- सुबह के समय बाजार में रहती है भारी भीड़, पुलिस भी नहीं करा पा रही लॉकडाउन
- सोशल डिस्टेंसिंग की खुलेआम उड़ाई जाती है धज्जियां, बेरिकेडिंग भी नहीं आ रही काम
मुख्य संवाददाता |
बागपत: कोरोना का बम फूटेगा या नहीं, कितने संक्रमित होंगे, इसकी चिंता भीड़ को नहीं है। वह तो बेफिक्री में बाजार में आ जाती है और नियमों की धज्जियां उड़ाने में मशगूल रहती है। भीड़ को रोकने वाला सिस्टम भी फेल साबित हो रहा है।
पुलिस राष्ट्रवंदना चौक पर वाहनों का चालान करने में तो सख्ती दिखाती नजर आती है, लेकिन बाजार में नियमों का पालन कराने की जहमत उठाना जरूरी नहीं समझा जाता। देखा जाए तो पुलिस की गाड़ी भी बाजार में घूम जाती है, लेकिन भीड़ पर कोई असर नहीं होता। दुकानदारों पर भी कोई असर नहीं होता। साफ जाहिर है कि सिस्टम पालन कराने में सफल नहीं हो पा रहा है।
कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौतों का सिलसिला जारी है। संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सरकार भी नियमों की पाबंदी लगाने में कसर नहीं छोड़ रही है। लॉक डाउन भी लगाया हुआ है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, मास्क पहनने, सेनेटाइज करने आदि पर जोर दिया जा रहा है।
शादी समारोह में महज 25 लोगों की अनुमति का निर्देश जारी कर दिया गया। इसके अलावा बाजारों को कुछ अवधि के लिए खोला जा रहा है। बागपत नगर की बात की जाए तो यहां सुबह 11 बजे तक बाजार खुलता है। सुबह दुकानों का शटर उठने से पहले ही बाजार में भीड़ एकत्रित होनी शुरू हो जाती है। 11 बजे तक भीड़ का आलम परेशान करने वाला होता है। हर कोई दुकानों की ओर दौड़ता नजर आता है।
बाजार में दुकान कौन सी खुलेगी या नहीं, इसका भी पालन नहीं हो रहा है। भीड़ का आलम यह है कि वाहनों को भी बाजार में ही लेकर पहुंचते हैं। पुलिस ने बेरिकेडिंग जरूर होली चौक पर लगा दी, लेकिन उससे भी वाहन नहीं रूक रहे हैं। दूसरे रास्तों से बाजार में पहुंच जाते हैं।
दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का कोई पालन करने वाला नहीं है। मास्क भी जरूरी नहीं है। दुकानदार अपनी चांदी कूटने के चक्कर में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। देखा जाए तो इस कोरोना बम के फूटने से जहां स्थिति भयावह हो सकती है वहीं सिस्टम पर सवाल भी खड़े होंगे।
एक तरफ तो पुलिस राष्ट्रवंदना चौक पर वाहनों की सख्ती कर चालान काटकर नियमों का पालन कराने में जुटी है वहीं दूसरी ओर चंद कदम की दूरी पर लॉक डाउन व अन्य नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, उसे देखना जरूरी नहीं समझा जाता है।
बाजार में पुलिस की गाड़ी भी घूम जाती है, लेकिन नियम का पालन कोई करता नजर नहीं आता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानों लॉक डाउन है ही नहीं। इस भीड़ को कंट्रोल नहीं करने में सिस्टम भी जिम्मेदार है। अधिकारी भले ही दावे कुछ भी कर ले, लेकिन हकीकत धरातल पर कोई देखने वाला नहीं है। निकायों के अधिकारी तो इन दिनों पालन कराना ही भूल गए हैं। पुलिस-प्रशासन जहां सख्ती अधिक करता नजर नहीं आता है वहीं भीड़ भी इसका फायदा उठाकर बाजारों में खूब आ रही है।


