों को ये धमकी दी है कि शहर को जला दिया जायेगा। प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर को घर सहित आग लगाने की इसी प्रकार विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज को भी धमकी दी गई है, वो घोर निंदनीय है। प्रशासन को इस मीटिंग व भाषण का तुरंत संज्ञान लेकर ऐसे नेताओं पर जो की शहर का माहौल बिगड़ना चाहते हैं और कानून को अपने हाथ में लेना चाहते है। ऐसे नेताओं पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करे और ऐसे असामाजिक तत्वों को बढ़ाना देने का काम न करे।

योगेश वर्मा ने कहा-मुकेश का हम समर्थन नहीं करते

मुकेश सिद्धार्थ के भाषण के तत्काल बाद पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने माइक संभाला और बोले कि मुकेश सिद्धार्थ के इस बयान का खंडन करते हैं तथा वो शांति प्रिय लोग हैं और संविधान का हिसाब से कार्रवाई चाहते हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि मुकेश सिद्धार्थ के इस बयान से धरना-प्रदर्शन का कोई भी संबंध नहीं हैं और वो मुकेश सिद्धार्थ के बयान का कतई समर्थन नहीं करते हैं।

छावनी में तब्दील रहा कलक्ट्रेट सांसे अटकी रही पुलिस की

नगर निगम में अनुसूचित जाति के पार्षदों के साथ एमएलसी व मंत्री द्वारा की गई मारपीट के विरोध में विपक्ष ने हजारों दलित लोगों के साथ कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। हालांकि धरना प्रदर्शन से पहले पुलिस अफसर और कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ कमिश्नरी पार्क से लेकर कलक्ट्रेट तक मुस्तैदी से डटे रहे। इस दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों की भीड़ देखकर पुलिस की सांसे अटकी रही। पुलिस को डर था कि कंही को बवाल न हो जाये।

मंत्री सोमेन्द्र तोमर और एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज द्वारा पार्षद कीर्ति घोपला और अशीष के साथ मारपीट की घटना के विरोध में दोनों की नामजदगी और गिरफ्तारी करने के लिए सपा, बसपा, रालोद व अन्य पार्टियों ने शनिवार को धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। जिसके चलते पुलिस अफसर शनिवार सुबह से ही अलर्ट मोड में दिखाई दिये। वहीं, एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह व कई सीओ और कई थानों की पुलिस फोर्स सुबह से ही चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दी गई थी। कलक्ट्रेट को पूरी छावनी में तब्दील कर दिया गया था।

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पुलिस अफसरों को आशंका थी कि कही जनता बवाल हिंसा न कर दे। इसलिए पुलिस प्रदर्शनकारियों के काफिलों के आने पर उन्हें गंभीरता से ले रही थी। जैसे जैसे नेताओं और प्रदर्शनकारियों की भीड़ बढ़ी वैसे ही पुलिस सतर्क हो गई। एक बार तो समय स्थिति विकट हो गई। जब प्रदर्शनकारी डीएम कोे बुलाने की मांग पर अड़ गये। लेकिन पुलिस अफसरों ने किसी तरह नेताओं से बातचीत कर मामले को संभाला।

माननीय लांघ रहे मर्यादा…

नगर निगम की बोर्ड बैठक के दौरान सड़क से सदन तक बवाल का मामला हो या फिर शनिवार को कलक्ट्रेट में दलित समाज की तरफ से प्रदर्शन के दौरान जिस तरह से माननीयों के द्वारा शब्दों की मर्यादा लांघी गई। उसको लेकर एक ही शब्द मन में बार-बार उठता है कि जब माननीय ही मर्यादा लांघे तो फिर माहौल को बिगड़ने से कौन संभाले। यदि कोई सामान्य व्यक्ति गलत भाषा का प्रयोग करे तो उम्र एवं ओहदे में बड़ों का काम होता है,कि वह बिगड़ती बात को संभाल ले, लेकिन जब माननीय ही मर्यादा लांघे तो उससे कौन समझावे। 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व क्रांतिधरा का माहौल खराब न हो उसके लिये खुफिया विभाग अलर्ट हो गया है।

क्रांतिधरा पर लोकसभा चुनाव 2024 के चुनाव से पूर्व राजनीतिक अखाड़े के रूप में मानो कुरुक्षेत्र का मैदान बन गया हो। एक ही पार्टी के नेताओं के द्वारा दूसरे नेता की टांग खींचने का प्रयास किया जा रहा है कि यदि उसने कोई अच्छा कार्य किया तो उसका श्रेय कहीं उसके लोकसभा चुनाव के टिकट की दावेदारी को पक्की न कर दें। जिसमें जहां एक तरफ विपक्ष से सतर्क रहना पड रहा है तो वहीं दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी के भीतर घातियों से भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। नगर निगम की प्रथम बोर्ड बैठक में माननीयों के सामने वंदेमातरम गीत गायन के दौरान, सांसद एवं विधायकों की मौजूदगी में हुये बवाल का मामला हो

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या फिर नगर निगम की बोर्ड बैठक में माननीयों की मौजूदगी व उनके साथ जूतमपेजार का मामला रहा हो। या फिर सपा विधायक अतुल प्रधान के द्वारा न्यूटिमा अस्पताल का प्रकरण रहा हो, इन सबमें माननीयों के द्वारा शब्दों की मर्यादा लांघी गई। वहीं बोर्ड बैठक के दौरान महापौर की अध्यक्षता में जारी सदन की बैठक में बवाल हुआ और अध्यक्ष के रूप में मौजूद महापौर सदन के अंदर माहौल को शांत नहीं करा सके। जोकि सदन से सड़क तक जमकर बवाल हुआ,माननीय भी शब्दों की भाषा एवं मर्यादा नहीं लांगे वह भी जूतमपैजार में एक-दूसरे के साथ गुत्थम-गुत्था होते दिखाई दिये।

माननीयों के सामने होने वाले बवाल के दौरान तो पुलिस पूरी तरह से मूकदर्शक बन जाती है। यदि माननीय बवाल के दौरान मौजूद न हो तो पुलिस कुछ सख्ती दिखाकर मामला शांत कर सकती है। लेकिन माननीयो की मौजदूगी में वह मौन बने रहना ही शायद ठीक समझती है। उधर कलक्ट्रेट में जिस तरह से सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ के द्वारा विवादित बयान दिया गया। उससे माननीयों की शब्दों की मर्यादा तार-तार दिखाई दी।

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