Tuesday, June 18, 2024
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मौत के मुहाने पर शहर, क्या फिर से दहलाने की तैयारी

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  • अवैध एलपीजी गैस रिफिलिंग, पटाखों का जखीरा
  • एलपीजी के नकली रेग्युलेटर सब कुछ तो है
  • क्यों नहीं कर रहे जिम्मेदार अफसर कार्रवाई
  • क्या है लोहिया नगर सरीखी एक और वारदात का इंतजार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लोहिया नगर के पटाखा गोदाम में धमाके के इतर पूरे महानगर में एलपीजी सिलेंडरों से पांच व दो किलो के छोटे सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग, जिन्हें इस कारोबार से जुड़े कुछ लोग बोलचाल की भाषा में मिनी बम सिलेंडर भी कहते हैं।
एलजीपी के नकली रेग्युलेटरों को तेजी से फैलता कारोबार और पुलिस प्रशासन के रोक व सख्ती के दावों के बीच आए दिन मिल रहा पटाखों का जखीरा,

इसके चलते ही सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या शहर को दहलाने की तैयारी में हैं। कुछ लोग थोडेÞ से पैसे कमाने के लालच में क्या दूसरे लोगों की जान को खतरे में डाल सकते हैं। कारोबार करने के नाम पर क्या उन्हें जान जोखिम में डालने का लाइसेंस मिल गया है।

लोहिया नगर से लेकर लखनऊ तक गूंज

लोहिया नगर स्थित फैक्ट्री में पटाखों के गोदाम के धमाके की गूंज लोहिया नगर से लेकर लखनऊ तक सुनाई दी। यह बात अलग है कि जांच के नाम पर इसमें जो कुछ अब तक देखने व सुनने में आया है उसके बाद तो तमाम लोग यही कह रहे हैं कि जिन्होंने धमकों की जांच की है पहले उनकी जांच की जांच क्यों ना करा दी जाए।

खैर यह तो बात हुई प्रशासन द्वारा धमाके की जांच के लिए गठित की गयी टीम के अफसरों के काम की, लेकिन यहां बात लोहिया नगर धमाके की जांच करने वाले जांच टीम की नहीं बल्कि लोग जिन लोगों की वजह से खतरे में पड़ सकते हैं उनकी की जा रही है।

पटाखों के जखीरे खोल रहे पोल

एनजीटी व कोर्ट के आदेश और दीपावली का पर्व इस पर प्रशासन का दावा कि पटाखे किसी सूरत में बिकने नहीं दिए जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद खुद पुलिस की कार्रवाई में पटाखों के जखीरों का बरामद होना यह साबित करता है कि कहीं ना कहीं तो लीकेज है।

जहां पटाखे छिपा कर रखे गए हैं वहां भी यदि लोहिया नगर सरीखे धमाके की घटना हो जाए तो कितने लोग हताहत होंगे। लोहिया नगर में तो पटाखों का कच्चा माल होने की बात कही जा रही है, लेकिन पुलिस कार्रवाई में जहां से बरामदी हो रही है, वहां तो तैयार पटाखे हैं। तैयार पटाखों से नुकसान अधिक होगा।

एलपीजी के नकली रेग्युलेटर

लिसाड़ीगेट के तारापुरी में एलपीजी सिलेंडरों की नकली रेग्युलेटरों की बरामदगी से बड़ी व खतरे की बात यह है कि इन नकली रेग्युलेटरों का जहां भी यूज किया जाएगा वहां यदि इनकी वजह से कोई हादसा हो गया तो जान ओ माल का कितना नुकसान होगा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

एलपीजी गैस के सिलेंडरों पर नकली रेग्युलेटर युद्ध भूमि में प्रयोग होने वाले बमों के पिन सरीखे माने जाते हैं। नकली रेग्युलेटर लगाने के बाद एलपीजी का सिलेंडर किसी बम से कम नहीं होता। इतना नुकसान पटाखों के जखीरे में धमाके में नहीं होगा जितना नुकसान नकली रेग्युलेटर की वजह से एलपीजी गैस सिलेंडर फटने से होगा।

हादसों से सबक नहीं

महानगर में तमाम स्थानों पर एलजीपी किट वाली गाड़ियों में अवैध रूप से गैर रिफिल की जाती है। इस दौरान कई बार हादसे भी हुए हैं। इसके तमाम सबूत व गवाहियां मौजूद हैं। सवाल यह नहीं कि शहर में जहां तहां गाड़ियों में एलपीजी भरी जा रही है, बडा सवाल यह है कि सरेआम गाड़ियों में की जा रही

एलपीजी की रिफिलिंग करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। या फिर अवैध काम की तरह यह मान लिया जाए कि सब पुलिस के संरक्षण व सेटिंग-गेटिंग से चल रहा है। शहर में अनेक स्थानों पर मुख्य बाजारों में अवैध रूप से गाड़ियों में एलपीजी की रिफिलिंग की जा रही है ना कोई रोकने वाला ना कोई टोकने वाला।

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