Friday, May 1, 2026
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पहले रॉक सुपरस्टार शम्मी कपूर

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हिन्दी सिनेमा का पहला रॉकस्टार, कपूर खानदान का पहला ऐसा हीरो शम्मी कपूर जिसने हिन्दी सिनेमा में डांसिंग हीरोज की परम्परा कायम की। अत्याधुनिक एनर्जी, रॉक अंदाज के कारण हिन्दी सिनेमा में डांस ऐक्टिंग के ब्रांड एंबेसडर बन गए थे। शम्मी कपूर से पहले हिन्दी सिनेमा में तीन सुपरस्टार स्थापित थे। देव- राज – दिलीप, त्रिमूर्ति यानि देवानंद साहब, दिलीप कुमार, राज कपूर, ये तीनों अपने-अपने अभिनय कला में माहिर थे। देव साहब ने रोमांस एवं स्टाइल, दिलीप कुमार ने ट्रेजडी, संजीदगी, राजकपूर ने मुफलिसी के यथार्थ के अग्रदूत के रूप में जाने गए।

इसके बाद शम्मी कपूर के लिए पर्दे पर अपना कुछ पेश करना चुनौती पूर्ण था। कुछ भी करते तो दर्शक, समीक्षक, यही कहते, कि अब हीरो कोई भी बने देव – राज – दिलीप की अभिनय कला से अछूता नहीं रहेगा। शम्मी कपूर के लिए रास्ता आसान नहीं था। सबसे बड़ी चुनौती तो घर में ही मिलती थी। उनके बड़े भाई ग्रेट शो मैन राज कपूर साहब जिनका कद बहुत बड़ा था। दिलीप कुमार, एवं उनके सबसे बड़े राईवल देव साहब दिग्गज जब तीनों पीक पर थे, तब शम्मी कपूर के लिए अपनी हटकर एक अलग पहचान बनाना कोई आसान काम नहीं था।

शम्मी कपूर ने खुद को बखूबी साबित किया है। शम्मी कपूर ने वाकई तीनों दिग्गजों से हटकर अपनी पहचान बनाई, शम्मी कपूर ने खुद के लिए अपना अभिनय का एक ध्रुव क्रिएट किया। रॉकस्टार हीरो शम्मी कपूर ने डांस को अपना सिग्नेचर स्टाइल बनाया। शम्मी कपूर खुद ही अपना डांस स्टेप क्रिएट करते थे, उन्होंने कभी भी कोई कोरियोग्राफर की मदद नहीं लिया। एक बार किंवदन्ती बन गए, तो हमेशा बने रहे।

शम्मी कपूर कहते थे-मेरी सुपरहिट फिल्मों में सुबोध मुखर्जी की जंगली, पहले देव साहब को आॅफर हुई, देव साहब बहुत व्यस्त थे, तो देव साहब ने मना कर दिया। जंगली फिल्म शम्मी कपूर की सिग्नेचर फिल्म मानी जाती है। जंगली फिल्म ने हिन्दी सिनेमा में शम्मी कपूर नाम स्थापित कर दिया। जंगली फिल्म से शम्मी कपूर स्थापित रॉक स्टार बन गए थे। जब शम्मी कपूर ‘तुमसा नहीं देखा’ और दिल देके देखो, जंगली के साथ पहले ही स्टार बन चुके थे। शम्मी कपूर कहते थे- तुमसा नहीं देखा, दिल देके देखो, आदि फिल्में अगर देव साहब ने कर ली होतीं तो देव साहब तो देव साहब ही रहते, लेकिन मैं नहीं होता।

फिल्म निर्माताओं ने विदेशों में अपनी फिल्मों का व्यवसाय शुरू कर दिया था। लव इन टोक्यो, एन इविनिंग इन पेरिस, जैसी फिल्मों ने बैकग्राउंड, लोकेशन में आधुनिकीकरण के लिए विदेशी लोकेशन, स्विटजरलैंड, पेरिस, लंदन, टोक्यो में शूटिंग किया। यह दौर भारतीय दर्शकों को विदेशी दृश्यों, विदेशी जीवन – शैली को दिखाने का तरीका था। ईस्टमैन कलर’ में फिल्माई गई, जंगली ने कश्मीर की पूरी सुंदरता को सामने लाया। फिल्म की सिलवान सेटिंग और बर्फ से ढकी पहाड़ियां दर्शकों के लिए और रोमांच का अहसास कराती थीं।

