Sunday, May 26, 2024
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सरेआम गुंडागर्दी, हमलावरों ने पुलिस की गाड़ी में मारी टक्कर, फिर लीपापोती क्यों ?

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  • डाक्टरों को पीटा, लाठी डंडों से पीटा, कार तोड़ी
  • सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना कैद, पुलिस ने की सिर्फ खानापूर्ति

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरेआम गुंडागर्दी, इसके बावजूद जानी के इंस्पेक्टर ने समझौता करा दिया। पूरी घटना को जानी पुलिस पचा गई। फेंटम पहुंची, चार गाड़ियां पुलिस की पहुंची। थाने की पुलिस को गाड़ी टक्कर मारकर भाग गई। इसके बावजूद कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसमें थानेदार की बड़ी लापरवाही कोई बड़ा बखेड़ा नहीं खड़ा कर दे। क्योंकि इतना बड़ा बवाल हुआ, उसका मुकदमा दर्ज नहीं करना भी इस ओर इशारा कर रहा है कि इसमें फिर कोई बड़ा बवाल हो सकता है। लापरवाह इंस्पेक्टर सरेआम गुंडागर्दी के मामलों को भी दर्ज करने की बजाय लीपापोती कर रहे हैं, जो खाकी पर उंगली उठा रहा है।

लापरवाह इंस्पेक्टर पर अधिकारियों की कृपादृष्टि बनी हुई हैं, जिसके चलते इंस्पेक्टर अराजकता की घटना को कैसे आला अफसरों से छुपाकर लीपापोती कर रहे हैं, वह बड़ी अनहोनी की वजह भी बन सकती है। कई गाड़ियां तोड़ी गई। लोग खून से लथपथ थे। यह नजारा अराकता से कम नहीं था, लेकिन इंस्पेक्टर के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है। पुलिस की गाड़ी में टक्कर मारकर हमलावर भाग निकले, फिर भी पुलिस पूरे घटनाक्रम पर लीपापोती करती रही। इस तरह से तो हमलावरों का दुस्साहस बढ़ जाएगा।

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यह अराजकता पूर्ण माहौल जानी थानांतर्गत बागपत बाईपास स्थित एक कालोनी में शुक्रवार की रात का है। यहां अराजकता का नंगा नाच हुआ। तीन गाड़ियों में सवार लोगों ने कालोनी में अनधिकृत रुप से रह रहे डाक्टरों को लाठी डंडो से जमकर पीटा और कार तोड़ दी। गुंडागर्दी की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। हैरानी की बात यह है कि सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने खानापूर्ति करते हुए गाड़ी को लेकर सुभारती चौकी आई और बाद में डाक्टरों को वहां से जाने दिया।

कालोनी में शुक्रवार की रात ग्यारह बजे के करीब दो गाड़ियों में सवार होकर युवक आए और कालोनी में रह रहे सुभारती मेडिकल कालेज के डाक्टरों को पकड़ कर पीटना शुरु कर दिया। यह पूरी घटना पूरी तरह से फिल्मी अंदाज में हुई। दो गाड़ियां तूफानी गति से आई और कालोनी के गेट के सामने आकर रुकी। तभी काले रंग की कार आई और उसमें से चार लोग निकले। देखते देखते इनमें मारपीट शुरु हो गई। इस बीच एक युवक ने डंडा निकाला और डाक्टर रोहन त्यागी के सिर पर वार कर दिया। हमले में डाक्टर रोहन घायल कर दिया। सूचना मिलते ही सबसे पहले पीआरवी पहुंची फिर इसके बाद सुभारती पुलिस चौकी का स्टाफ आ गया।

पुलिस को देखकर कालोनी में रहने वालों ने खुलकर आरोप लगाना शुरु कर दिया कि गैरकानूनी तरीके से रहने वाले डाक्टरों ने अराजकता की सीमा पार कर रखी है। शराब पीकर रोज झगड़े होते हैं और मारपीट की घटनाएं आम हो गई है। पुलिस ने मौके पर खड़ी क्षतिग्रस्त कार की तलाशी ली तो उसमें से दो घड़ी और मोबाइल मिला। पुलिस ने कार मालिक रोहन के जरिये कार को चौकी पर भिजवाया। पुलिस की नाकामी देखिये सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना कैद होने के बाद भी पुलिस तहरीर मिलने पर कार्रवाई की बात कर रही थी।

कालोनी वालों ने पुलिस से कहा कि बाहरी लोगों के प्रवेश के कारण असुरक्षा का खतरा बढ़ता जा रहा है। पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इस पूरे मामले में जानी इंस्पेक्टर संजीव वर्मा की भूमिका भी संदिग्ध है। जब गुंडागर्दी और अराजकता की शिकायत मिली तब दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या पुलिस किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है। करीब पौन घंटा पुलिस कालोनी के अंदर रही और गुंडागर्दी करने वालों की जानकारी लेती रही, फिर भी खामोश रही। पुलिस ने स्वत संज्ञान लेते हुए कार्रवाई क्यों नहीं की? हमलावर पुलिस की गाड़ी में टक्कर मारकर भाग निकले, फिर भी पुलिस कार्रवाई करने से पीछे क्यों हट रही हैं?

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