महिलाओं की बचत पर महंगाई की मार, दर्द नहीं समझ रही सरकार
मेरठ: आम बजट जारी हो चुका है। महिलाओं को आम बजट में न तो कुछ मिला है और न ही रसोई का बजट ही सुधर पाया है। अब गैस के दामों में फिर से 25 रुपये का इजाफा कर दिया गया है।
ऐसे में बजट में किसी समान के दाम न कम होने की वजह से पहले ही घर का सालाना बजट आधी आबादी पर भारी पड़ रहा है। वहीं अब लगातार महंगाई बढ़ने से चूल्हे चौखे में आग लग चुकी है।
रसोई का बजट संभालने में लगी महिलाएं अपने अन्य खर्चो के लिए पैसे नहीं बचा पा रही है और न ही बच्चों को पौष्टिक समान खिला पा रही है।
महंगाई की मार से आहत घरेलू महिलाओं से उनके दर्द को जानने की कोशिश की है जनवाणी संवाददाता
नेहा त्यागी ने। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश:
जेल चुंगी निवासी अनीता शर्मा का कहना है कि महंगाई कम होने की बजाए आय दिन बढ़ रही है। अब गैस के दाम और बढ़ा दिए गए है। ऐसे में आम आदमी को घर चलाना दुर्भर हो रहा है। क्योंकि, रसोई के अलावा भी घर में बच्चों की पढ़ाई आदि के खर्चे होते है। सरकार को महंगाई कम करने के बारे में विचार करना चाहिए।
जागृति विहार निवासी नम्रता सिंह का कहना है कि रोज की जरुरतों में सिलेंडर घर का एक हिस्सा बन गया है। आज घरेलू सिलेंडर उतना ही जरुरी हो गया हैं,जितना हमारे घर का सदस्य। मगर इसकी कीमत में कमी नहीं आ रही है। सिलेंडर आम आदमी के बजट में होना चाहिए।
अर्चना चौधरी का कहना है कि घर का बजट बिल्कुल बिगड़ चुका है। महंगाई कम होने की बजाए निरंतर बढ़ रही हैं,सरकार को महंगाई कम करने के बारे में सोचना चाहिए। आम बजट जारी होने के बाद भी महंगाई पर कोई असर नहीं पढ़ा है। ऐसे में लोगों को घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
गांधी आश्रम निवासी ममता का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने की वजह से महिलाएं बचत नहीं कर रही है। ऐसा लग रहा है कि सरकार कोरोना के बाद लोगों की जेब इस प्रकार काट उस दौरान होने वाली हानि की भरपाई कर रही है।
सूरजकुंड रोड निवासी नेहा का कहना है कि रसोई ही नहीं बढ़ती महंगाई की वजह से घर के सभी खर्चो में कमी करनी पड़ रही है। इस समय बच्चों की जरुरतों को भी पूरा करने के लिए घर के खर्च से पैसे महिलाएं नहीं बचा पा रही है। सरकार को गैस और घरेलू समान के दामों में कमी करनी चाहिए।

