Sunday, July 21, 2024
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47 तालाबों पर अवैध कब्जा, विभाग ने साधी चुप्पी

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  • प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक के आदेशों की उड़ रही धज्जियां,
  • प्रशासनिक अधिकारियों तक से हो चुकी है शिकायत, कोई कार्रवाई नहीं
  • तालाबों की दो लाख गज भूमि पर हो चुका है कब्जा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक ऐसा विभाग जिसके लिए प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक के आदेश कोई मायने नहीं रखते। नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 52 तालाबों में से 47 तालाबों पर हो चुका है अवैध कब्जा। इसकी शिकायत सामाजिक संगठन सजग प्रहरी द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों तक से की जा चुकी है, लेकिन विभाग ने इन तालाबों को कब्जा मुक्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।

सामाजिक संगठन सजग प्रहरी द्वारा 17 जून को नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा से लिखित शिकायत की थी। जिसमें कहा गया है कि संगठन पिछले चार सालों से निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 52 तालाबों को जल संरक्षण के लिए अभियान चला रहा है। जिसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद केवल पांच तालाबों की साफ- सफाई व तलीझाड़ सफाई कराई गई हैं। जबकि बाकी के 47 तालाबों पर नगर निगम के पटावारियों द्वारा अवैध कब्जा करा दिया गया है। जिसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है।

कब्जा हुए तालाबों की क्षेत्रवार सूची

शोभापुर क्षेत्र में खसरा संख्या 121/3 जिसका क्षेत्रफल 1640 मीटर, वर्तमान में यहां आबाद मौजूद है, खसरा संख्या 124/2 जिसका क्षेत्रफल 380 वर्ग मीटर है, वर्तमान में यहां पर भी आबादी मौजूद है, खसरा संख्या 276/3 का क्षेत्रफल 1640 वर्ग मीटर है। जिस पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 277/3 जिसका क्षेत्रफल 1010 वर्ग मीटर है। इसपर भी कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 542/2 जिसका क्षेत्रफल 1640 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 551 जिसका क्षेत्रफल 630 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है,

खसरा संख्या 553 क्षेत्रफल 3920 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 555 जिसका क्षेत्रफल 3160 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 556/2 जिसका क्षेत्रफल 2400 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 558/1 जिसका क्षेत्रफल 2400 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 784 जिसका क्षेत्रफल 1770 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 786 जिसका क्षेत्रफल 1010 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 787 जिसका क्षेत्रफल 1140 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है,

खसरा संख्या 788 जिसका क्षेत्रफल 1260 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है, खसरा संख्या 628/3 जिसका क्षेत्रफल 2660 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है। इसी तरह परतापुर बराल क्षेत्र के खसरा संख्या 57/1 जिसका क्षेत्रफल 2650 है पर कब्जा हो चुका है। कुण्डा क्षेत्र के खसरा संख्या 91 जिसका क्षेत्रफल 2500 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है। अच्छरोंडा क्षेत्र के खसरा संख्या 756 जिसका क्षेत्रफल 1770 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है, इसी क्षेत्र के खसरा संख्या 476 जिसका क्षेत्रफल 1260 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है।

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मेवला क्षेत्र के खसरा संख्या 77 जिसका क्षेत्रफल 1260 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है। रोशनपुर डोरली क्षेत्र के खसरा संख्या 360 जिसका क्षेत्रफल 2020 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। इसी क्षेत्र के खसरा संख्या 361 जिसका क्षेत्रफल 1520 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है। जटौली क्षेत्र के खसरा संख्या 1543 जिसका क्षेत्रफल 15310 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। इसी क्षेत्र के खसरा संख्या 1546 जिसका क्षेत्रफल 2270 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। जाहिदपुर क्षेत्र के खसरा संख्या 260 जिसका क्षेत्रफल 7210 वर्ग मीटर है पर कब्जा हो चुका है।

इसी क्षेत्र के खसरा संख्या 405 जिसका क्षेत्रफल 1010 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। काजीपुर क्षेत्र के खसरा संख्या 204 जिसका क्षेत्रफल 29210 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। इसी क्षेत्र के खसरा संख्या 191 जिसका क्षेत्रफल 4040 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। अब्दुल्लापुर क्षेत्र के खसरा संख्या 490 जिसका क्षेत्रफल 3350 वर्ग मीटर है इसकी 2500 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। इसी क्षेत्र के खसरा संख्या 935 जिसका क्षेत्रफल 8340 वर्ग मीटर श्रेणी 4 व जोहड़ है पर 3000 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है।

इसी क्षेत्र के खसरा संख्या 276क जिसके 130 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर कब्जा हो चुका है। खसरा संख्या 330 जिसका क्षेत्रफल 4300 है इसकी 2000 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। खसरा संख्या 444 जिसका क्षेत्रफल 3160 पर कब्जा हो चुका है। खसरा संख्या 684 जिसका क्षेत्रफल 1770 है इसकी 1000 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा हो चुका है। औरंगाशाहपुर डिग्गी के खसरा संख्या 232 जिसका क्षेत्रफल 4050 वर्ग मीटर में से 2000 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। खसरा संख्या 237 जिसका क्षेत्रफल 1260 वर्ग मीटर जमीन विश्वविद्यालय में आ चुकी है।

सरायकाजी क्षेत्र के खसरा संख्या 133 जिसका क्षेत्रफल 2280 वर्ग मीटर है इसकी 1000 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा हो चुका है। दतावली-गेसूपुर क्षेत्र के खसरा संख्या 891 जिसका क्षेत्रफल 1260 पर हरीजन बस्ती है। खसरा संख्या 985 जिसका क्षेत्रफल 7590 वर्ग मीटर पर आबादी है। घोसीपुर क्षेत्र के खसरा संख्या 452 जिसका क्षेत्रफल 1640 वर्ग मीटर पर आबादी बस चुकी है। कस्बा मेरठ के खसरा संख्या 6261 जिसका क्षेत्रफल 3790 श्रेणी 3 जोहड़ पर आबादी बस चुकी है। फतेउल्लापुर क्षेत्र के खसरा संख्या 109 जिसका क्षेत्रफल 510 वर्ग मीटर पर कब्जा हो गया है।

नंगला शेरखा उर्फ जैनपुर के खसरा संख्या 471 जिसका क्षेत्रफल 760 वर्ग मीटर पर कब्जा हो चुका है। इसी तरह कस्बा मेरठ के भी 9 खसरों पर कब्जा हो चुका है। सजग प्रहरी संस्था के प्रांतीयाध्यक्ष गुरुचरण बिल्टोरिया का कहना है कि उनकी संस्था तालाब संरक्षित करो को लेकर 2017 से अभियान चला रही है। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से शिकायत होने के बाद शासन-प्रशासन तक से निगम के लिए तालाबों को कब्जा मुक्त करने के आदेश हो चुके हैं, लेकिन निगम ने इस प्रकरण को लेकर चुप्पी साध रखी है। आज तक भी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।

निगम की सीमा में तालाबों पर बोले-अपर नगर आयुक्त

नगर निगम की सीमा में आने वाले तालाबों पर हुए अतिक्रमण को लेकर अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने कहा कि जो शिकायत आई है। उसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। संपत्ति विभाग इस मामले को देखता है, वहीं से जानकारी करते हुए कुछ कहा जा सकता है। प्रकरण को लेकर नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा से कई बार उनके सीयूजी नंबर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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