Sunday, October 17, 2021
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ट्रैफिक पुलिस का इतना बड़ा कुनबा, फिर भी क्रांतिधरा जाम

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  • पिछले तीन वर्षों में ट्रैफिक पुलिस को मिली कई सौगात
  • कोरोना संक्रमण के बढ़ने से ई-रिक्शा और टेम्पो चालाकों पर शिकंजा
  • चार सवारियों से ज्यादा नहीं बैठा सकेंगे चालक सवारी

जनवाणी ब्यूरो |

मेरठ: स्टाफ के नाम पर ट्रैफिक का बड़ा कुनबा, फिर भी शहर में भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था लोगों के लिए नासूर बनती जा रही है। व्यवस्था को बेहतर बनाने का जिम्मा ट्रैफिक पुलिस पर है, लेकिन शहर में कहीं भी यातायात व्यवस्था सुचारु नहीं दिखती है। अगर कोई सवाल उठाए तो स्टाफ की कमी का रोना रो दिया जाता है।

अहम सवाल ये है कि क्या स्टाफ की कमी सिर्फ शहर के लिए ही है। शहर के बाहर हाइवे पर चेकिंग कर अवैध उगाही के आरोप लगते हैं। व्यवस्था दुरुस्त करने की जिम्मेदारी जिस निजाम पर है, वह पूरी तरह से सुस्त बना है। शहर में यातायात नियमों की अनदेखी तो आम बात है, लेकिन जाम की भी समस्या भीषण है। बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते टेम्पो व ई-रिक्शा में भूसे की तरह सवारी ढोई जा रही है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस इन सबसे अनजान बनी हुई है।

कोरोना संक्रमण के चलते चार से ज्यादा सवारियां नहीं बैठा सकेंगे। ज्यादा सवारी बैठाने पर जुर्माना लगाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पिछले तीन वर्षों में शहर को जाम से निजात दिलाने के लिये ट्रैफिक पुलिस को कई सौगात मिली है। फिर भी ट्रैफिक व्यवस्था जस की तस है। मंगलवार को शहर में रोजाना की भांति भीषण जाम मिला। दिल्ली रोड से लेकर रेलवे रोड चौराहे और बेगमपुल जीरो माइल तक वाहन रेंगतें दिखे।

शहर में जाम लगने की चार मुख्य वजह

शहर में जाम लगने की चार मुख्य वजह है। शहर में सबसे ज्यादा जाम भैंसाली बस अड्डा और सोहराब गेट के बाहर रहता है। दूसरी वजह टीपीनगर से ट्रांसपोर्ट भी पर जाम के हालात रहते हैं। तीसरी वजह शहर में कोई भी ई-रिक्शा, टेम्पो और मंडपों की पार्किंग व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से जाम की स्थिति पैदा होती है। चौथी वजह से शहर में कोई रिंग रोड की भी व्यवस्था नहीं है। कोई भी बाहरी वाहन शहर से होकर ही गुजरता है।

हर साल चलता है नवंबर में यातायात माह

शहर में हर वर्ष यातायात माह चलाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। इस वर्ष भी ट्रैफिक पुलिस यातायात माह चलाकर वाहन स्वामियों को जागरूक कर रही है, लेकिन महानगर में यातायात माह का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। बिना हेलमेट और मास्क के दो पहिया वाहन दौड़ रहे हैं।

इन चौराहों पर लगता है जाम

बेगमपुल, जीरो माइल, कचहरी गेट, रेलवे रोड चौराहा, हापुड़ अड्डा, फुटबॉल चौराहा, बागपत गेट, अहमद रोड, दिल्ली रोड खैरनगर, बच्चा पार्क, गढ़ रोड, भूमिया का पुल इत्यादि।

जाम की समस्या को लेकर बने कई बार मास्टर प्लान

शहर से जाम की समस्या को लेकर ट्रैफिक पुलिस द्वारा कई बार मास्टर प्लान बन चुके हैं, लेकिन जाम की समस्या तस से मस नहीं हो रही है। कई बार कमिश्नर ने भी जाम को लेकर पुलिस अधिकारियों बैठक की है।

ट्रैफिक पुलिस का बेड़ा

  • एक एसपी ट्रैफिक
  • एक सीओ ट्रैफिक
  • पांच ट्रैफिक इंस्पेक्टर
  • छह ट्रैफिक दारोगा
  • 41 एचसीपी व हेड कांस्टेबल
  • 131 सिपाही
  • 100 होमगार्ड
  • 60 पीआरडी जवान
  • 25 टोमो
  • 25 अपाचे बाइकें
  • 10 स्कूटी एंजिल
  • 4 क्रेन ट्रैफिक
  • ट्रैफिक कंट्रोल रूम
  • बॉडी कैमरे

जाम में फंसे तो इन नंबरों पर करें कॉल

  • 9454401913 एसपी ट्रैफिक
  • 9454404000 कंट्रोल रूम
  • 9454401073 ट्रैफिक हेल्पलाइन

यातायाम माह में एक से 24 नवंबर तक चालान, वसूली

  • चालान 23,21,553
  • वसूली 37,57,900

शहर में जाम की स्थिति से निपटने के लिये ट्रैफिक पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है। वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते कुछ जगह जाम की स्थिति पैदा हो जाता है। बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते ई-रिक्शा व टेम्पो चालाकों पर शिकंजा कसा जाएगा। सोशल डिस्टेंस का पालन कर चार सवारियों से ज्यादा न बैठाए। शहर के सभी प्वाइंटों पर ट्रैफिक पुलिस मुस्तैद रहती हैं।                                                     -जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी ट्रैफिक

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