Friday, May 1, 2026
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जलवायु परिर्वतन का घातक प्रभाव

SAMVAD

ALI KHANकेरल के पहाड़ी जिले वायनाड में हाल ही में हुए भीषण भूस्खलन के बाद लापता लोगों की तलाश के लिए व्यापक तलाशी अभियान अभी भी जारी है। लेकिन इस बीच वैज्ञानिकों की एक वैश्विक टीम की रिसर्च में खुलासा हुआ है कि वायनाड जिले में घातक भूस्खलन भारी बारिश के कारण हुआ। बता दें कि भारत, स्वीडन, अमेरिका और ब्रिटेन के 24 अनुसंधानकतार्ओं ने हालिया अध्ययन में इस बात की पुष्टि की है कि केरल के वायनाड में दो हफ्ते पहले बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन के लिए भारी बारिश जिम्मेदार थी। दरअसल, जलवायु परिवर्तन के कारण भारी बारिश में 10 फीसदी की तेजी आई है। अध्ययन के मुताबिक, वायनाड में करीब दो माह की मानसूनी बारिश के चलते पहले से ही अत्यधिक नम मिट्टी पर एक ही दिन में 140 मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा। इससे क्षेत्र विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आ गया और 231 लोगों को जान गंवानी पड़ी।

रेड क्रॉस रेड क्रिसेंट क्लाइमेंट सेंटर में जलवायु जोखिम सलाहकार माजा वाहलबर्ग ने कहा कि भूस्खलन का कारण बनी बारिश वायनाड के उस क्षेत्र में हुई, जो भूस्खलन के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे-जैसे जलवायु गर्म हो रही है और भी अधिक भारी बारिश की आशंका बढ़ रही है। जो हमारी चिंता का सबब बनकर उभरेगी। उल्लेखनीय है कि मानव जनित कारणों से होने वाले जलवायु परिवर्तन का असर आंकने के लिए वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) के अनुसंधानकतार्ओं ने बेहद उच्च रेजोल्यूशन वाले जलवायु मॉडल का विश्लेषण किया ताकि अपेक्षाकृत छोटे अध्ययन क्षेत्र में बारिश के स्तर का अंदाजा लगाया जा सके।

अनुसंधानकतार्ओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश में 10 फीसदी की वृद्धि हुई। एक अनुमान के मुताबिक, अगर वैश्विक तापमान वृद्धि 1850 से 1900 तक के औसत तापमान से दो डिग्री सेल्सियस अधिक रहता है, तो बारिश की तीव्रता में चार फीसदी और वृद्धि हो सकती हैं। दरअसल, गर्म वातावरण में आर्द्रता का स्तर अधिक होता है, जो भारी बारिश का कारण बनता है।

वैश्विक तापमान में हर एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से वातावरण में नमी को कैद करने की क्षमता सात फीसदी बढ़ जाती है। कार्बन डाइआॅक्साइड, मीथेन जैसी गैसों के बढ़ते उत्सर्जन से पृथ्वी की सतह का औसत तापमान पहले ही लगभग 1.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। विज्ञानियों का कहना है कि दुनियाभर में बाढ़, सूखा और लू जैसी मौसमी घटनाओं में वृद्धि के पीछे यही कारण है।

इस बीच आम-आदमी के मस्तिष्क में इस सवाल का कौंधना स्वाभाविक है कि आखिर जलवायु परिवर्तन किस मुसीबत का नाम है? दरअसल, जलवायु परिवर्तन को समझने से पूर्व यह समझ लेना आवश्यक है कि जलवायु क्या होता है? सामान्यत: जलवायु का आशय किसी दिए गए क्षेत्र में लंबे समय तक औसत मौसम से होता है। अत: जब किसी क्षेत्र विशेष के औसत मौसम में परिवर्तन आता है, तो उसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। जलवायु परिवर्तन को किसी एक स्थान विशेष में भी महसूस किया जा सकता है एवं संपूर्ण विश्व में भी।

यदि वर्तमान संदर्भ में बात करें तो यह इसका प्रभाव लगभग संपूर्ण विश्व में देखने को मिल रहा है। यदि हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की बात करें तो इसमें उच्च तापमान, वर्षा के पैटर्न में बदलाव, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि, वन्यजीव प्रजाति का नुकसान, रोगों का प्रसार और आर्थिक नुकसान, जंगलों में आग आदि शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव दिनों दिन बढ़ रहे हैं, जो काफी घातक साबित हो सकते हैं।
ऐसे में, अब बड़ा सवाल कि आखिर हम जलवायु परिवर्तन की समस्या से पार पाने के लिए कब तक एकजुट होकर प्रयास करेंगे?

यदि समय रहते जलवायु परिवर्तन से निपटने का प्रयास नहीं हुआ, तो हमें निकट भविष्य में एक बड़े जोखिम का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। आज आवश्यकता वैश्विक संगठनों को एक मंच पर आकर प्रकृति की सुरक्षा के लिहाज से कठोर और सख्त कदम उठाने की है। हमें मानवीय योग्यता, क्षमता, शिक्षा, नेतृत्व, अनुभव, विशेषज्ञता और संगठनों का सहयोग लेकर जलवायु परिवर्तन की समस्या का समुचित समाधान ढूंढना होगा। आज दुनिया जलवायु परिवर्तन के एक ऐसे दौर से गुजर रही है। जहां प्राकृतिक आपदाओं में दिनों-दिन बढ़ोतरी हो रही है।

प्राकृतिक आपदाओं में बाढ़, सूखा, भूकंप, भूस्खलन जैसी घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि दर्ज हो रही हैं। लिहाजा, पर्यावरण-सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। आज वैश्वीकरण और तकनीकी दौर में जहां सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है, उसी अनुपात में दिक्कतें भी बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण हाल के वर्षों में हो रहे प्राकृतिक बदलावों को देखते हुए, हमें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप आवश्यक बदलाव करना होगा, तब जाकर हम मानव सभ्यता के साथ-साथ प्रकृति के अस्तित्व को बचाए रखने में सफल होंगे।

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