Tuesday, July 21, 2026
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चमगादड़ पक्षियों की श्रेणी में क्यों नहीं आते ?

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विष्णुदेव मंडल |

चमगादड़ इन दिनों काफी चर्चाओं में है। खासकर कोरोना वायरस फैलने के बाद से ये भी कहा जाता रहा है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति चमगादड़ से हुई है। एक अन्य शोध बताता है कि उसमें करीब 13 हजार वायरस रहते हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि चमगादड़ पक्षी होते हुए भी उनसे अलग होता है।

पृथ्वी पर चमगादड़ आज से 06 करोड़ साल पहले से रह रहे हैं। साइंटिस्ट के अनुसार दुनियाभर में चमगादड़ की 2000 से ज्यादा किस्में हैं। आप कह सकते हैं कि ये पूरी दुनिया में पाया जाता है, बस केवल उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर ये नहीं होता।

आपने शाम के समय कहीं न कहीं चमगादड़ उड़ते हुए अवश्य देखे होंगे। ये कई नामों से जाने जाते हैं। इन्हें हिंदी में चमगादड़, मैथिली और बंगला में बादुर कहते हैं। वैज्ञानिकों ने चमगादड़ की कुल 800 प्रजातियों का पता लगाया है। उनका मानना है कि आज से दो करोड़ वर्ष पहले भी चमगादड़ पृथ्वी पर पाया जाता था। विशेषज्ञों ने उन्हें पक्षियों की श्रेणी में नहीं रखा है।

चमगादड़ तितली से लेकर चील तक के आकार के होते हैं। छोटे चमगादड़ प्राय: खपड़ैल वाले मकान के दरारों और छप्परों में तथा बांस के सुराखों में अक्सर मिल जाते हैं। ये कीड़े, मकोड़े, फतिंगे तथा दीमकों को अपना भोजन बनाते हैं। ये अपने रहने के स्थान को बखूबी पहचानते हैं चाहे वह किसी बिल में ही क्यों न रहते हों।
मकानों और खोहों में रहने वाले चमगादड़ उल्टा नहीं लटकते।

ये आहार करने के लिए रात में दो बार निकलते हैं। पहली बार संध्या शुरू होते ही निकल कर आहार करने में लग जाते हैं और बारह बजे रात में अपने रहने के स्थान पर चले जाते हैं। दो घंटे विश्राम करने के बाद फिर दो बजे रात में निकलने के बाद सुबह होते ही चिड़ियों के जगने से पहले अपने रहने के स्थान पर चले जाते हैं। इनके दुश्मन कौआ, बाज और अन्य पक्षी हैं।

कोई-कोई चमगादड़ तो सारी रात स्वच्छंद उड़ता रहता है। यह चूट-चूट-चूट-चुट की आवाज करके बोलता है। खपड़ैल वाले मकानों में रहने वाले छोटे चमगादड़ अपने आठ-दस परिवारों के साथ रहते हैं। इसके इतने परिवार बांस के छेद में भी रहते हैं। जंगलों और गुफाओं में रहने वाले बड़े और मंझले कद के चमगादड़ उल्टा लटकते हैं। उनके उल्टा लटकने से उनके शिकारी दुश्मन पक्षी इस भ्रम में पड़ जाते हैं कि उस वृक्ष के सूखे पत्ते लटक रहे हैं, क्योंकि वृक्ष के सूखे पत्तों और चमगादड़ों में कोई भिन्नता मालूम नहीं पड़ती। दोनों एक जैसे लगते हैं।

बड़े चमगादड़ शाकाहारी और फलाहारी होते हैं। ये चमगादड़ दो रंग के होते हैं, काले और भूरे। इनका भोजन पका हुआ आम, अमरूद, महुआ, जामुन, बरगद और पीपल के पके हुए फल, पपीते आदि हैं। ये अपने भोजन की खोज में कई कई किलोमीटर दूर तक निकल जाते हैं।

