
ना मुझे किसी ने भेजा है, ना मैं यहां आया हूं, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है। यह बात नरेंद्र्र भाई दामोदर मोदी ने वाराणसी में पर्चा भरने से पहले कही थी। इस बात का सीधा और सरल अर्थ यही होता है कि उनको गंगा मैया ने सेवा के लिए बुलाया था। वे उस समय अपनी चुनावी सभाओं और रैलियों के दौरान भी बार-बार यह कहते थे कि मुझे गंगा मैया पुकार रही है। लेकिन अब तो शायद गंगा मैया की आवाज भी मोदी के कान तक नहीं पहुंच रही है। गर पहुंची होती तो शायद जिस समय सीमा 2022 में नमामि गंगे प्रोजेक्ट को पूरा करने की उनने ठानी थी उसे समय में पूरा भी कर देते।