Tuesday, May 21, 2024
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खंडहर में सरकारी स्कूल, ये हैं हकीकत

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शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए स्कूलों में सुधार की बात तो की जा रही हैं, लेकिन हकीकत इससे ठीक उल्ट हैं। पश्चिमी यूपी का मेरठ जनपद शिक्षा के क्षेत्र का हब कहा जाता हैं, लेकिन यहां कई स्कूलों में जाकर ‘जनवाणी’ने पड़ताल की तो तस्वीर बेहद खराब दिखाई दी।

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पहली प्राथमिकता बिडिंग की होती हैं, वो भी खंडहर हैं। यह तो शहर के बीचो-बीच स्कूलों की हैं, जहां पर कोई भी अधिकारी या फिर जनप्रतिनिधि दौरा करने के लिए भी आ सकते हैं। हम बात कर रहे हैं सराय लाल दास और ठठेरवाड़ा स्कूलों की। इन दोनों ही स्कूलों की बिल्डिंग खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं, जहां पर शिक्षा मित्र तो आते हैं, लेकिन छात्र तीन वर्षों से आये ही नहीं। हालांकि आॅन रिकॉर्ड छात्र वर्तमान में भी पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन फिर भी सुधार की दिशा में कोई कदम बेसिक शिक्षा विभाग ने नहीं उठाये।

  • प्राइमरी स्कूल: कैसे सुधरे हालात?
  • पिछले तीन साल से स्कूलों की बिल्डिंग खंडहर में तब्दील, छात्रों का पता नहीं
  • शिक्षा के नाम पर हो रहा मजाक, खंडहर में चल रहे स्कूल, जांच के नाम पर होती है खानापूर्ति

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लाख दावों के बाद भी हालात दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में तो स्कूलों के नाम पर केवल खंडहर रह गए हैं। बावजूद इसके यहां कागजों में आज भी पढ़ाई जारी है। यानी शिक्षा का लगातार चीरहरण हो रहा है, मगर विभाग है कि उसे इसकी जानकारी ही नहीं है। तीन साल पहले कन्या प्राथमिक विद्यालय सरायलाल दास की बिल्डिंग की छत गिर गई थी।

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जिसके बाद यहां पर शिक्षा पाने वाले छात्रों को दूसरी जगह प्राथमिक कन्या विद्यालय ठठेरवाड़ा में शिक्षा लेने के लिए भेज दिया गया, लेकिन जिस विद्यालय में इन छात्रों को भेजा गया उस विद्यालय की खुद की बिल्डिंग खंडहर में तब्दील हो चुकी है। यानी तीन सालों से अधिक समय बीतने के बाद भी दोनों विद्यालयों की न तो बिल्डिंग बनी है न ही यहां बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, लेकिन शिक्षक व शिक्षा मित्र तैनात है और लगातार वेतन भी पा रहे हैं। वहीं, इस संंधंब में बीएसए योगेंद्र कुमार का कहना है कि उनके संज्ञान में इस तरह का मामला नहीं है, अगर ऐसा है तो वह इसकी जांच कराएंगे।

सराय लालदास: खंडहर बना विद्यालय

यहां पर एक शिक्षा मित्र है। जबकि हेड शिक्षक जावेद मकसूद भी अपने काम को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन कागजों में। शिक्षा मित्र के रूप में बच्चों को शिक्षा देने वाली शिक्षा मित्र नगमा ने बताया कि पहली कक्षा में इस समय कोई छात्र नहीं है। जबकि दूसरी कक्षा में 2, तीसरी कक्षा में 3, चौथी कक्षा में 6 व पांचवीं कक्षा में 2 यानी कुल 13 छात्रों को पढ़ाया जा रहा है, लेकिन यह पढ़ाई केवल कागजों में हो रही है। जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। बिल्डिंग के नाम पर केवल खंडहर मौजूद है।

ठठेरवाडा: जर्जर हालत में प्राथमिक विद्यालय

सरायलालदास के छात्रों को ठठेरवाड़ा के स्कूल में पढ़ाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में तीन सालों से छात्र पढ़ाए ही नहीं जा रहे। केवल खानापूर्ति की जा रही है। यहां की शिक्षा मित्र गीतू शर्मा ने बताया कि उनके विद्यालय में पहली कक्षा में इस समय कोई छात्र नहीं है, दूसरी कक्षा में 2, तीसरी कक्षा में 3, चौथी व पांचवीं कक्षा में कोई छात्र नहीं है। यानी कागजों में कुल पांच बच्चे है जिनको यहां पढ़ाया जा रहा है।

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कुल मिलाकर खंडहर बने सरकारी विद्यालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। कई बार जांच के नाम पर अधिकारी इन स्कूलों का दौरा करने पहुंचे, लेकिन सिर्फ खाना-पूर्ती करके वापस लौट गए। सवाल यह उठता है कि इन विद्यालयों में जब शिक्षण कार्य चल ही नहीं रहा तो इनमे तैनात स्टाफ क्या कर रहा है।

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