Saturday, December 4, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsBaghpatकिसानों पर अत्याचार करना सबसे बड़ा पाप: शौकेंद्र

किसानों पर अत्याचार करना सबसे बड़ा पाप: शौकेंद्र

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  • अर्जुन अवार्डी पहलवान एवं सपा नेता ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए भाजपा पर साधा निशाना
  • कहा, किसान का साथ देना सबसे बड़ा धर्म, अन्नदाता पर लाठियां मारना सरकार को पड़ेगा भारी

मुख्य संवाददाता |

बागपत: अर्जुन अवार्डी पहलवान एवं सपा नेता शौकेंद्र तोमर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों पर अत्याचार करना सबसे बड़ा पाप होता है। किसान का साथ देना सबसे बड़ा धर्म है। जिस तरह महाकुंभ में गोता लगाकर व्यक्ति पुण्य कमाता है उसी तरह किसान सड़कों पर उतरे तो उसके साथ कदम बढ़ाकर चलना और उसकी आवाज बनना सबसे बड़ा पुण्य है।

सरकार आज उस अन्नदाता को प्रताड़ित कर रही है जिसने कोरोना में देश की आर्थिक रीड बनने का काम किया है। किसान पर मारी गई एक-एक लाठी का बदला लेने को वह तैयार है। अन्नदाता को प्रताड़ित करने वाली सरकार आज तक देश में देखने को नहीं मिली।

अर्जुन अवार्डी पहलवान एवं सपा नेता शौकेंद्र तोमर ने बुधवार को बयान जारी किया और किसान आंदोलन को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पंजाब से किसान आंदोलन शुरू हुआ और अब दिल्ली पहुंच गया है। पंजाब, हरियाणा व यूपी का किसान सड़कों पर उतर चुका है।

क्योंकि किसानों की आवाज आज सरकार सुनने को तैयार नहीं है। देश में नए कृषि कानून को किसानों के विरोध के बाद भी लागू कर दिया गया। किसानों की सुनने वाला कोई नहीं है। किसान पंजाब से दिल्ली के लिए चले तो उन्हें रोकने के लिए सरकार ने हर हथकंडे अपनाए। गंदे पानी की बौछार कराई, सड़कों में 15-20 फीट गड्ढे करा दिए गए, किसानों को रोकने के लिए कटीले तार लगाए गए, आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

यह देश के अन्नदाता को रोकने की ताकत सरकार ने दिखाई है, लेकिन किसान की ताकत को शायद सरकार भूल गई थी। किसान ने सरकार की हर रूकवाटों को तोड़ा और दिल्ली की ओर बढ़ गए। कड़ाके की सर्दी में किसान सड़कों पर रहने को मजबूर है। क्योंकि किसानों की सुनी नहीं जा रही है।

उन्होंने कहा कि देश में अभी तक के इतिहास में ऐसी सरकार नहीं देखी जो किसानों को कटीले तारों से रोक रही है। एक तरफ तो कटीले तार लगाने पर किसान पर कार्रवाई की जाती है और सरकार खुद किसान को रोकने के लिए कटीले तारों का प्रयोग कर रही है। कटीले तारों से सरकार को गोवंश की चिंता हो जाती है, किसानों की चिंता नहीं है।

भले ही किसान उन तारों में कट जाए, लेकिन सरकार को इसकी परवाह नहीं है। आज किसान पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को जाति-धर्म की राजनीति के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता। किसानों पर अत्याचार करना सबसे बड़ा पाप है। किसान का साथ अगर सरकार देती तो वह महाकुंभ में गोता लगाकर पुण्य कमाने जैसा होगा, लेकिन सरकार इस तरह का पुण्य नहीं बल्कि पाप करने में लगी है।

उन्होंने कहा कि एनडीए से उनके साथी अलग हो रही है। किसान आंदोलन को लेकर अकाली दल पहले ही अलग हो चुका है। हरियाणा में निर्दलीय विधायक सरकार से समर्थन वापस ले चुके हैं। हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी किसान हित में बयान दे रहे हैं। राजस्थान में भाजपा सहयोगी हनुमान बेनीवाल भी मोर्चा खोल चुके हैं।

दूसरे राज्यों के नेता सरकार में होते हुए भी किसानों का साथ देने की बात कर रहे हैं, लेकिन वेस्ट यूपी के भाजपा नेता चुप्पी साधे हुए हैं। वह सवाल पूछना चाहते हैं कि क्या यहां के भाजपा नेता किसान पुत्र नहीं है? क्या उन्हें अन्नदाता की चिंता नहीं है? अगर अन्नदाता उनके लिए कुछ नहीं है तो वह पद पर बने रहें, अन्यथा त्यागपत्र देकर किसानों का साथ देने का काम करें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार ने पिछले चार सालों में एक भी रुपया गन्ने पर नहीं बढ़ाया। जबकि सपा सरकार में पेराई सत्र से पहले ही मूल्य बढ़ाया जाता था। किसान की आय दोगुनी करने की बजाय उसकी आय को खत्म करने का प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में किसान एक-एक लाठी व अत्याचार का बदला लेगा।

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