Tuesday, June 25, 2024
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कम आयु में नशा बन रहा काल

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  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस: दुनियाभर में तंबाकू इस्तेमाल करने वालों को तंबाकू उत्पाद छुड़वाने के लिए करना था राजी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: विश्व में हर साल 31 मई को यानी कि आज तंबाकू दिवस के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, सात अप्रैल 1998 को वर्ल्ड हेल्थ आॅर्गेनाइजेशन ने विश्व धूम्रपान निषेध दिवस को मनाने की अपील की थी। जिसका उद्देश्य दुनिया भर में तंबाकू इस्तेमाल करने वालों को तंबाकू उत्पाद छुड़वाने के लिए राजी करना था। हर साल लाखों लोग तंबाकू के सेवन के कारण कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित होकर अपनी जान गवां रहे हैं। पहले यह मृत्यु दर 45 से 55 वर्ष की आयु के लोगों में देखी जा रही थी, लेकिन आज यह मृत्यु दर घट के 30 से 35 उम्र के युवाओं में देखी जा रही है।

आज देश का हर दूसरा युवा तंबाकू की लत से ग्रसित है, जिस वजह से लोग कम आयु में अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। इसको देखते हुए इस बार तंबाकू दिवस की थीम भी प्रोटेक्टिंग चिल्ड्रन फ्रॉम टोबैको इंडस्ट्री इंटरफरेन्स रखी गयी है। जिसका अर्थ है बच्चों को तंबाकू उद्योग से दूर रखना और उन्हें तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन करने से बचाना।
इस थीम का उद्देश्य बच्चों व युवाओं को नशे की लत लगने से बचाना है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. पीयूष गोयल बताते हैं कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में स्मोकलेस तंबाकू का बहुत ज्यादा सेवन होता है

जिस कारण मुंह खुलने व बंद होने में तकलीफ होती है। आज के समय में धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करना फैशन स्टेटस बनता जा रहा है। तंबाकू और धूम्रपान में स्थित निकोटीन, तार और कार्बन मोनोआॅक्साइड जैसे केमिकल इसकी एडिक्शन को बढ़ाते हैं। साथ ही सिगरेट कि तरह पीने या चबाकर खाने से धुआं शरीर के अंदर जाकर नुकसान पहुंचाता है। मुंह के कैंसर में रिजल्ट अच्छे मिलते हैं। इसमें जान बचाई जा सकती है मगर बाकी कैंसर में 99% फाइनल स्टेज में ही पता चलता है। इसके साथ ही पैरों की नसें भी खराब हो जाती है। जिससे कई बार मरीज का पैर भी काटना पड़ जाता है।

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