- निगम में सेटिंग का खेल लिपिक एक रिकॉर्ड में पिता के दो नाम का प्रकरण
- हापुड़ निवासी व्यक्ति महिला से बैनामे से करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत से मकान खरीदने के बाद काट रहा निगम के चक्कर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ये तस्वीर नगर निगम के क्लर्क सुनील की हैं। तस्वीर में वह अपना मुंह मीडिया से छुपा रहा हैं। दरअसल, सुनील ने निगम में जो नौकरी पायी हैं, उसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। मृतक आश्रिम में उसे निगम में जॉब मिली हैं, लेकिन जॉब मां-पिता की मृत्यु के बाद ही मिल सकती हैं, लेकिन यहां सुनील अपने ताऊ के दत्तक पुत्र बन गये और इस तरह से निगम में नौकरी हथिया ली।
कई वर्षों से सुनील नौकरी कर रहा हैं, लेकिन वर्तमान में एक मकान का विवाद पैदा हुआ, जिसमें सुनील की सौतेली मां ने एक मकान बेच दिया। निगम के सरकारी दस्तावेज में पिता का नाम लाल बाबू दर्शाया हैं, यही से पूरा विवाद पैदा हो गया। इसकी शिकायत हुई, जिसकी जांच पड़ताल अधिकारिक स्तर पर चल रही हैं।

हापुड़ पक्का रोड निवासी दिनेश त्यागी पुत्र छिद्दा त्यागी ने 15 दिन पूर्व नगर निगम में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक प्रार्थना पत्र दिया। उसने प्रार्थना पत्र में किसी और पर नहीं बल्कि नगर निगम में कार्यरत एक लिपिक पर ही उसके द्वारा बैनामे से एक महिला से खरीदे गये करीब डेढ़ करोड़ की लगात के मकान में हेराफेरी से लिपिक द्वारा अपना नाम दर्ज करा लिये जाने का आरोप लगाया।
दिनेश त्यागी ने बताया कि उसने जो मकान फूलबाग कॉलोनी निवासी सुधा रजंना से खरीदा था। सुधा रंजना का सौतेला पुत्र जोकि नगर निगम में लिपिक के पद पर कार्यरत है। लिपिक जोकि सुनील अपने ताऊ मृतक विनध्याचल के दत्तक पुत्र क्े रूप में निगम में कार्यरत है। उसकी नियुक्ति 25 जनवरी 1998 में कोर्ट के आदेश पर विनध्याचल के दत्तक पुत्र के रूप में हुई,

लेकिन उसने कई जगह लाभ पाने के लिये अपने पिता का नाम विनध्याचल के साथ लालबाबू भी दर्शाया। दिनेश त्यागी ने 15 दिन पूर्व आरोप लगाया था कि वह पूर्व में तीन चार बार मंगल दिवस जनसुनवाई में शिकायत दर्ज करा चुका है, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका। दिनेश त्यागी के द्वारा जो आरोप शिकायती पत्र में लगाये गये उस पर अधिकारियों के वर्जन के साथ लिपिक सुनील पक्ष जानने के लिये संपर्क किया।
जिसमें उससे संपर्क नहीं हो सका। जनवाणी द्वारा एक लिपिक के निगम के रिकॉर्ड में दो नाम का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया। जबकि मंगल दिवस में जनसुनवाई के दौरान अन्य मीडिया कर्मियों को भी दिनेश त्यागी के द्वारा अपना पक्ष बताया गया, लेकिन यह मामला जनवाणी ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, लेकिन 15 दिन बीतने के बाद भी दिनेश त्यागी के अनुसार मामला जस का तस बना हुआ है।
वहीं, दिनेश ने बताया कि अधिकारियों ने मार्च माह की क्लॉजिंग के बाद आने को कहा तब मामले की जांच कर कार्रवाई कराई जायेगी, जिसका उसे आश्वासन दिया। वहीं, शुक्रवार को जनवाणी में प्रकाशित खबर पर सुनील ने अपना पत्र भी मीडिया में छापने को कहा कि उस पर जो आरोप दिनेश त्यागी के द्वारा लगाये गये हैं, वह बेबुनियाद है।

जनवाणी के द्वारा क्लर्क सुनील से उसका पक्ष जानने के साथ ही कहा कि वह या तो कोई लिखित में अपने पक्ष का दस्तावेज दें। जिसमें वह आरोप प्रत्यारोप अपनी सौतेली मां सुधा रंजना या दिनेश त्यागी पक्ष पर लगा रहे हैं। उसको या तो कैमरे के सामने बोलें या फिर लिखित में दें। एक बार तो सुनील राजी हो गया,
लेकिन अचानक उसे ऐसा क्या हुआ कि वह अपना आपा ही खो बैठा और कैमरे से अपना मुंह छुपाने लगा। कैमरे पर हाथ मारने का भी प्रयास किया। इसे रोकने को कहते हुए वहां से फाइल से मुंह छिपाकर भाग निकला, जो वीडियो फुटेज और तस्वीर ‘जनवाणी’ के पास बातौर सबूत के रूप में मौजूद हैं।

