Sunday, June 13, 2021
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सलाम खाकी! जान जोखिम में डालकर कर रहें ड्यूटी

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  • अपनी सुरक्षा के साथ-साथ परिवार का बचाव करना भी है बड़ी जिम्मेदारी
  • एडीजी, आईजी समेत तमाम अधिकारी कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने को दिन-रात कर रहे ड्यूटी

विनोद फोगाट |

मेरठ: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में हाहाकार मचा दिया। यदि इस लहर में असल कोरोना योद्धा की बात करें तो वह सिर्फ खाकी है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी ने खाकी को भी बड़े जख्म दिए है। इसके बावजूद खाकी ने अपनी जान को जोखिम में डालकर दिन-रात ड्यूटी निभाई और लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए गली-गली घूमकर जागरूक किया।

एडीजी व आईजी से लेकर तमाम अधिकारी सड़कों पर रहे और लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया। यही नहीं इस बार जिला पुलिस ने अपने छह जवानों को भी खोया, जिससे पुलिस विभाग में गमगीन माहौल रहा। कोरोना संक्रमण की इस लहर में अब तक जिले के 370 पुलिसकर्मी पॉजिटिव हो चुके है।

जिनमें से 307 पुलिसकर्मी ठीक होकर अपनी ड्यूटी पर आ गए है और 57 पुलिसकर्मियों का अभी इलाज चल रहा है। कोरोना महामारी में जहां स्वास्थ्यकर्मी फ्रंट लाइन पर रहते है, वहीं खाकी भी फ्रंट लाइन पर रहती है। जो दिन-रात सड़कों पर रहकर लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए उन्हें जागरूक करती है और न मानने वालों के खिलाफ सख्ती भी दिखाती है।

ऐसे में पुलिसकर्मियों को लोगों के चालान भी काटने पड़ते है और अपराधी को गिरफ्तार कर उसे न्यायालय से लेकर जिला कारागार तक पहुंचाने का काम भी खाकी को ही करना पड़ रहा है। ऐसे में न तो पुलिसकर्मियों के पास कोई पीपीई किट होती है और न ही कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अन्स संसाधन होते है।

पुलिस अधिकारियों की मानें तो कोरोना महामारी के दौरान उनके ऊपर ड्यूटी के अलावा अपनी सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारी भी होती है। जिस कारण उन्हें परिवार से दूरी बनाकर रखना पड़ता है और इस बीच हंगामा, बवाल व अन्य अपराधिक घटनाएं होने पर भीड़ के संपर्क में आने से भी अपना बचाव करना पड़ता है।

अधिकारियों की मानें तो कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सबसे जरुरी मास्क लगाना और समय-समय पर खुद को सैनिटाइज करना है। वहीं परिवार में जानें से पहले खुद को पूरी तरह सैनिटाइज करने के साथ ही अपने कपड़े बदलना और स्नान करने के बाद ही परिजनों से मिलना-जुलना चाहिए। सरकार की गाइड लाइन भी यही कहती है कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए सिर्फ ओर सिर्फ खुद को सुरक्षित रखने के लिए मास्क लगाना बेहद जरुरी है।

जिला पुलिस ने खोए इस बार छह जवान

कोरोना की दूसरी लहर में इस बार जिले के 370 पुलिसकर्मी पॉजिटिव हुए है। जिनमें से छह पुलिसकर्मी कोरोना से लड़ते हुए अपनी जिंदगी हार गए। वहीं 307 पुलिसकर्मी ठीक होकर अपनी ड्यूटी पर आ गए है और 57 पुलिसकर्मियों का अभी इलाज चल रहा है। जिनमें तीन पुलिसकर्मी पुलिस कोविड अस्पताल में अपना ईलाज करा रहे है और बाकी के 54 पुलिसकर्मी निजी अस्पताल व अपने घरों पर ही उपचाराधीन है। पुलिस कोविड अस्पताल में मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि विभाग की ओर से पुलिसकर्मियों के ईलाज के लिए पूरी सुविधा मुहैया कराई जा रही है। फिलहाल जो पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती है उनको बेहतर ईलाज दिया जा रहा है। जल्द ही वह ठीक होकर अपने घर पहुंच जाएंगे।


क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी

एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि कोरोना काल में पुलिसकर्मियों ने जान जोखिम में डाल कर अपने कर्तव्यों का पालन किया। तमाम पुलिसकर्मियों को बीमारी से भी जूझना पड़ा और कुछ लोगों को खोना भी पड़ा। इसके बाद भी लॉकडाउन हो या फिर कानून व्यवस्था की बात हो पुलिसकर्मी ने सफलता से जिम्मेदारी निभाई है।


एसपी क्राइम राम अर्ज का कहना है कि कोरोना की पहली लहर में पीड़ित होने के बाद भी उन्होंने अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से पालन किया। दूसरी लहर में ड्यूटी के प्रति सभी पुलिसकर्मियों ने मन लगाकर काम किया। यह जानते हुए भी कि इस बार कोरोना खतरनाक रूप में सामने आया है। पुलिसकर्मियों ने अपने परिवार से दूरी बनाकर लॉकडाउन में बढ़चढ़ कर काम किया।


कोरोना से खुद व पूरे परिवार के संक्रमित होने के बावजूद डयूटी में लगातार दिखने वाले एसपी सिटी विनीत भटनागर का कहना है कि जबरदस्त खतरों के बावजूद पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं और काफी संख्या में लोग संक्रमित भी हुए लेकिन इसके बाद भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे। यह सिलसिला पुलिसकर्मी हमेशा बनाएं रखेंगे।


इंस्पेक्टर रघुराज सिंह का कहना है कि कोरोना की इस दूसरी लहर ने इस बार खाकी को भी बख्शा। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार जिले में बहुत ज्यादा पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव हुए है। कुछ पुलिसकर्मियों को हमें खोना भी पड़ा। इसके बावजूद हम लोग अपनी ड्यूटी के अलावा परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रहे है।


इंस्पेक्टर आशुतोष का कहना है कि कोरोना के दौर में खुद का बचाव करते हुए लॉकडाउन का पालन जिम्मेदारी से कराया जा रहा है। दिनभर ड्यूटी करने के बाद जब घर जाते है तो वहां पर खुद से परिवार का बचाव करना पड़ता है। जिसके लिए हम लोग गर्म पानी में नहाने और कपड़े बदलने के बाद ही परिवार के सदस्यों से मिलते है।



एसएसआई प्रीतम सिंह कहते हैं कि इस कोरोना ने इस बार खाकी को बड़े जख्म दिए हैं। इस बार खाकी ने भी अपने कई जवानों को खोया है और सैकड़ों की तादाद में पुलिसकर्मी पॉजिटिव हुए है। इसके बावजूद खाकी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटी है और लगातार अपने कर्तव्य का पालन कर रही है।

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