Monday, January 24, 2022
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HomeUttar Pradesh NewsSaharanpurगुर्जरों का गुस्सा सिफर करने को भाजपा ने चली चतुर चाल

गुर्जरों का गुस्सा सिफर करने को भाजपा ने चली चतुर चाल

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  • वीरेंद्र सिंह को एमएलसी बनाकर आक्रोश खत्म करने का दांव
  • गुर्जरों को भाजपा के पक्ष में करने को अपनाया नया हथकंड़ा

मुख्य संवाददाता |

सहारनपुर: चुनावी बेला में जाति समूहों पर पकड़ बनाने के लिए अन्य दलों की मानिंद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी भी हर हथकंडे अपना रही है। अगर पश्चिमी उप्र की बात करें तो इन दिनों सम्राट मिहिर भोज की जाति को लेकर राजपूतों और गुर्जरों की अनबन किसी से नहीं छुपी है। इन दो बिरादरी में तनातनी के बीच भाजपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और कद्दावर नेता वीरेंद्र सिंह गुर्जर को एमएलसी बना कर बड़ा दांव चला है।

राजनीति के टीकाकारों का कहना है कि वीरेंद्र सिंह के एमएलसी बनाए जाने के बाद गुर्जर समाज का सरकार के प्रति गुस्सा रफ्ता-रफ्ता ठंडा पड़ने लगा है। उदाहरण के तौर पर सम्राट मिहिर भोज के मसले को लेकर दादरी में पिछले दिनों आयोजित महापंचायत फीकी रही। उधर, वीरेंद्र सिंह गुर्जर, अगले साल होने वाले विस चुनाव को लेकर पश्चिमी यूपी की सभी विधानसभा सीटों पर गुर्जरों को भाजपा के पक्ष में लामबंद करने की जिम्मेदारी उठाने को आगे आ चुके हैं।

पश्चिमी उप्र में जाटों-मुस्लिमों के साथ गुर्जरों की भी अच्छी खासी संख्या है। आगरा, मथुरा, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर समेत पश्चिम के अन्य जिलों में गुर्जर बिरादरी के मतदाता चुनाव में अहम् रोल अपनाते रहे हैं। किसी समय सहारनपुर के चौधरी यशपाल सिंह का पूरे पश्चिम के गुर्जर समाज में खासा दबदबा रहा करता था।

चौधरी यशपाल की ही तरह सहारनपुर मंडल के शामली जनपद के रहने वाले चौधरी वीरेंद्र सिंह ने भी सियासत में अपना बड़ा रसूख बनाया। सन 80 से वीरेंद्र सिंह राजनीति की रपटीली राहों पर दौड़ लगाते रहे हैं। अपनी सियासी पकड़ और सूझबूझ के नाते ही वीरेंद्र सिंह छह बार विधायक चुने गए। एक बार वह कैबिनेट मंत्री तो एक बार दर्जा प्राप्त मंत्री भी बनाए गए। भाजपा से एमएलसी बनने के पहले भी वह विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं।

बहरहाल, ताजा सियासी हालात में भाजपा ने वीरेंद्र सिंह को एमएलसी बनाकर बड़ा पैंतरा चला है। दरअसल, इन दिनों सम्राट मिहिर भोज की जाति को लेकर गुर्जर और राजपूत समाज में तनातनी है। हुकूमत के रवैये से गुर्जर समाज में काफी नाराजगी देखी जा रही थी। खासकर, गौतमबुद्ध नगर में। इसका असर अन्य जनपदों के गुर्जरों पर भी पड़ रहा था। इस बात का सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ और उनके कारकूनों को भी अहसास था।

बहरहाल, इस कठिन घड़ी में पूर्व कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह गुर्जर को भाजपा ने एक झटके में एमएलसी मनोनीत कर दिया। इससे गुर्जर समाज में अलग तरह का संदेश गया। परोक्ष रूप से गुर्जरों में सरकार को लेकर जो गुस्सा था, वह ठंडा होता दिख रहा है। दरअसल, कृषि कानूनों व अन्य किसान समस्याओं को लेकर भाकियू और रालोद का मुखर होना, भाजपा के लिए नुकसान भरा माना जा रहा है।

खासकर पश्चिम के जाटों में सरकार को लेकर नाराजगी साफ झलक रही है। ऐसे में गुर्जरों को अपने पक्ष में लामबंद करना भाजपा के लिए मौका और दस्तूर दोनों बातें थीं। इसीलिए वीरेंद्र सिंह पर भाजपा ने दांव चल दिया। सहारनपुर में गुर्जर समाज के कद्दावर नेता मुकेश चौधरी भी इन दिनों भाजपा में हैं। इसी तरह अन्य जनपदों में भी गुर्जर समाज के कई कद्दावर भाजपा के साथ हैं। वीरेंद्र सिंह इन्हीं को साथ लेकर विधान सबा चुनावों में अपना कड़ा इम्तेहान देंगे।

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