
बदलते मौसम में कोल्ड, फ्लू और वायरल बुखार परेशानी एक आम समस्या होती है। वैसे तो यह एक सामान्य सी बीमारी या कहें कि मौसमीय विकृतियां है। कोल्ड और फ्लू का खुद को हो जाना एक समस्या हो सकती क्योंकि इसकी वजह से आप अपनी दिनचर्या में तनावग्रस्त और बोझिल रहते हैं। लेकिन कोल्ड और फ्लू से ग्रसित होना एक जिम्मेदारी भी है कि आपके जरिए इसके वायरस दूसरों को संक्रमित न कर सकें। आम तौर पर इससे निपटने के लिए ली जाने वाली दवाइयां भी लक्षणों के प्रभाव को सीमित करने वाली होती हैं, समस्या के कारण पर उनका प्रभाव कम ही होता है।
इससे बचने के तमाम घरेलू और चिकित्सिकीय उपाय भी हैं। आइये हम जानें कि कोल्ड और फ्लू से कैसे निपटें, क्या करें, क्या न करें। कोल्ड और फ्लू और वायरल बुखार का प्रसार या फैलाव तब होता है जब इनसे संक्रमित व्यक्ति के कफÞ और छींक ही नहीं बल्कि सामान्य बातचीत के दौरान हवा में छोड़े गए वायरस दूसरों तक आ पहुंचते हैं। यदि आप कोल्ड, फ्लू और बुखार से संक्रमित होने से बचना या फिर दूसरों को बचाना चाहते हैं तो अपनी आदतों में बदलाव से ऐसा किया जा सकता है।
हथेली नहीं कोहनी की दिशा में करें छींक
आमतौर पर कफ या छींक आने पर आप अपने हाथों को मुंह पर रखते हैं। यह आपके और दूसरों के लिए खतरनाक है। छींक आने की दशा में बेहतर तरीका यह है कि हथेलियों की जगह कोहनी की ओर मुंह करके छींकें। ऐसा करने से आप वायरस को उस दिशा में परित्यक्त करते हैं जहां से उसके संक्रमण का खतरा कम से कम होता है और हथेलियों की तुलना में कोहनियों का दूसरों के साथ संपर्क बेहद कम होता है।
साफ हाथ तो सेहत का साथ
अपनी हथेलियों को जितना संभव हो साफ रखें। ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि हथेलियां ही दूसरों के सीधे या परोक्ष संपर्क में आती हैं। घर से बाहर खरीददारी, जिम, आॅफिस, टैÑवलिंग, या फिर खेलकर आने के बाद हाथों-हथेलियों को बार-बार और खूब अच्छी तरह धोएं, दूसरों को भी यह आदत अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। कोल्ड या फ्लू का प्रसार बैक्टीरिया के द्वारा नहीं बल्कि वायरस के जरिए होता है। एंटीबैक्टिरियल साबुनों से हाथ घोना पर्याप्त नहीं है, बेहतर है कि अपने हथेलियों को खूब रगड़-रगड़ कर साफ करें।
हथेली को चेहरे से रखें दूर
अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया था कि आम तौर पर एक सामान्य आदमी औसतन दिन भर में कम से कम सोहल बार अपने हाथों से अपनी आंखें, नाक, ओठ को छूता है। यदि आप कोल्ड और फ्लू के खतरे वाले परिवेश और मौसम में हैं तो बेहतर है कि अपनी हथेलियों को चेहरे से दूर रखने का प्रयास करें।
सार्वजनिक उपयोग की सतहों को छूने से बचें
उन सतहों को छूने से परहेज करें जिनपर दूसरे लोगों की हथेलियां पड़ती हों। एक रोचक तथ्य यह है कि सेली ओक हॉस्पीटल ने अपने परिसर में दरवाजे के हैंडिल, टेब्लस, कुर्सियों के आर्मस्पोर्ट जैसे जगहों पर कॉपर या कॉपर एलॉय का प्रयोग किया और पाया कि परिसर में माइक्रोआॅरगेनिज्म की मौजूदगी 95 फीसदी कम हो गई। यानी सार्वजनिक दफ्तरों और उपयोग वाली सतहों पर कॉपर या कॉपर एलॉय वाली फिटिंग्स लगाए जाने से कोल्ड या फ्लू ही नहीं बल्कि एमआरएसए जैसे सुपरबग बैक्टिरिया के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे संपर्क के सतहों को डिसइंफेक्टेंट लिक्विड के जरिए साफ करें, हैंड सैनिटाइजर्स का प्रयोग करें।
