Thursday, August 18, 2022
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गजछाया, सर्वार्थ सिद्धि योग में आज विदा होंगे पितृ

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आश्विन महीने की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या पर्व मनाया जाता है। जोकि आगामी छह अक्टूबर, बुधवार को है। इस बार सर्वपितृ अमावस्या पर कुतुप काल में गजछाया शुभ योग रहेगा। इस संयोग में श्राद्ध और दान करना बहुत ही शुभ माना गया है।

इससे पहले सात अक्टूबर 2010 को ये संयोग बना था और अब आठ साल बाद 2029 में फिर से सात अक्टूबर को ही ये संयोग बनेगा। पितृ पक्ष की अमावस्या बुधवार को है और इस दिन सूर्य-चंद्रमा दोनों ही बुध की राशि यानी कन्या में रहेंगे।

ज्योतिष आचार्य राहुल अग्रवाल कहते हैं कि तिथि, नक्षत्र और ग्रहों से मिलकर बनने वाले इस शुभ संयोग में श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस शुभ योग में पितरों के लिए किए गए श्राद्ध और दान का अक्षय फल मिलता है। इस शुभ योग में श्राद्ध करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है, घर में समृद्धि और शांति भी होती है।

गजछाया योग में किए गए श्राद्ध और दान से पितर अगले 12 सालों के लिए तृप्त हो जाते हैं। गजछाया योग में तीर्थ-स्नान, ब्राह्मण को भोजन और दान पुण्य का महत्व अग्नि, मत्स्य और वराह पुराण में हस्तिच्छाया यानी गजछाया योग का जिक्र किया गया है।

इस शुभ योग में पितरों के लिए श्राद्ध और घी मिली हुई खीर का दान करने से पितृ कम से कम 12 सालों के लिए तृप्त हो जाते हैं। गजछाया योग में तीर्थ-स्नान, ब्राह्मण भोजन, अन्न, वस्त्रादि का दान और श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है।

पं. विनोद त्रिपाठी कहते हैं कि इसमें विधि-विधान से श्राद्ध करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और श्राद्ध करने वाले को पारिवारिक उन्नति और संतान से सुख मिलता है। साथ ही ऋण से भी मुक्ति मिलती है।

ऐसे दें पितरों को विदाई

  •  जब पितरों की देहावसान तिथि अज्ञात हो, तब पितरों की शांति के लिए पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करने का नियम है।
  • आप सभी पितरों की तिथि याद नहीं रख सकते, ऐसी दशा में भी पितृ विसर्जन अमावस्या को श्राद्ध करना चाहिए।
     इस दिन किसी सात्विक और विद्वान ब्राह्मण को घर पर निमंत्रित करें और उनसे भोजन करने तथा आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें।
  • स्नान करके शुद्ध मन से भोजन बनायें, भोजन सात्विक हो और इसमें खीर, पूड़ी का होना आवश्यक है।
    भोजन कराने तथा श्राद्ध करने का समय मध्यान्ह होना चाहिए।
  •  श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण को भोजन करायें, उनका तिलक करके, दक्षिणा देकर विदा करें।
  •  घर के सभी सदस्य एक साथ भोजन करें और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। जिनकी अकाल मौत हो गई हो।
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