Wednesday, April 1, 2026
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खरीदारी नहीं, मजबूरों की मदद कर मनाएंगे ईद

  • जब पड़ोस के घर में हो मातम तो उसकी मदद ही सबसे बड़ा त्योहार
  • नए कपड़े नहीं भूखे की रोटी का इंतजाम करना ही होगा लोगों की ईद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना की दूसरी लहर का गांव-गांव शहर-शहर कहर है। एक-एक सांस (आॅक्सीजन) के लिए हर जगह मारामारी मची हुई है। शमशानों और कब्रस्तिानों में लाइने लगी हुई और लोग अपनों के अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार कर रहे है। ऐसे में आने वाली ईद पर भी कोरोना का साया साफ दिखाई दे रहा है।

यह कोरोना का ही असर है कि ईद पर होने वाली खरीदारी से लोगों ने इसबार तोबा कर ली है और मजबूरों की मदद कर ईद मनाने का फैसला लिया हैं। लोगों का कहना है कि जब हर तरफ मातम हो तो ऐसे में मदद करना ही असली त्योहार है।

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नगमा परवीन का कहना है कि ईद का त्योहार इस वर्ष सभी को सादगी से मनाना चाहिए और गरीब व असहायों की मदद करनी चाहिए। देश में कोरोना की वजह से हालात खराब है ऐसे में सभी को एकजुट रहने की जरुरत है ताकि सभी इस बीमारी से बाहर आ सकें।

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शाहीन का कहना है कि कोरोना की वजह से रमजान के दौरान अधिकांश लोग घर में ही नमाज, तरावीह और इबादत अदा कर रहे है। संक्रमण के इस दौर में बाजार में जाना और ईद की खरीदारी करना बीमारी को दावत देने जैसा होगा।

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सहाना का कहना है कि ईद पर कोरोना का साया है ऐसे में हमें बाहर न जाकर घर में ईद मनानी चाहिए। वहीं अस दौरान गरीब और असहाय लोगों की मदद करना भी लाभदायक होगा। रमजान माह इस बात का प्रशिक्षण देता है कि इंसान अपने हाथों से किसी का बुरा न करें।

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