Saturday, May 25, 2024
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कृषि विभाग की योजनाओं से किसान महरूम

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  • खाद, बीज एवं कृषि उपकरणों पर नहीं दी जा रही सब्सिडी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जहां एक ओर पीएम मोदी किसानों की आय दोगनी करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, किसानों के लिए केन्द्र और प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाएं लेकर के आ रही है तो वहीं दूसरी ओर जनपद के कृषि अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

किसानो द्वारा कृषि विभाग में पंजीकरण कराने के बाद भी उन्हें न ही तो खाद-बीज पर कोई सब्सिडि मिल रही है और न ही कृषि यंत्रों की खरीद पर कोई अनुदान मिल पा रहा है। ऐसे में किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकांश अधिकारी अपने चहेतों को योजनाओं का लाभ दिला रहे हैं।

बतादें कि बीजेपी की केन्द्र और प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। जिसके तहत पंजीकरण के बाद किसानों को खाद-बीज व कृषि उपकरणों के खरीद पर सब्सिडी देने का प्रावधान है, लेकिन असल में ऐसा हो नहीं रहा। किसानों द्वारा कृषि विभाग में पंजीकरण कराने के बावजूद उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। जानकारी करने के लिए जब किसान कृषि विभाग के दफ्तर जाते हैं तो आरोप है कि अधिकारी उनसे सीधे मुंह बात तक करने के लिए तैयार नहीं होते।

किसानों ने बताया कि उन्होंने कृषि विभाग में कई बार पंजीकरण कराया हुआ है, लेकिन हर बार कृषि अधिकारी यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते है कि आपका पंजीकरण नहीं हो रहा है। ऐसे में किसानों के चेहरे मायूस हैं किसानों ने बताया कि उन्हें सिंचाई के लिए नलकूप लगाने, कृषि उपकरण जैसे स्प्रे मशीन, कल्टीवेटर, हैरो, टीलर आदि खरीदने पर उन्हें कोई अनुदान नहीं मिल पा रहा है।

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जिसके चलते किसान परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग के अधिकारी अपने चहेते किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिला रहे है। किसानों ने समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। जानकारी देने वालों में राहुल शर्मा, अमित पंडित, अजय शर्मा, रामदेव पंडित, प्रदीप शर्मा आदि किसान रहे।

पशुओं में बढ़ रहा बांझपन का रोग, विभाग सुस्त

जनपद में पशुपालकों के सामने एक विकट स्थिति पैदा होती जा रही है, जिसमें पशुओं में बांझपन का रोग बढ़ता चला जा रहा है। अधिकांश किसानों और पशुपालकों के पशुओं को बांझपन के रोग ने घेर रखा है। ऐसे में जब पशुपालक को पशु से दूध नहीं मिल पाता है तो पशुपालक परेशान होकर पशुओं को आधे दाम बेचने पर मजबूर हो जाते हैं।

ऐसे कई मामले जनपद के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल रहे हैं। बावजूद इसके पशुपालन विभाग के अधिकारी इस बाबत कोई ठोस कदम उठाने से परहेज कर रहे हैं। विभाग द्वारा पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जिसके चलते पशुपालकों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

बता दें कि जनपद में पशुपालन विभाग की लापरवाही के चलते पशुओं में बांझपन का रोग बढ़ता चला जा रहा है। सरकारी अस्पताल से एआई की कोई सुविधा न मिलने पर पशुपालकों द्वारा मजबूरन प्राइवेट एआई वर्करों से मादा पशु की एआई कराई जा रही हैं, लेकिन अधिकांश परिणाम नकारात्मक ही सामने आ रहे हैं। जनपद के पशुपालकों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में जब मादा पशुओं के बांझपन का इलाज कराने के लिए जाते हैं तो न ही तो इलाज सही तरीके से हो पाता है और न ही उन्हें कोई उचित सलाह ही पशुचिकित्सकों से मिल पाती हैं।

मजबूरन प्राइवेट एआई वर्करों से मादा पशुओं की एआई करानी पड़ रही है। कई-कई बार कृत्रिम गर्भाधान कराने के बाद भी कोई सकारात्मक नतीजे सामने नहीं आ रहे हैं। न ही तो पशुओं की नस्ल सुधार हो पा रही है और न ही पशुओं का बांझपन खत्म हो रहा है। पशुपालकों ने बताया कि उनके वो मादा पशु भी बांझपन की चपेट में हैं जो पहले इस रोग की चपेट में नहीं थे। वहीं दूसरी ओर ऐसे मादा पशु भी बांझपन के शिकार हैं जो अभी बड़े हुए हैं, लेकिन गाभिन नहीं हो पा रहे हैं। वेटेनरी के जानकारों की माने तो अधिकांश जब मादा पशु की बच्चेदानी में ओवरी का सही विकास नहीं हो पाता या ओवरी पर मस्से आदि हो जाते हैं तो ऐसी समस्या उत्पन्न हो जाती है।

इसके अलावा मादा पशु जब बच्चा देता है तो जेर सही तरीके से न छोड़ने पर भी बच्चेदानी में इंफेक्शन हो जा जाता है। जिसका इलाज संभव हैं, लेकिन सही लक्षणों की पहचान न होने के कारण बांझपन का इलाज नहीं हो पा रहा है। वहीं इस बाबत पशुपालन विभाग के अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। जिसके चलते पशुपालक काफी परेशान हैं, पशुपालकों ने समस्या से निजात दिलााने की मांग की है। जानकारी देने वालों में अजय शर्मा, रोहित सिंह, अशोक सिंह, अंशु शर्मा, पवन शर्मा, मुकेश शर्मा, विकास सिंह, अर्जुन सिंह आदि पशुपालक शामिल रहे।

वहीं जब इस संबंध में जब मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. अखिलेश गर्ग से वार्ता की तो उनका कहना था कि बांझपन का इलाज संभव है, लेकिन कई बार इलाज के बाद भी सफलता नहीं मिलपाती। इस रोग से बचने के लिए पशुपालकों को अपने पशुओं को अच्छी गुणवत्ता वाला मिनरल-मिक्चर खिलाना चाहिए। यदि बच्चेदानी में कोई इंफेक्शन है या ओवरी में अंडा नहीं बन पा रहा है तो उसका पशु चिकित्सक से इलाज कराएं। नस्ल सुधारने के सवाल पर उन्होने कहा कि इसके लिए विभाग ने कार्यक्रम चला रखा है उसमें केवल बछिया ही पैदा होगी।

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