यह एक अनोखा एवं नया अनुभव था। एक सफल प्रयोग भी था। जंगली फिल्म की रिलीज के वर्ष, तीन अन्य साउंडट्रैक थे, जो बहुत लोकप्रिय हुए, हम दोनो, गंगा जमुना और जब प्यार किससे होता है। तीनों फिल्मों में लगातार अच्छा संगीत था, लेकिन जंगली का संगीत कुछ और था, अजीब था, नया था, ‘एहसां तेरा होगा मुझे पर’ के सुरों से लेकर ‘कश्मीर की कली हूं में शानदार युगल गीत ‘मेरे यार शब्बा खैर’ तक, हर दर्शकों और श्रोताओं द्वारा गीत को बहुत खुशी के साथ प्राप्त किया गया था।

शम्मी कपूर की कामयाबी में सबसे बड़ा रोल रफी साहब का भी रहा है। हिन्दी सिनेमा में रफी साहब ने सबसे ज्यादा शम्मी के लिए गाया। क्लासिकल, गजल के उस्ताद रफी साहब शम्मी कपूर की इमेज का पूरा ख्याल रखते थे। रफी साहब ने बखूबी वेस्टर्न कल्चर के गाने गाकर हरफनमौला सिंगिग में खुद को अमर कर दिया। ये चांद सा रोशन चेहरा, बदन पर सितारे लपेटे हुए, चाहे मुझे कोई जंगली कहे, जैसे रॉक गाने लगभग डेढ़ सौ ज्यादा हैं जो आज भी गुनगुनाए जाते हैं, खूब डांस भी किया जाता है, पार्टियों में आज भी बजाए जाते हैं, यूं तो रफी साहब पर सभी अपना अधिकार सिद्ध करते थे, यह मुहब्बत रफी साहब महसूस करते हुए भावुक हो जाते थे। एक बार जुबली कुमार से मशहूर राजेन्द्र कुमार एवं शम्मी कपूर दोनों रफी साहब के सामने बहस कर रहे थे, कि मेरे लिए रफी साहब ने ज्यादा अच्छे गाने गाए हैं, हालांकि ऐसा सुनना आम बात है कि आपके लिए अच्छे गाने गाए हैं, मेरे लिए नही। रफी साहब ने दोनों को सुनकर की दोनों कह रहे हैं कि रफी साहब ने मेरे लिए ज्यादा अच्छा गाया है। रफी साहब अजूबा थे, यह मुहब्बत देख कर रफी साहब रोने लगे थे।

अपने वजन बिगड़ चुके लुक के कारण शम्मी कपूर ने अपनी दूसरी पारी शुरू किया। अपनी दूसरी पारी में उन्होंने शानदार यात्रा तय की। दूसरी पारी में धुरंधर ग्रेट संजीव कुमार, दिलीप कुमार के साथ भी प्रभावी रहे। बाद में विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, जैकी शॉफ, भतीजे ऋषि कपूर, मिथुन आदि के साथ गजब की ट्यूनिंग बनी। अपनी दूसरी पारी में दमदार आवाज अभिनय के लिहाज से वो दो तीन ग्रेट अभिनेताओं में शुमार हैं, जो इतने कामयाब रहे। दूसरी पारी में सत्तर के दशक से अंतिम नब्बे के दशक तक ऐक्टिव रहे। फिर उन्होंने हिन्दी सिनेमा से सन्यास की घोषणा कर देने के बाद भी 2011 में पोते रणबीर कपूर के प्यार में हिन्दी सिनेमा के पहले रॉकस्टार ने अपनी आखिरी फिल्म ‘रॉकस्टार’ में काम किया। और 14 अगस्त 2011 को शम्मी कपूर इस फानी दुनिया को छोड़कर अनन्त में विलीन हो गए।

दिलीप कुमार पाठक

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