- पंचायत चुनाव ने हालात बिगाड़े, नहीं रुक रही मौतें
ज्ञान प्रकाश |
मेरठ: कोरोना की दूसरी लहर ने मौतों के आंकड़ों को गति दे दी है। स्वास्थ्य विभाग भले कम मौतों का दावा करें, लेकिन रोज हो रही बेइंतहा मौतों से इंकार नहीं किया जा सकता है। पंचायत चुनावों के बाद तो लगभग हर गांव में मौतों की सूचना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है।
सरकारी आंकड़े भले अब तक सवा सौ मौतों की बात करें, लेकिन हकीकत कोसो दूर है। सीएमओ साहब ऐसे नाजुक दौर में मोहल्लों में टेस्टिंग टीम भेजिए ताकि कोरोना का असली रूप लोगों के सामने आ सकें।
आशंका जताई जा रही थी सरकार का पंचायत चुनाव का फैसला लोगों पर भारी पड़ेगा। ऐसा ही हुआ। चुनाव ड्यूटी में लगे 100 से अधिक पुलिसकर्मी संक्रमित है। वहीं, सैकड़ों की संख्या में शिक्षक कोरोना की चपेट में है। कई लोगों की मौत भी हो चुकी है।
हैरानी की बात यह है कि निजी अस्पतालों में लोग कोरोना से मर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में वो दर्ज नहीं हो रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि स्वास्थ्य विभाग लोगों को बताए कि इस वक़्त कोरोना के अलावा ऐसी कौन-सी बीमारी तेजी से फैल रही है।
जिसके कारण सूरजकुंड और कब्रिस्तानों में अंतिम संस्कार कराने के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। गंगा मोटर कमेटी के यहां सुबह से अंतिम संस्कार का सामान खरीदने वालों की भीड़ लगी रहती है। ऐसा कोरोना की पहली लहर में भी नहीं देखा गया।
इस वक़्त 6500 से अधिक लोग होम आइसोलेशन में है और इससे ज्यादा वो लोग कोरोना से बीमार है। जिन लोगों ने डर के मारे टेस्ट नहीं कराया है। स्वास्थ्य विभाग को चाहिये कि ग्रामीण क्षेत्रो में कोरोना की टेस्टिंग को बढ़ाए नहीं तो आने वाली तीसरी लहर तूफान खड़ा कर देगी। हर कोई इस बात से हैरान है कि जब संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसे में टेस्टिंग कम करके विभाग क्या दिखाना चाहता है।

