Friday, May 31, 2024
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ट्रांसफार्मर की टूटी जालियों से झांक रही मौत

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  • पीवीवीएनएल के बेखबर अफसरों को हादसों का है इंतजार
  • शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में खुले ट्रांसफार्मर ज्यादा जानलेवा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में खुले में ट्रांसफार्मर रखकर विद्युत विभाग आम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। अधिकांश ट्रांसफार्मरों बिना जालियों की लगे हैं। इनके खुले तार लटक रहे हैं। हर मौसम में हादसों का खतरा और बढ़ जाता है। इसके बाद भी विभाग का इस ओर ध्यान नहीं है। बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर रखने के लिए तमाम नियम बनाए गए हैं। इनमें ट्रांसफार्मर को चबूतरे पर रखना चाहिए। ट्रांसफार्मर में आने वाली सप्लाई के तारों में गार्डिंग लगी होना आवश्यक है। ट्रांसफार्मर को जाली के घेरे में रखना जरूरी है, लेकिन विभाग द्वारा नियमों से खिलवाड़कर ट्रांसफार्मर रख दिए गए हैं,

जिससे आम लोगों को करंट आने का भय बना रहता है। इसके नजदकी से आने-जाने पर करंट लगने की संभावना बनी रहती है। शहर में खुले में ट्रांसफार्मर रखकर विद्युत विभाग आम लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। शहर की घनी आबादी वाले इलाकों में तो ऐसे ट्रांसफार्मर साक्षात यमराज का रूप धारण किए हैं। इनकी वजह से कभी भी किसी की जान जा सकती है, लेकिन पीवीवीएनएल के अफसरों को लगता है कि इससे कोई सरोकार नहीं है। या फिर वो किसी बडेÞ हादसे का इंतजार है।

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टूटी जालियां, लटके तार

शहर के तमाम ऐसे इलाहे हैं जहां अधिकांश ट्रांसफार्मर या तो बगैर जाली के हैं या उनकी जाली टूटी हुई है। टूटी हुई जालियों में से मौत के रूप में झांक रही है। ऐसे इलाकों में शहर घंटाघर, सदर का मछेरान भूसा मंडी, लालकुर्ती पैंठ एरिया सरीखे ऐसे इलाके हैं जहां खुले ट्रांसफार्मर कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। अधिकांश ट्रांसफार्मरों बिना जालियों की लगे हैं। इनके खुले तार लटक रहे हैं।

बरसात में ज्यादा खतरनाक

आसपास के लोगों ने बताया कि खुले में रखे ये ट्रांसफार्मर बरसात के मौसम में अधिक खतरनाक हो जाते हैं। अर्थिंग होने की वजह से अनेक पशुओं की जान भी अब तक जा चुकी है। बरसात के मौसम में हादसों का खतरा और बढ़ जाता है। इसके बाद भी विभाग का इस ओर ध्यान नहीं है।

गाइडलाइन तार-तार

बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर रखने के लिए तमाम नियम बनाए गए हैं। इनमें ट्रांसफार्मर को चबूतरे पर रखना चाहिए। ट्रांसफार्मर में आने वाली सप्लाई के तारों में गार्डिंग लगी होना आवश्यक है। ट्रांसफार्मर को जाली के घेरे में रखना जरूरी है, लेकिन लगता है कि इस काम को देखने वाले पीवीवीएनएल के अफसरों को गाइडलाइन से कोई सरोकार नहीं रह गया है। नियमों से खिलवाड़कर ट्रांसफार्मर रख दिए गए हैं, जिससे आम लोगों को करंट आने का भय बना रहता है।

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खतरे से खाली नहीं है नजदीकियां

इसके नजदकी से आने-जाने पर करंट लगने की संभावना बनी रहती है। महानगर के सदर, मेहताब भूसा मंडी के पास खुले में ट्रांसफार्मर रखा गया है। जिसके आसपास जाली का घेरा नहीं बनाया गया है, केवल खुले में ट्रांसफार्मर लगा दिया है। जिससे आसपास के लोगों को इसके पास से गुजरने पर करंट का भय लगता है।

पशुओं की हो चुकी मौत

बगैर जाली के खुले में रखे इस ट्रांसफार्मर की वजह से आसपास खेलने वाले बच्चों के चपेट में आने का हमेशा खतरा बना रहता है, जिससे उनकी अधिक देखरेख करना पड़ती है। यहां पर कई बार जानवरों की करंट की चपेट में आने के कारण मौत हो चुकी है। इसके बाद भी अधिकारी मौन बने हुए हैं। जिससे किसी बड़ी घटना होने से भी इंतजार नहीं किया जा सका है। कमोवेश यही स्थिति शहर के अन्य इलाकों की भी जहां पर आम लोगों को करंट का भय बना रहता है। शहर में लटक रहे जर्जर तारों के कारण भी खतरा बना रहता है।

सबसे ज्यादा जानलेवा लालकुर्ती पैंठ एरिया

इस इलाके में दिल्ली छोटे वालों के सामने खुला ट्रांसफार्मर रखा है। यहां से हजारों की संख्या में लोग खरीदारी करने आते हैं। ट्रांसफार्मर को कंटीले तार या बाउंड्रीवाल बनाकर घेरा भी नहीं किया गया है। अगर ऐसा कर दिया जाए तो काफी हद तक दुर्घटना से बचा जा सकता है, लेकिन विभाग इस ओर से मौन साधे है। लालकुर्ती में सबसे बड़ी पैंठ लगती है। यहां से महज कुछ कदम की दूरी पर ट्रांसफार्मर लगाया गया है।

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ट्रांसफार्मर को रखा गया है, लेकिन वह आज तक खुले में ही है। इस कारण दुर्घटना का डर रहता है। पैंठ में आने वाले लोग ट्रांसफार्मर से दूर होकर ही गुजरते हैं। आसपास के लोग अपने बच्चों को वहां नहीं जाने देते हैं। लोगों ने बताया कि ट्रांसफार्मर को कंटीले तार से घेरा नहीं गया है और ना ही चाहरदीवारी बनाई गई है। आरोप लगाया कि इस समस्या को लेकर विद्युत विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन आज तक ध्यान नहीं दिया गया।

हादसों से सबक नहीं

23 सितंबर 2021 को शास्त्रीनगर एफ ब्लाक में खुले ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से एक शख्स की मौत हो गयी थी। इसके अलावा शहर के दूसरे इलाकों में अनक पशु करंट की चपेट में आने से मर चुके हैं, लेकिन लगता है कि हादसों से सबक न सीखना अफसरों की आदत बन गयी है।

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