Tuesday, June 18, 2024
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स्वस्थ रहना है तो लौटना होगा आयुर्वेद पद्धति पर

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  • अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक आयुर्वेद महासम्मेलन में पहुंचे 300 से अधिक आयुर्वेदाचार्य
  • आयर्वेद महासम्मेलन में देशभर से आये हकीम एवं वैद्यों ने लगाये 54 स्टॉल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय में शनिवार को अखिल भारतीय राष्टÑीय एवं प्रादेशिक आयुर्वेद महासम्मेलन का प्रथम दिन था, जिसका उद्घाटन उप राष्टÑपति जगदीप धनखड़ ने किया। आयुर्वेद महासम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक आयुर्वेदाचार्य, हकीम एवं वैद्यों ने शिरकत की। प्रर्दशनी में आयुर्वेद, यूनानी, फार्मेसी के 54 स्टॉल लगाये गये। महासम्मेलन में पहुंचे लोगों को हकीम वैद्य आयुर्वेदाचार्यों ने जीवन में स्वस्थ रहना है तो देश की परंपरागत आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति पर लौटना होगा। इसके लिए जागरूक किया। आयुर्वेद दवाइयों के लाभ एवं अंग्रेजी दवाइयों से शरीर पर पड़ने वाले प्रतिकुल प्रभाव के बारे में भी जागरूक किया।

इस दौरान लोगों ने स्टॉल से आयुर्वेद की दवाइयां खरीदी। आयुर्वेद पर्व में पहुंचे आयुर्वेदाचार्य एवं हकीम, वैद्यों ने बताया कि जहां उन्हें इस चिकित्सा पद्धति में डिप्लोमा एवं डिग्री सरकार से लेनी पड़ती है। वहीं, दूसरी ओर उन्हें अपने पुरखों से अनुभव पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलता है। जिसका इस आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में यह अनुभव अलग से प्राप्त होता है। इस दौरान स्टॉलों पर यूनानी, आयुर्वेद, फार्मेसी के हकीम एवं वैद्यों ने बताया कि वह आज भी नब्ज देखकर वो मर्ज बता देते हैं, जोकि नई वैज्ञानिक तकनीक से बनी मशीन भी उस मर्ज को नहीं पकड़ पाती।

आयुर्वेद एवं एलोपैथिक दवाइयों के अंतर एवं शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद दवाइयां भले ही धीरे-धीरे बीमार व्यक्ति को स्वस्थ करने में अपना रिजल्ट दिखाती हो, लेकिन आयुर्वेदिक दवाइयां एलोपैथिक की तरह से शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं डालती। मुंबई के नानुभाई, देशाई रोड खेतवाड़ी से धूतपापेश्वर लिमिटिड कंपनी के चेयरमैन संजीत आनंद एवं डा. अनिल कुमार जायसवाल, डा. गौरव, डा. प्रवीण त्यागी ने बताया कि उनकी कंपनी द्राक्षोविन स्पेशल का निर्माण करती है, जोकि अनेको बीमारी को दूर करने में कारगर साबित होता है। सन् 1872 से कंपनी आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रही है, जिसमें द्राक्षोविन साथ डाबर आदि का निर्माण करती है।

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केरल से आये यूनानी, बीयूएमएस हकीम केटी अजमल ने बताया कि हकीम एवं वैद्य बीमार व्यक्ति की नब्ज पकड़कर बीमारी चेक करता है। जबकि नई तकनीक से काफी रुपये खर्च करने के बाद भी डाक्टर बीमारी नहीं पकड़ पाता।
आयुर्वेद के बीएएमएस डा. आरुज ने बताया कि वह अमरोहा से महासम्मेलन में स्टॉल लगाने के लिये आये हैं, जिसमें राहत हरबल के नाम से स्टॉल लगाया है,जिसमें आयुर्वेद चिकित्सा पद्वत्ति से जो प्रोडेक्ट बने हैं, वह शरीर पर बुरा असर नहीं डालते, ज्यादातर ऐलोपेथ हर्बल की जगह, आयुर्वेद हर्बल का इस्तेमाल करना चाहिए।

दिल्ली शहादरा से यूनानी डा. हकीम नदीम एवं नफीस ने बताया कि वह वर्षों से आयुर्वेद युनानी चिकित्सा पद्धति से बीमार व्यक्ति का उपचार करते हैं, जोकि एलोपेथ से बेहतर होता है। सरधना से आयुर्वेद की वेद वरदान कंपनी से अर्पित जैन महासम्मेलन में स्टॉल लगाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि करीब 200 वर्ष पूर्व से उनके यहां पर आयुर्वेद से बीमार व्यक्ति का उपचार किया जाता रहा है। उनकी सात पीढ़ी इसी आयुर्वेद चिकित्सा पद्वत्ति को अपना रहे हैं।

आर्यावर्त वैदिक चिकित्सालय प्रा.लि. से डा. सुनील आर्य डीबीएमए ने बताया कि केवल आयुर्वेद ही नहीं बल्कि पंचगव्य आयुर्वेद ,जोकि गौमाता के पंचगव्य को जनजन तक पहुंचाना उनका लक्ष्य है,पंचगव्य के सेवन से बीमार व्यक्ति जल्द स्वस्थ हो जाता है। जिसमें हृदय रोग, गुर्दा रोग, यकृत रोग, लकवा, मस्तिष्क, स्त्री एवं पुरुष यौन रोग, त्वचा रोग, नशे को छुड़ाने में पंच गव्य चिकित्सा बेहतर कारगर साबित होती है। भारतीय वैदिक चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से उपरोक्त सभी समस्याओं की चिकित्सा सेवा उनकी वैदिक चिकित्सालय प्रा.लि. के माध्यम से की जा रही है।

महासम्मेलन में आयुर्वेदा, पैचुरोपैथी, पंचकर्मा गेड हॉस्पिटल हेलिंग के द्वारा भी स्टॉल लगाया गया। जिसमें डा. यामिनी, डा. अक्षय अग्रवाल, डा. शिवम ने बताया कि किडनीख् वर्षों पुरानी शुगर, बीपी आदि की जो समस्या बनती है। गंभीर से गंभीर बीमारी का उपचार आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम उनके यहां किया जाता है। महासम्मेलन में 300 से अधिक आयुर्वेदाचार्य, हकीम एवं वैद्य जुडेÞ और उन्होंने आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति को जीवन में अपनाने एवं एलोपैथिक दवाइयों को छोड़ने की जानकारी स्टॉल पर आये लोगों को दी।

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