Sunday, July 21, 2024
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एक भी स्मार्ट सड़क हो तो नाम बताओ…

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  • क्रांतिधरा स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल, लेकिन सड़कों के नाम पर एक भी स्मार्ट सड़क नहीं
  • शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाने के लिए हो रही लगातार कोशिशें

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: क्रांतिधरा को प्रदेश के स्मार्ट शहरों की सूची में अव्वल बनाने की कवायद लगातार जारी है, लेकिन यह इस शहर की बदकिस्मती है कि पूरे शहर में एक भी स्मार्ट सड़क नहीं है। सड़कों पर लगने वाले जाम से जनता परेशान है, सड़कों पर हुए गड्ढे देखकर यह पता करना मुश्किल हो जाता है कि सड़कों पर गड्ढे है या गड्ढों में सड़क। ऐसे में कैसे शहर स्मार्ट बनेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

शहर के अंदरूनी इलाकों की बात की जाए तो भूमिया का पुल से लेकर नूरनगर का इलाका अपनी बदहाल सड़क के लिए जाना जाने लगा है। इस सड़क पर हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़क में कितने गड्ढे हैं कि अगर उनकी संख्या जानने की कोशिश की जाए तो लंबा समय लगेगा। सड़क पर चलने वाले लोगों को हर समय जाम से जूझना पड़ता है। यहां तक की कई बार तो मरीजों को भी निकलने में परेशानी होती है, अतिक्रमण से सड़क की चौड़ाई सिमट गई है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

इसी तरह भूमिया के पुल से ओडियन होते हुए कबाड़ी बाजार तक जाने वाली सड़क की हालत भी जुदा नहीं है। इस सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। जिस कारण यहां से गुजरने वाली जनता को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी तरह के हालात हापुड़ अड्डे से प्रहलाद नगर को जाने वाली सड़क के भी है।

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इस सड़क पर भी गड्ढों की भरमार है, सड़क के बीचों बीच डिवाइडर रखे गए हैं जो इसे और छोटा कर रहे हैं। यहां पर भी हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। यही हाल पुरानी तहसील रोड का भी है। लिसाड़ी गेट वाली सड़क की हालत भी बेहद खराब है, इस सड़क पर गड्ढों की संख्या यह बताने के लिए काफी है कि संबंधित विभाग को इससे कोई सरोकार नहीं है।

जलीकोठी से दिल्ली रोड जाने वाली सड़क पर अतिक्रमण की भरमार है, यहां से निकलना मानों कोई जंग जीतने के बराबर हो। एक बार यहां जाम लग जाए तो फिर वह कब तक खुलेगा इसका कोई अंदाजा नहीं है। हम कह सकते हैं कि शहर को स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल तो किया गया है,

लेकिन इस दौड़ में इसका नंबर अंतिम संख्या के कितना करीब रहता है। इसको लेकर प्रयास होते नजर आ रहे हैं। एक भी स्मार्ट सड़क का न होना साबित करता है कि पांच साल योगी व आठ साल मोदी सरकार के पूरा होने के बाद भी मेरठ कभी स्मार्ट बनेगा शहर बनेगा ऐसा लगता नहीं।

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