Wednesday, October 20, 2021
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किंग बेकरी पर सील, फिर भी चल रहा कारोबार

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  • पूरी बिल्डिंग एमडीए ने मानी अवैध, फाइल सचिव के पास रखी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पीएल शर्मा रोड पर स्थित किंग बेकरी पर सरकारी दस्तावेज में सील लगी हुई हैं, लेकिन मौके पर कारोबार चल रहा है। कहीं भी कोई सील नहीं लगी। सड़क से 27 फीट छोड़कर किंग बेकरी का निर्माण सरकारी दस्तावेज में होना चाहिए था, लेकिन अगले हिस्से में 17 फीट की जगह छोड़ी गई। इसी वजह से पूरी बिल्डिंग एमडीए ने अवैध मान ली है। इसकी फाइल एमडीए सचिव के पास रखी है, जिस पर अभी तक एमडीए अधिकारी कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं।

किंग बेकरी का अगला हिस्सा तोड़ा जाएगा, जिसके बाद ही इसकी कंपाउडिंग संभव हो सकती है। फिर एफएआर का भी उल्लंघन हुआ है। तंग गली में 20 से ज्यादा दुकानों का निर्माण कर दिया गया है। बेसमेंट हैं, उसमें पार्किंग दिखाई गयी हैं, लेकिन बेसमेंट में बेकरी का काम चल रहा है। इस तरह से तमाम कार्य नियम विरुद्ध किये जा रहे हैं, जिसके चलते किंग बेकरी की फाइल पर एमडीए के अधिकारी हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं।

क्योंकि इसमें अधिकारियों की गर्दन भी फंस सकती हैं। दरअसल, पीएल शर्मा रोड वर्तमान में अवैध निर्माण को लेकर खासी चर्चा में आ गया है। खुद कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने पीएल शर्मा रोड पर हुए अवैध निर्माणों का संज्ञान लिया हैं, जिसके बाद एमडीए के इंजीनियर हरकत में तो आ गए, लेकिन कुछ अवैध निर्माणों को बचाने की कवायद में भी जुट गए हैं। कमिश्नर के कड़े तेवरों के बाद भी एमडीए के इंजीनियर अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं?

यह बड़ा सवाल है। कमिश्नर के आदेश देने के बाद इस तरह का रवैया एमडीए इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल पर अंकुर बंसल ने शिकायत की थी कि ई-पार्क के नाम से निर्मित कॉम्प्लेक्स का ऊपरी मंजिल अवैध हैं तथा गली में लेंटर निकालकर अवैध निर्माण कर दिया है। इसके साथ ही किंग बेकरी के पीछे के हिस्से में एक पुराने मकान को तोड़कर व्यवसायिक निर्माण किया जा रहा है।

यह भी मानचित्र के विपरीत निर्माण किया जा रहा है, इसकी भी शिकायत पीएम पोर्टल व सीएम पोर्टल पर की गई थी। इसमें भी एमडीए के इंजीनियरों ने खानापूर्ति कर दी है। जिला सहकारी बैंक चौराहे से जैसे ही पीएल शर्मा रोड पर चलते है, तभी एक व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर दिया गया है, जो पूरी तरह से अवैध है। इसका मानचित्र एमडीए ने कैसे स्वीकृत कर दिया? इसको लेकर भी इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

पीछे आवासीय स्वीकृत किया तथा आगे व्यवसायिक स्वीकृत किया। इस तरह से पूरा ही घालमेल एमडीए के इंजीनियरों ने इसमें कर दिया है, लेकिन इसका भी पूरा निर्माण कर दिया गया है। इसमें पार्किंग तक नहीं हैं। पीएल शर्मा रोड पर एमडीए पर यह अवैध निर्माण का कार्य इंजीनियर देवेन्द्र के कार्यकाल में आरंभ हुआ।

देवेन्द्र तो निर्माण कराकर चले गए, उसके बाद सिसौदिया व अश्वनी जेई ने निर्माण करा दिये। कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने इन तीनों इंजीनियरों की जांच कराकर इनके खिलाफ भी शासन को पत्र व्यवहार करने की बात कही है। अब देखना यह है कि इसमें इंजीनियरों पर क्या कार्रवाई होगी?

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