- शेरी नशिस्त का आयोजन किया
जनवाणी संवाददाता |
नजीबाबाद: बज्म ए उर्दू अदब कल्हेड़ी के तत्वावधान में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सय्यद अहमद की याद व अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के स्थापना दिवस पर एक शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया। जिसमें सर सय्यद अहमद खां को खिराजे अकीदत पेश की गई। उन्हें एक महान शिक्षाविद बताया।
हाजी इखलास अहमद एड. के निवास पर आयोजित शेरी नशिस्त को खिताब करते हुए अध्यक्ष हाजी अनवार अहमद ने कहा कि सर सय्यद अहमद खां ने अलीगढ़ में शिक्षा का एक ऐसा चिराग रोशन किया है जिससे पूरी दुनिया को रोशनी मिल रही है। सर सय्यद ने अलीगढ़ में यूनिवर्सिटी कायम करके बहुत बड़ा कार्य किया।
उन्होंने कहा कि जहां अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना को सौ वर्ष हुंए है वहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली की स्थापना को भी सौ वर्ष पूरे एक दिसंबर को पूरे हुए है। उन्होंने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाएं जाने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि डा. आफताब नोमानी ने सर सय्यद अहमद के जीवन पर विस्तार से रोशनी डालते हुए कहा कि सर सय्यद अहमद जहां बहुत सारी खूबियों के मालिक थे।
वहीं वह एक प्रोगेसिव इंसान भी थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनका बहुत बड़ा कारनामा है। शेरी नशिस्त का आगाज मौ. इदरीस की उमदा नात ए पाक से हुआ। कारी शाकिर रिजवी ने कहा कि किसी तरह से भी गुजरे मगर गुजर जाएं,ये अब के साल, डा. आफताब नोमानी ने कहा ये दौरे वो है इसमें ना मुमकिन है मुमकिन,जब भी मिलो किसी से पहले सलाम करना।
डा. इलियास अंसारी ने है सुन्नत को मुस्तफा की लोगों में आम करना,जब भी मिलो किसी से पहले सलाम करना। हाजी इखलास ने कहा कि मगरिब ने तो थक हार के अपना लिया हिजाब,तहजीब अपनी छोड़ के इतरा रहे है हम।मुकीम अहमद ने कहा कि भला किस तरह चैन आएगा उनको, जो है आब व दाना शिकम देखते है।
इनके अलावा सिराजुददीन, नदीम साहिल ने भी अपना कलाम पेश किया। इस मौके पर मौलाना आदिल, इकबाल अहमद, मुमताज अहमद, वसीम जमाल, फरीद अहमद, मुस्तफा रजा, मौ. अजमल, एमडी खान, अब्दुल अजीज, मौ. आसिफ, मौ. शादाब आदि मौजूद रहे। संचालन कारी शाकिर रिजवी ने किया।

