- गांधी आश्रम समिति और कर्मचारियों के बीच हुए विवाद के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से उतरवाई ईंट
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गांधी आश्रम का विवादों से पीछा नहीं छुट रहा हैं। प्राचीन बिल्डिंग तोड़ दी गई थी। इमारत से लाखों पुरानी ईंटे निकाली गई, ये ईंट गुरुवार की सुबह पांच ट्रैक्टर ट्राली लेकर कुछ लोग लादने लगे, तभी कर्मचारी यूनियन के लोगों ने इसका विरोध कर दिया। दोनों गुट ईंट को लेकर आमने-सामने हो गए।
एक गुट चाहता था कि ये ईंट गांधी आश्रम परिसर से बाहर चली जाए, लेकिन एक गुट ने दो टूक ऐलान कर दिया कि ये गांधी आश्रम की सम्पत्ति हैं। यहां से एक ईंट भी बाहर नहीं जाने दी जाएगी। इसको लेकर टकराव पैदा हो गया। जब बात पुलिस बुलाने तक पहुंच गई, तभी दूसरा गुट पीछे हटा और टैÑक्टर में लदी र्इंटों को नीचे उडेलकर ट्रैक्टर लेकर भाग निकले।

दरअसल, गांधी आश्रम की इमारत को एक बिल्डर ने डीड होने की बात कहते हुए तुड़वा दिया था। उसी दौरान इसका बड़ा विरोध हुआ था। शासन स्तर से इसमें रावत समेत तेरह गांधी आश्रम समिति के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। ये मुकदमा लखनऊ स्थित हजरत गंज कोतवाली में दर्ज हुआ था, जिसकी वर्तमान में विवेचना चल रही हैं। विरोध करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि रेणुका फर्म की तरफ से र्इंट उठवाने के लिए गुरुवार की सुबह पांच टैÑक्टर गांधी आश्रम में भेज दिये थे।
र्इंटे लाद दी गई थी, लेकिन अचानक उन्हें पता चला तो इसका भारी विरोध हो गया। विरोध दो घंटे तक चला। क्योंकि रेणुका फर्म के मालिकों को पता था कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की छुट्टी हैं, जिसके चलते कोई भी गांधी आश्रम में नहीं हैं। सभी लोग अपने-अपने घरों पर छुट्टी गए हैं। इसका लाभ उठाने के लिए ट्रैक्टर भेजकर र्इंट उठाने के लिए भेजा गया, लेकिन कर्मचारियों को इसकी भनक लग गई, जिसके बाद भारी विरोध हो गया।
ट्रैक्टर में र्इंट उठाने वालों का पक्ष रावत व उसके साथियों ने लिया, जिसके बाद रावत व दुसरे ग्रुप में तनातनी हो गयी। दो घंटे तक गहमा-गहमी रही, इसके बाद ही ट्रैक्टर में लादी गई र्इंटों की ट्रॉली को उडेल दिया गया तथा पुलिस को सूचना देने की बात की तो ट्रैक्टर चालक टैÑक्टर लेकर भाग खड़े हुए।
आरटीओ में वसूली की होगी जांच !
आरटीओ में चल रहे भ्रष्टाचार का मामला परिवहन मंत्री के सामने जा पहुंचा। परिवहन मंत्री को कुछ लोगों ने बताया कि आरटीओ आॅफिस में दलाल राज है। एनओसी जारी करने व एनओसी रद्द करने, नाम परिवर्तन करने व अन्य कार्यों के लिए अवैध वसूली की जाती है। अगर कोई व्यक्ति सीधा आरटीओ आॅफिस में काम कराने के लिए आता है तो उसको कागज के नाम पर टरकाया और परेशान किया जाता है।

परेशान व्यक्ति दलालों से मजबूरन संपर्क में आता है। इसके बाद ही अवैध वसूली का खेल शुरू होता है। आरटीओ आॅफिस में दलाल कर्मचारियों की सीट पर सरकारी कार्य करते हुए भी देखे जा सकते हैं। उनको कोई रोक-टोक नहीं है। ऐसे गंभीर आरोप छात्र नेता शशिकांत गौतम ने लगाए हैं। छात्र नेता ने जो शिकायत की है, उसको परिवहन मंत्री ने गंभीरता से लिया है। यही नहीं, शिकायतकर्ता ने डग्गाजार बसों के संचालन, आरटीओ की मिली भगत इसमें होने की शिकायत भी की है।
संचालन रात में ही नहीं, बल्कि दिन में भी हो रहा हैं। अवैध संचालन को रोका नहीं जा रहा हैं। डग्गामार वाहन हर रोज दौड़ रहे हैं। अवैध बसों पर उत्तर प्रदेश परिवहन से मिलता जुलता नाम बसों पर लिखा है, ऐसा लगता है कि वो अनुबंधित बस ही हैं, लेकिन वह होती डग्गामार बसे हैं। इन तमाम मामलों की परिवहन मंत्री ने जांच करने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद ही कार्रवाई की जाएगी।