इनकी घ्राणशक्ति बड़ी तेज होती है। कई-कई किलोमीटर दूर से पके फलों की गंध पाकर वहां तक पहुंच जाते हैं। अपने भोजन की खोज में ये चालीस किलोमीटर दूर तक निकल जाते है। दूर रहते हुए भी फलों की गंध पाकर वे समझ जाते हैं कि वह किस फल की गंध है और कितनी दूर से आ रही है। बड़े चमगादड़ की आवाज बड़ी कर्कश होती है। जब दो चमगादड़ आपस में झगड़ते हैं, तब उनके मुंह से जोरों की खीं-खीं-खीं-खीं खीं की चीख निकलती है।

वैज्ञानिकों का ऐसा मत है कि चमगादड़ अपने मुंह से आहार और मुंह से ही मल त्याग करता है। उनका मानना है कि चमगादड़ों की आंखें नहीं होतीं। वे अंधे होते हैं लेकिन प्राय: देखा गया है कि खपड़ैल वाले मकानों में रहने वाले चमगादड़ को सांप जब पकड़ने के लिए उनकी ओर सरकता है तो चमगादड़ उड़ कर भाग जाता है।
दिन के बारह बजे चिलचिलाती धूप में भी चमगादड़ को उड़ते देखा गया है। उड़ने वाले जीवों में चमगादड़ ही ऐसा जीव है जो बच्चे को जन्म देता है और दूध पिलाता है।

यह एकमात्र ऐसा स्तनधारी है जो उड़ सकता है तथा रात में भी उड़ सकता है। इसके अग्रबाहु पंख मे परिवर्तित हो गए हैं जो देखने में झिल्ली (पेटाजियम) के समान लगते हैं। त्वचा की यह झिल्ली गरदन से लेकर हाथ की अंगुलियों तथा शरीर के पार्श्वभाग से होती हुई पूछ तक चली जाती है एवं पंख का निर्माण करती है। पिछली टांगें पतली, छोटी और नखयुक्त होती हैं। इसके शरीर पर बाल कम ही होते हैं। सिर के दोनों ओर बड़े-बड़े कर्णपल्लव पाए जाते हैं।

अधिकतर चमगादड़ कीड़े-मकौड़े खाते हैं। गर्म स्थानों पर रहने वाले चमगादड़ फल-फूल खाकर ही जिंदा रह लेते हैं। कुछ चमगादड़ ऐसे भी होते हैं जो दूसरे जानवरों का खून पीकर जिंदा रहते हैं। इनको वैम्पायर चमगादड़ इन्हीं से प्रेरणा लेकर वैम्पायर फिल्म बनी थी। हालांकि लोगों में गलत धारणा है कि सभी चमगादड़ खून पीते हैं जबकि ऐसा नहीं है।

ज्यादातर लोग इसीलिए चमगादड़ों से डरते हैं कि वो खून पीते हैं। वैसे खून पीने वाले वैम्पायर चमगादड़ कुछ बड़े आकार के होते हैं। वो 30 सेंटीमीटर तक के होते हैं। इनके दांत सुई की तरह तेज होते हैं। ये अपने इन्हीं दांतों से किसी भी जानवर की खाल में छेद कर देते हैं और अपनी जीभ की मदद से उसका खून पी लेते हैं।
इसकी एक और खासियत ये है कि ये रात में आसानी से उड़ सकता है।

ये उच्च आवृत्ति वाली ध्वनियां पैदा करता है, जो आसपास की चीजों से टकराकर वापस लौट आती हैं, जिससे उसको अंदाज हो जाता है कि उसके मार्ग कहां रुकावट है। उसके बड़े बड़े कान इसे सुनकर इसका अंदाज लगा लेते हैं। सबसे बड़ी किस्म का चमगादड़ फ्लाइंग फॉक्स होता है। इसके शरीर की लंबाई 40 सेंटीमीटर होती है। चमगादड़ों की उम्र आमतौर पर 20 साल होती है।

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