योग, ध्यान और व्यायाम: अच्छी प्रतिरोधक क्षमता के सूत्र
एक अध्ययन में पाया गया है कि सप्ताह के पांच दिनों में कुल 45 मिनट के लिए मध्यम कठिनता वाले व्यायाम को एक साल तक करने वाले लोगों में कोल्ड और फ्लू जैसी समस्याएं काफी कम पाई गई। ध्यान और योग के जरिए अपने तनाव को कम करके आप कोल्ड से बचने की अपनी संभावना को 40-50 फीसदी कम कर सकते हैं। कम घंटों की नींद न केवल आपको तनावग्रस्त रखती है, बल्कि आपकी प्रतिरोधक क्षमता कम कर देती है। इसलिए समय से और पर्याप्त
नींद लें।
घर में सफाई का रखें ध्यान
घर में किसी सदस्य के कोल्ड, फ्लू या बुखार से संक्रमित होने पर अतिरिक्त सावधानी के तहत डिस्पोजेब्ल बर्ततनों का प्रयोग कर सक ते हैं, मसलन डिस्पोजेब्ल कप या गिलास। यदि घर में बच्चों को इन वायरस का संक्रमण हो तो सतहों की साफ सफाई के साथ साथ उनके खिलौनों को भी साफ करें। रसोई और बाथरूम में पेपर टॉवेल का प्रयोग करें। कपड़ों के सामान्य और गीले तौलिए में वायरस और दूसरे बैक्टिरिया घंटों मौजूद रह सकते हैं। यदि पेपर टॉवेल का प्रयोग मुश्किल है तो सभी सदस्यों के लिए अलग तौलिए का प्रबंध करें। प्रयोग कर लिए गए पेपर टॉवेल या टिश्यू पेपर्स को यहां वहां न फेंकें बल्कि उससे संक्रमण फैलने से रोकने के लिए घर से बाहर डस्ट बिन में डंपिंग पैकेट्स में बंद करके रखें।
पीएं-खाएं सेहतमंद
कोल्ड और फ्लू जैसी समस्याओं में अदरख बेहद कारगर है। अदरख को कूटने या काटने से एलीसिन नामक सल्फर तत्व तैयार होता है, जो एंटीवायरल, एंटीबैक्टिरियल और एंटीफंगल गुणों से युक्त है। एलीसिन जैसा चमत्कारी तत्व केवल कच्चे अदरख में ही पाया जा सकता है। किसी भी व्यंजन को पका लिए जाने के बाद उसमें कूटे या कतरे अदरख को उपर से डाल दें, पकाएं नहीं। वैसे तो कोई भी गर्म पेय, चाहे वह सूप हो या गर्म पानी, कोल्ड या फ्लू की समस्या में गले, बंद नाक को राहत पहुंचाता है। लेकिन पीने लायक गर्म पानी में शहद को डालकर दिन में चार बार पीने से वायरल इंफेक्शन को कम करने में खासी मदद मिलती है। अदरख के दो चम्मच रस, एक नींबू का एक चौथाई रस, एक चम्मच शहद, स्वाद के लायक काली मिर्च के थोड़े से पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर पीने से कोल्ड और फ्लू में राहत मिलती है। नमकयुक्त गर्म पानी से गारगल करना एक आजमाया हुआ पुराना नुस्खा है।
अपने आहार में ब्रोक्ली, टमाटर, बंदगोभी, अदरख, मशरूम और पालक जैसे सब्जियों के साथ संतरे, अंगूर, केला समेत गहरे रंग वाले फलों का सेवन करने से कोल्ड और फ्लू को रोकने वाली प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। सब्जियों को थोड़ी मात्रा में ही सही कच्चा या सलाद के रूप में खाने की आदत डालें।


