Friday, May 15, 2026
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…लेकिन पब्लिक के मन की बात की फिक्र नहीं निगम को

  • कबाड़ से जुगाड़ की तस्वीरें खूबसूरत सही, लेकिन शहर के बदनुमा दाग कब मिटाएगा नगर निगम?
  • शहर की सड़कों और नालों का हाल बेहाल
  • जनता का दिल जीतने का उपक्रम भी कीजिए नगरायुक्त साहब!

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 

अपने सारे ऐब छिपाकर बैठे हैं।
हर कांटे पर फूल बिछाकर बैठे हैं।।
अब देखेंगे कैसे दाग दिखाएगा,
दर्पण पर तस्वीर सजाकर बैठे हैं।।

ये पंक्तियां उन तस्वीरों की बहुत ही सटीक अक्काशी कर रही हैं, जो नगर निगम की ओर से जमाने भर को दिखाई जा रही हैं। नगर निगम की कबाड़ से जुगाड़ वाली तस्वीरें हैं ही इतनी मनमोहक, कि मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक इनकी तारीफ करते हुए नगर निगम की पीठ थपथपाई,

लेकिन नगर निगम क्षेत्र की उन तस्वीरों का क्या कीजिए? जिनमें पुरानी बस्तियों से लेकर पॉश कालोनियों तक हर तरफ जलभराव, गंदगी के ढेर और टूटी सड़कें ही नजर आती हैं। ऐसे में नागरिकों की ओर से एक सवाल बड़ा वाजिब है कि नगर निगम के अधिकारी आखिर उनके मन की बात कब सुनेंगे।

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रविवार को पीएम नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में मेरठ नगर निगम के कबाड़ से जुगाड़ अभियान की खूब तारीफ की है। इसमें कोई संदेह नहीं कि नगर निगम ने कबाड़ को खूबसूरत अंदाज में सजाकर मनमोहक तस्वीरें दुनिया के सामने पेश की हैं, जिनकी तारीफ पर किसी को आपत्ति होनी भी नहीं चाहिए। पीएम समूचे देश को मेरठ के इस प्रयास से प्रेरणा लेने का संदेश देते हैं, तो नगर निगम के अधिकारियों का सीना गर्व से चौड़ा होना ही चाहिए।

बस नागरिकों का इतना कहना है कि उनके मन की बात को भी नगर निगम के अधिकारी अनसुना न करें, और लंबे समय से जिन मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग की जाती हैं, उन पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि शहर के वाशिंदे भी नगर निगम को मिलने वाली ऐसी तारीफ में दिल खोलकर तालियां बजा सकें, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है और इसके पीछे कारण भी बिल्कुल साफ है कि नागरिकों को हर दिन महानगर के अधिकांश भाग में एक जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

वही जगह-जगह जलभराव, वही टूटी सड़कें, वही इधर-उधर गंदगी के ढेर जब नागरिकों को देखने को मिलें, तो कबाड़ से जुगाड़ की चाहे जितनी तारीफ की जाए, लेकिन आम नागरिक नगर निगम की इन खुशियों में पूरे मन से शरीक होने में संकोच जरूर कर सकते हैं। नागरिकों की मन की बात तो यह है कि बारिश के दौरान शहर का आधे से ज्यादा इलाका जलमग्न हो जाता है। जहां से पानी उतरने में काफी समय लग जाता है।

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यह स्थिति पुरानी बस्ती लिसाड़ी गेट, कांच का पुल, बुनकर नगर, पिलोखड़ी पुल, शामनगर, हापुड़ रोड, घंटाघर, जली कोठी आदि इलाकों तक सीमित नहीं रहती। बल्कि महानगर की पॉश कालोनी साकेत, शंभुनगर, माधवपुरम, न्यू शंभुनगर, मानसरोवर, पांडव नगर, मंगल पांडेय नगर, गढ़ रोड, बागपत अड्डे से लेकर हापुड़ अड्डे तक जगह जगह जलभराव, भीतरी मार्गों के साथ-साथ मुख्य रोड तक जगह-जगह टूटी सड़कें देखने को मिल जाती हैं।

महानगर की अधिकतर सीवर लाइन आए दिन चोक होकर नालों के ओवर फ्लो होने के रूप में नागरिकों के सामने आ ही जाती हैं। नागरिकों का कहना है कि पीएम नरेन्द्र मोदी का सपना मेरठ महानगर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होते हुए देखने का है,

जिसे पूरा करने के लिए नगर निगम को कबाड़ से जुगाड़ के सफर को खूबसूरत महानगर में तब्दील करने की दिशा में प्रयास करने की जरूरत है। वरना तो यह भी इसी नगर निगम की सच्चाई कहलाई जाती है कि अपने वार्ड की केवल समस्याएं दिखाने के लिए किसी पार्षद को नगर आयुक्त की गाड़ी लेट जाना पड़ता है, तो किसी पार्षद को आत्मदाह तक की धमकी देनी पड़ती है।

टैक्स बढ़ाना, सुविधाएं न देना निगम की उपलब्धियां

नगर निगम का कोई ऐसा क्षेत्र बता दीजिए, जहां बरसात के दौरान जलभराव के हालात पैदा न होते हों। बारिश रुके हुए दो दिन से अधिक का समय हो चुका है। लेकिन बहुत सी कालोनियों और बस्तियों की हालत आज भी बदहाल नजर आती है। जलभराव का आलम यह है कि पॉश कालोनी तक डूब जाती हैं। साकेत, शंभुनगर, माधवपुरम, न्यू शंभुनगर, मानसरोवर, बुनकर नगर, घंटाघर, रेलेवे रोड, बुढ़ाना गेट, औद्योगिक क्षेत्र तक जलभराव के साथ बागपत अड्डे से हापुड़ अड्डे तक टूटी-फूटी और गड्ढायुक्त सड़कें नगर निगम के विकास की कहानी कह रही हैं।

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माधवपुरम की मुख्य रोड से मलिन बस्तियां अच्छी हैं। नगर निगम के पास आदर्श जैसा दिखाने के लिए कुछ नहीं है। दिल्ली रोड पर हर जगह जलभराव की स्थिति है। मंगलवार को इन्हीं समस्याओं को लेकर सर्वदलीय पार्षद दल नगर निगम की ओर से नगर आयुक्त को जनसुनवाई के दौरान ज्ञापन दिया जाएगा, और एक दिन के धरने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
-रंजन शर्मा, नेता सर्वदलीय पार्षद दल, नगर निगम, मेरठ

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