- कोरोना के नाम पर सारा सिस्टम ठप, हेपिटाइसिस बी, सी की जांच में भी लग रहा लंबा समय
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मरीज कृपा ध्यान दें! यदि इलाज के लिए मेडिकल आना चाहते हैं तो बिलकुल न आएं। मेडिकल के हालात देखकर तो यही लगता है कि जिनके ऊपर भरोसा कर शासन ने मेडिकल के बीमार सिस्टम को पांवों पर खडेÞ करने की जिम्मेदारी देकर भेजा था, उनके लचर और लापरवाही पूर्ण रवैये से मेडिकल अस्पताल इन दिनों खुद बीमार है। लोगों के स्वास्थ्य का दम भरने वाला मेडिकल खुद वेंटिलेटर पर नजर आता है।
दूरदराज से आने वाले मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए धक्के खा रहे हैं। या तो ओपीडी में डाक्टर नहीं मिलेंगे और यदि नसीब से डाक्टर मिल भी गए तो जो जांच लिखी गयी हैं वो नहीं हो पाएंगी यदि भाग दौड़कर जांच करा भी ली तो टेस्ट रिपोर्ट नहीं आएगी। भले ही इसकी वजह से मरीज की मौत ही क्यों न हो जाए।
धक्के खा रहे हेपिटाइसिस के मरीज
जानलेवा हेपिटाइसिस जैसी बीमारी के तमाम मरीज मेडिकल प्रशासन की कारगुजारियों के चलते धक्के खाने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग खुद मानता है कि यह गंभीर बीमारी है। रोगी के पास इस बीमारी में बहुत कम विकल्प होते हैं, लेकिन यह बात शायद मेडिकल अस्पताल को चलाने वालों की समझ में नहीं आती। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता नजर आता कि उनकी लापरवाही और देरी की वजह से मरीजों की जान पर बन आयी है।
10 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं
हेपिटाइटिस के मरीजों की जांच रिपोर्ट यदि 10 दिन बाद भी नहीं जा सकती है तो फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या फिर स्वास्थ्य मंत्री को मेडिकल सिस्टम ही नहीं प्रशासन के उन अधिकारियों से भी जवाब तलब कर लेना चाहिए जिन पर पूरी मशीनरी को संभालने की जिम्मेदारी है। 10 दिन बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं कि जो जांच 29 दिसंबर को करायी गयी थी, उसकी रिपोर्ट आ ही जाएगी।
डाक्टर यदि छुट्टी पर तो जांच भी नहीं
यदि मान लिया जाए तो डा. प्रियंका छुट्टी पर हैं तो क्या माइक्रोबॉयलोजी लैब के मुखिया डा. अमित की यह जिम्मेदारी नहीं कि डा. प्रियंका की जगह किसी अन्य की ड्यूटी लगायी जाए या फिर यह मान लिया जाए कि मरीज को होने वाली परेशानी से उन्हें कुछ वास्ता नहीं।
माइक्रोबॉयलोजी लैब की यदि बात की जाए तो यहां भी कारगुजारियों की लंबी फेरिस्त है। कोरोना संक्रमण जब पिक पर था तब इस लैब में कुछ प्राइवेट लैबों के सैंपलों की जांच किए जाने की बात भी सुनने में आयी थी। इस खेल में लैब चलाने वालों के हाथ के भी आरोप लगे थे। हालांकि इसको लेकर फिर कभी खबर देंगे।
सफाई में अजीबों गरीब तर्क
10 दिन बाद भी हेपिटाइटिस की जांच के लिए जो टेस्ट मेडिकल में कराया गया था उसकी रिपोर्ट न आने के जो कारण गिनाए जा रहे हैं वो भी कम हास्यास्पद के साथ ही मेडिकल सिस्टम को चलाने वालों की काबलियत पर सवाल खडेÞ करने को काफी हैं। शुक्रवार को जब जनवाणी संवाददाता ने वहां पड़ताल की तो माइक्रोबॉयलोजी लैब से पता चला कि डा. प्रियंका जिनकी देखरेख में सैंपल लगाए जाते हैं वो तीन दिन की छुट्टी पर हैं।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन
इन तमाम बातों के बीच बड़ा सवाल तो यही कि जिस मेडिकल पर हर साल सरकार की ओर से करोड़ों का खर्चा किया जाता है। मेडिकल के प्राचार्य से लेकर सुप्रीटेंटेंड, एचओडी, डाक्टरों, नर्स व दूसरे पैरामेडिकल स्टाफ की सेलरी के नाम पर भारी भरकम रकम खर्च की जाती है। इतना कुछ करने के बाद भी यदि लैब की डाक्टर के अवकाश पर जाने के बाद टेस्टिंग का काम बंद हो जाता है तो फिर इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं।
ये कहना मेडिकल प्राचार्य का
मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि कोविड की वजह से ज्यादा स्टॉफ वहीं पर लगाया हुआ है। कोविड के सेंपल अधिक होन के कारण अन्य जांचों में विलंब हुआ है। इसको दुरुस्त कराया जाएगा।
ये कहना है सांसद का
इस संबंध में जब सांसद राजेन्द्र अग्रवाल से बात की गयी तथा माइक्रोबॉयलोजी लैब में जांचों को लेकर बरती जा रही लापरवाही की जानकारी दी तो उन्होंने इसको गंभीर माना और कहा कि यदि कोई चिकित्सक अवकाश पर है तो उसका विकल्प दूसरा चिकित्सक व टैक्निशियन लैब में ड्यूटी पर होना चाहिए। मरीजों को कोई कष्ट या नुकसान सहन नहीं किया जाएगा।
