Sunday, January 23, 2022
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नोएडा में जमीन खेल का खुलासा, पढ़िए पूरी खबर

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने नोएडा प्राधिकरण की फार्महाउस आवंटन  योजना पर सवाल उठाते हुए खुलासा किया कि सरकारी खजाने को 2833 करोड़ का नुकसान हुआ। योजना में 18.37 लाख वर्गमीटर जमीन 157 आवेदकों को  बेहद कम आरक्षित मूल्य तय कर बांट दी गई। न नियम माने, न सरकार से मंजूरी ली गई।

478 पेज की यह रिपोर्ट शुक्रवार को विधान परिषद के पटल पर रखी गई। 2008-11 के बीच ये गड़बड़ियां हुईं, तब मायावती की सरकार थी। रिपोर्ट के अनुसार, किसानों से कृषि भूमि अधिग्रहित कर उन्हें कॉरपोरेट दफ्तरों से सज्जित विकसित सेक्टरों के करीब आवंटन कर दिया। इससे रियल एस्टेट बाजार में उनकी कीमत काफी बढ़ गई। सेक्टर 126 व 127 का लेखा परीक्षण टीम ने मुआयना किया, तो पाया कि सेक्टर पूर्ण विकसित हैं।

वहां न्यूनतम 10 हजार वर्गमीटर के फार्महाउस आवंटित किए, जिनमें आवंटन के साथ स्विमिंग पूल, आवासीय इकाई और खेल मैदान की मंजूरी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, राशि चुकाने की पूरी क्षमता वाले लोगों के लिए बाजार भाव 14,400 रुपये के मुकाबले सिर्फ 3100 रुपये प्रति वर्गमीटर की आवंटन दर तय की गई। इससे जनहित नहीं सध रहा था, उलटे 2833 करोड़ की चपत लगी।

मनमानी दरों से ही 1316 करोड़ रुपये का नुकसान                          

रिपोर्ट में खुलासा है कि 2005-18 के बीच फार्महाउस लागत के नियम एकसमान नहीं थे। बोर्ड ने मनमाने ढंग से आवंटन दरें तय कीं। सिर्फ इसी से 1316.51 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आरक्षित मूल्यों की वृद्धि पर ध्यान दिए बिना अधिक निर्मित क्षेत्रफल का प्रावधान किया, जिससे 13,968 करोड़ रुपये के राजस्व वसूली में असफलता मिली।

अरबों बकाया, फिर भी दे दी सस्ते में जमीन                                             

आम्रपाली व यूनिटेक समूह की कंपनियों को कई आवंटन किए, जो पहले की बकाया राशि का भुगतान नहीं कर रहे थे। इन दो आवंटियों पर मार्च 2020 तक 9828.49 करोड़ रुपये का बकाया था।

वर्ष 2015-18 के दौरान कुल आवंटन का 79.83 प्रतिशत तीन समूहों-वेव, थ्री सी व लॉजिक्स समूह को किया। तीनों पर 14959 करोड़ का बकाया था।

ग्रुप हाउसिंग के 63 प्रतिशत प्रोजेक्ट अधूरे थे। स्वीकृत 1.30 लाख फ्लैट्स में से 44 प्रतिशत के लिए ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए।

अपात्रों को भी आवंटन, जनहित के बदले विलासिता में जमीन इस्तेमाल         

परिसंपत्तियों व फार्महाउसों के आवंटन में भी जमकर मनमानी हुई। कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि अपात्रों को भी आवंटन कर दिया गया। भूमि आवंटन समिति (पीएसी) ने आवेदनकर्ताओं के इंटरव्यू के लिए पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई।

पीएसी की सिफारिश पर हुए आवंटन से साफ है कि इसमें योजना के दिशानिर्देशों की धज्जियां उड़ाई गईं और अपात्रों को आवंटन किया गया। ऑडिट की दृष्टि से देखा जाए तो खास लोकेशन वाली महत्वपूर्ण भूमि का जनहित में इस्तेमाल करने के बदले विलासिता के काम में इस्तेमाल किया गया।

