- एक सप्ताह के भीतर साक्ष्यों के साथ प्राचार्य को रिपोर्ट देगी जांच कमेटी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एलएलआरएम मेडिकल की आउटसोर्स कंपनी पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी जांच कर सप्ताह भर में प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता को रिपोर्ट सौंपेगी। दरअसल, संविदा पर काम करने वाली एक नर्स व सिक्योरिटी कर्मचारी ने डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में आउटसोर्स कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसके बाद प्राचार्य ने जांच के आदेश दिए हैं।
मेडिकल के मीडिया प्रभारी डा. वीडी पांडेय ने बताया कि जीत सिक्युरिटी एंड एचआर सर्विसेज, आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा की गई न्युक्तियों एवं कुछ कर्मचारियों के कथित निष्कासन की जांच के लिए प्रधानाचार्य मेडिकल कालेज मेरठ द्वारा प्रमुख अधीक्षक सरदार वल्लभभाई पटेल चिकित्सालय मेरठ की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया गया है जांच समिति एक सप्ताह के भीतर अपनी जांच आख्या प्रधानाचार्य को प्रेषित करेगी।
प्रमुख अधीक्षक सरदार वल्लभभाई पटेल चिकित्सालय द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए पूजा सुपरवाइजर जीत सिक्योरिटी एंड एचआर सर्विसेज कंपनी द्वारा की गई न्युक्तियों एवं कुछ कर्मचारियों के कथित निष्कासन से सम्बंधित समस्त अभिलेख एवं पत्रावली आदि प्रमुख अधीक्षक एवं जांच समिति के समक्ष दो कार्य दिवस के भीतर प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगी। साथ ही साथ सोनिया देवी, स्टाफ नर्स, जीत सिक्योरिटी एंड एचआर सर्विसेज एवं कविता, महीला गार्ड को भी निर्देशित किया गया है कि जांच समिति के समक्ष दो कार्य दिवस के भीतर उपस्थित हो कर अपना पक्ष रखना सुनिश्चित करेंगी।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में संविदा पर कार्यरत रही एक नर्स और एक महिला सिक्योरिटी गार्ड ने गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की है। आरोप है मेडिकल में भ्रष्टाचार चल रहा है। नौकरी पर रखने के लिए पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने एक निजी कंपनी की सिक्योरिटी इंचार्ज और मेडिकल के एक अधिकारी पर भी पैसे लेने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह एक निजी कंपनी के जरिए संविदा पर मेडिकल में नौकरी पर कार्यरत थीं।
कुछ दिन पहले उन्हें चोरी का झूठा आरोप लगाकर नौकरी से निकाल दिया गया। उन पर आरोप था मेडिकल का इंजेक्शन मेडिकल के बाहर किसी को दिया है। उन्होंने खुद को बेकसूर बताते हुए विधायक, प्राचार्य और अन्य अधिकारियों से मदद मांगी, मगर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। अब मेडिकल में वापस नौकरी पर रखने के लिए कंपनी की महिला सिक्योरिटी इंचार्ज और मेडिकल के एक अधिकारी उनसे एक से डेढ़ लाख की मांग की जा रही है।
इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस संबंध में प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता का कहना है कि कंपनी ने इन दोनों को करीब 20 दिन पहले चोरी के आरोप में नौकरी से निकाला है। ये संविदा पर थीं। स्टाफ नर्स नहीं हैं। इससे उनका या मेडिकल प्रबंधन का कोई लेना-देना नहीं है। यह लड़ाई इनकी और कंपनी अधिकारियों के बीच की है। मेडिकल प्रबंधन और उन्हें बिना वजह घसीटा जा रहा है।