ये कहना है विधायक का
दक्षिण विधायक सोमेंद्र तोमर का कहना है कि यह गंभीर घटना है इस संबंध में वह स्वयं मेडिकल प्राचार्य से बात करेंगे। इस प्रकार की लापरवाही किसी भी दशा में सहन नहीं की जाएगी। जहां स्टाफ अवकाश पर है। वहां दूसरी की ड्यूटी लगायी जानी चाहिए। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी।
डीएम और एसएसपी पहुंचे मेडिकल, की मीटिंग
शुक्रवार की देर शाम डीएम, एसएसपी व अन्य अधिकारियों का काफिला अचानक देर शाम मेडिकल पहुंच गया। इनके साथ सीएमओ व स्वास्थ्य विभाग के दूसरे सीनियर अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने पूरे मेडिकल का राउंड लिया। कोविड-19 आइसोलेशन तथा इमरजेंसी वार्ड की जानकारी ली। हालांकि आइसोलेशन वार्ड में कोई भीतर नहीं गया। कोविड वार्ड में कितने मरीज एडमिट हैं।
उनमें से कितने आईसीयू में हैं। उनके इलाज का क्या स्टेट्स है। इन तमाम बातों पर चर्चा की गयी। इसके अलावा नॉन कोविड मरीजों के इलाज की भी जानकारी ली गयी। पूरे मेडिकल अस्पताल का राउंड लेने के बाद अधिकारियों का काफिला सीधे प्रशासनिक भवन की ओर मुड़ गया। वहां डीएम और एसएसपी ने मेडिकल प्रशासन के तमाम अधिकारियों से मीटिंग की।
इस मीटिंग में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर चर्चा की गयी। माना जा रहा है कि यदि सीएम आते हैं तो उनके निरीक्षण में मेडिकल का दौरा भी शामिल हो सकता है। सीएम के साथ लखनऊ से आने वाले अधिकरियों के काफिले में से कोई एक अधिकारी मेडिकल का औचक निरीक्षण को पहुंच सकते हैं। माना जा रहा है कि इसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने मेडिकल प्रशासन को अलर्ट मोड़ पर रहने की हिदायत दी है। हालांकि यह बात अलग है कि मेडिकल में इन दिनों मेडिकल के कर्मचारी भी इलाज कराने में डरते हैं।
सीएम करेंगे मेडिकल के सुपर स्पेशियलिटी का लोकार्पण
करीब 150 करोड़ की लागत से निर्माण किए गए मेडिकल स्थित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का रविवार को सीएम योगी लोकर्पण करने को आ रहे हैं। लोकार्पण की यदि बात की जाए तो इससे पहले भी पूर्व में कई बार वीवीआईपी के हाथों इसके लोकार्पण कराए जाने के प्रयास किए गए।
तत्कालीन प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता इस संबंध में काफी आगे तक बढ़ गए थे। साल 2916 में सुपर स्पेशलिटी की आधार शिला के मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा, सांसद अनुप्रिया पटेल और शाहिद मंजूर सरीखे वीवीआईपी मौजूद रहे थे। साल 2019 में यह बनकर पूरी तरह से तैयार हो गया था।
तैयार होने के बाद उसके उद्घाटन के लिए वीवीआईपी की तलाश की जा रही थी। तमाम आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं से लैस सुपर स्पेशियलिटी का इस्तेमाल बगैर उद्घाटन के ही कोरोना संक्रमण काल में शुरू कर दिया गया था।

इमरजेंसी हालात के चलते यहां कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड बना दिया गया था। ये बात अलग है कि इस आइसोलेशन वार्ड में चिकित्सकीय खामियों की गूंज शासन तक सुनाई दी थीं। इसके वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भी तमाम तकनीकि खामियों की बात सामने आयी थी।
मेडिकल के कर्मचारी नेता विपिन त्यागी ने बताया कि ये पूरे मेडिकल के लिए बेहद गौरव की बात है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके सुपर स्पेशियलिटी के उद्घाटन के लिए आ रहे हैं। यहां चिकित्सकीय सेवाएं मेरठ ही नहीं आसपास के जिलों के लिए भी मील का पत्थर साबित होंगी।
मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि सीएम के आगमन के मद्देनजर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। सुपर स्पेशियलिटी में तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। प्रशासन और लखनऊ से आए अधिकारियों ने भी सुपर स्पेशियलटी का दौरा किया है।
मुख्यमंत्री कल शहर में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को मेडिकल कालेज में सुपर स्पेशियलिटी सेंटर का उद्घाटन करने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री एक बजकर 10 मिनट पर परतापुर हवाई पट्टी पर उतरेंगे। मुख्यमंत्री का 30 मिनट का समय पुलिस लाइन में आरक्षित रखा गया है। वह दो बजे मेडिकल कालेज पहुंचेंगे जहां वह तीन बजे तक रहेंगे। तीन बजकर 25 मिनट पर मुख्यमंत्री लखनऊ के लिये निकल जाएंगे।