बोर्ड, प्रबंधन और अधिकारी नाकाम: नोएडा की परिसंपत्तियों के आवंटन में कई अनियमितताएं मिली हैं। नोएडा के बोर्ड, प्रबंधन और अधिकारियों के स्तर पर विफलताएं देखी गईं। मास्टर प्लान-2021 की विभिन्न खामियों को दूर करने के लिए मास्टर प्लान-2031 लाई गई, लेकिन वह भी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के उठाए मुद्दों का संज्ञान लेने में विफल रही। स्पोर्ट्स सिटी और मिश्रित भू-उपयोग योजनाएं उद्योगों को बढ़ावा देने के नोएडा के मूल मकसद से जुड़ी न होने पर भी प्रारंभ की गईं। प्राधिकरण ने भू-अर्जन में अर्जेंसी क्लॉज का अत्यधिक उपयोग किया। दूसरी ओर, भू-अर्जन के लिए अंतिम प्रस्तावों को प्रस्तुत करने में 11 से 46 माह तक की प्रशासनिक देरी हुई। प्राधिकरण ने पुनर्वास की निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए उसके बदले में 373.85 करोड़ की एकमुश्त राशि का भुगतान किया।

अपात्र होने के बावजूद सीबीएस को आवंटन: सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट को अपात्र होने के बावजूद 52.77 करोड़ रुपये के प्रीमियम पर 1,02,949 वर्ग मीटर भूखंड का आवंटन किया गया। लेखा परीक्षा के निष्कर्ष नोएडा के शासकीय ढांचे में गंभीर कमियों की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट नियमों और आदेशों के उल्लंघन और जानबूझकर तथ्यों को छिपाने के उदाहरणों से भरी हुई है।

ऐसे-ऐसे घपले                                                                                  

गोल्फ कोर्स का क्षेत्र 13 भूखंडों में विभाजित कर दिया, जिससे 65 एकड़ गोल्फ कोर्स के विकास की कोई संभावना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का बड़ा हिस्सा अभी भी अर्जित किया जाना है। अपात्र आवंटियों को आवंटन किया। आईटी और आईटीईएस भूखंडों को अस्वीकार्य छूट की अनुमति दी गई। फार्म हाउसों के आवंटन के लिए निर्धारित दरें जनहित में नहीं थीं। वास्तविक क्रियाशील औद्योगिक क्षेत्रफल कुल क्षेत्रफल का केवल 5 प्रतिशत था। नोएडा के खर्चों पर मिश्रित भू-उपयोग नीति को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए लागू किया गया।

जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदने वाले रहे वंचित: प्राधिकरण जब फार्महाउस के नाम पर रसूखदार बिल्डरों को जमीन बांट रहा था तो ग्रुप हाउसिंग की 63 प्रतिशत परियोजनाएं अपूर्ण थीं। 1,30,005 स्वीकृत फ्लैटों में से 44 प्रतिशत के लिए ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए। इससे जीवनभर की बचत और मेहनत की कमाई का निवेश करने वाले खरीदार फ्लैटों के कब्जों से आज तक वंचित हैं।

2005-18 के बीच रहा लेखा परीक्षा का फोकस: कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि लेखा परीक्षा का मुख्य केंद्र 2005-18 की अवधि में भूमि अर्जन और ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यिक (स्पोर्ट्स सिटी सहित), संस्थागत (फार्म हाउस सहित) और औद्योगिक श्रेणियों के तहत परिसंपत्तियों के आवंटन के लिए नोएडा की ओर से अपनाई गई नीतियों और प्रक्रियाओं पर था।

नतीजतन, इन क्षेत्रों में सुधार की संभावना को सामने लाने के लिए महायोजना की तैयारी और परिसंपत्तियों के मूल्य निर्धारण की भी जांच की गई।

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