Friday, April 23, 2021
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CRPF जवान नक्सलियों की कैद से छूटा, पत्नी बोली- इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: बीते 5 दिन से डर, निराशा और गुस्से के साथ जी रहीं मीनू बहुत खुश हैं। इतनी खुश कि कह रही हैं कि आज उनके लिए सबसे ज्यादा खुशी भरा दिन है। मीनू नक्सलियों की कैद से छूट कर आए CRPF जवान राकेश्वर सिंह की पत्नी हैं।

राकेश्वर सिंह का परिवार जम्मू के नेत्रकोटि गांव में रहता है। इस समय उनके घर में खुशियां मनाई जा रही हैं। आसपास के लोग जुटे हैं। लड्डू बांटे जा रहे हैं। मीनू के चेहरे पर खुशी लौट आई है। उनकी बेटी के चेहरे पर हंसी है। उसे अब पापा के घर आने का इंतजार है।

राकेश्वर की रिहाई के बाद मीनू ने कहा कि मुझे उनके लौटने का पूरा भरोसा था। इसके लिए भगवान का, सरकार का, मीडिया और सेना का धन्यवाद करती हूं। उन्होंने बताया कि राकेश्वर की सेहत ठीक है।

वहीं, राकेश्वर की मां कुंती देवी ने कहा कि हम बहुत ज्यादा खुश हैं। जो हमारे बेटे को छोड़ रहे हैं, उनका भी धन्यवाद करती हूं। भगवान का धन्यवाद करती हूं। सरकार की बात हो रही थी तो मुझे थोड़ा भरोसा तो था, लेकिन मन घबरा रहा था।

जिंदगी के सबसे भारी पांच दिन

मीनू के पति राकेश्वर कोबरा फोर्स के कमांडो हैं। उन्होंने 2011 में CRPF ज्वॉइन की थी। तीन महीने पहले ही उनकी तैनाती छत्तीसगढ़ में हुई थी। 35 साल के राकेश्वर सुरक्षा बलों की उस ऑपरेशन टीम में शामिल थे, जो बीते शनिवार को बीजापुर-सुकमा के जंगलों में नक्सलियों के खात्मे के लिए गई थी। इसी बीच नक्सलियों ने हमला कर दिया। जवानों के शहीद होने की खबरें आनी शुरू हुई और कुछ ही घंटे में पता चल गया कि हमले के शिकार हुए 23 जवान अपनी जान गंवा चुके हैं।

इसी बीच खबर आई कि एक जवान लापता भी है। यह खबर राकेश्वर की ही थी। चर्चा होने लगी कि वे नक्सलियों के कब्जे में हैं। छह अप्रैल को CPI माओवादी के दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता ने प्रेस नोट जारी कर लापता जवान को बंधक बनाने की बात कही। इसके बाद मीनू सामने आईं।

पीएम मोदी और गृहमंत्री से कहा-पति को छुड़ाकर लाएं

मीनू ने पति की सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अपील की। कहा कि गृह मंत्री किसी भी कीमत पर उनके पति की नक्सलियों के चंगुल से रिहाई सुनिश्चित करें। ठीक वैसे ही, जैसे भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन को पाकिस्तानी सेना से मुक्त कराया गया था।

मीनू ने कहा कि ये सरकार की जिम्मेदारी है, वे हमारे जवानों को ढूंढकर लाएं। पति के लापता होने की बात कही जा रही है। शुक्रवार रात मेरी उनसे बात हुई थी, उन्होंने बताया था कि खाना पैक कर रहा हूं, एक ऑपरेशन पर जाना है। उसके बाद से उनका पता नहीं चल पा रहा है। फोन भी नहीं लग रहा है।

आखिर पांच दिन बाद मीनू और उनके परिवार का इंतजार खत्म हुआ। गुरुवार शाम खबर आई कि नक्सलियों ने राकेश्वर को छोड़ दिया है।

नक्सलियों ने फोटो भेजी तब थोड़ी राहत मिली

नक्सलियों ने जवान राकेश्वर सिंह की एक फोटो जारी की थी। इसमें राकेश्वर नक्सलियों के कैंप में बैठे नजर आ रहे थे। नक्सलियों ने कहा था कि वह सुरक्षित हैं। यह देखकर उनके परिवार को थोड़ी राहत मिली। हालांकि, इसके बाद मीनू के लिए दूसरी लड़ाई शुरू हुई। यह लड़ाई अपने पति को छुड़ाने की थी।

छत्तीसगढ़ के CM बोले- यह हमारी रणनीतिक जीत

राकेश्वर सिंह को नक्सलियों की ओर से छोड़े जाने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि यह हमारी रणनीतिक जीत है। जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने इसे सफलता से निभाया है। वे सुरक्षित लौटे, मुझे इस बात का संतोष है। उनके परिवार वाले भी चिंतित थे।

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