- दिन-रात जांच में जुटी पुलिस और फॉरेंसिक टीम
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: विस्फोट प्रकरण में पुलिस अभी तक अंधेरे में तीर चला रही है। पुलिस को अभी तक ऐसा कुछ नहीं मिल पा रहा है, जिसके आधार पर पुष्टि हो सके कि वास्तव में हुआ क्या है। फॉरेंसिक टीम भी दिन-रात मलबे की खाक छानने का काम कर रही है। हकीकत का पता लगाया जा सके। शनिवार को भी पुलिस व फॉरेंसिक टीम दिनभर जांच में लगी रही।
शुक्रवार की रात फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने आसिम के मकान की जांच की। इस दौरान टीम ने यहां से कुछ सामान भी जुटाया। जो जांच के लिए अपने साथ ले गई। शनिवार को भी दिन निकलते ही टीम यहां पहुंच गई। पुलिस के साथ मिलकर टीम घंटों जांच में लगी रही।
क्योंकि पुलिस सिलेंडर फटने की बात कही रही है तो, सिलेंडर के टुकड़े भी बरामद होना जरूरी है। कई दिन से चल रही जांच के बाद भी पुलिस को अभी तक ऐसा कुछ नहीं मिल पाया है, जिसे ये पता चल सके कि वास्तव में हुआ क्या है। शनिवार को पुलिस दिनभर जांच में लगी रही। साथ ही लोगों से भी पूछताछ करती रही। जांच के चलते मलबा अभी तक जस का तस फैला हुआ है। इस संबंध में सीओ आरपी शाही का कहना है कि मामले की जांच की जारी है।
जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद
सरधना में हुए विस्फोट के तीन दिन बाद भी घटनास्थल के आसपास जीवन सामान्य नहीं हो सका है। क्योंकि रास्तों से लेकर मकानों तक में चारों ओर मलबा ही मलबा फैला हुआ है। शनिवार को लोग जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में लगे नजर आए। आसपास मकानों में लोग मलबा समेटते देखे गए। उनके चेहरे पर यही नजर आ रहा था कि जो कुछ बचा है, उसको तो सुरक्षित कर ही लिया जाए।
विस्फोट ने दो लोगों की जान ले ली और आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा आठ मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। साथ ही दर्जनों मकानों में दरारें पड़ गई। घटना के तीन दिन बाद भी लोग सहमे हुए हैं। घटनास्थल का नजारा आज भी नींद उड़ाने वाला है।
चारों ओर मलबे के ढेर लगे हुए हैं। मकानों में मलबा भरा हुआ और छातों पर भी मलबा फैला पड़ा है। तीन दिन बाद भी जीवन पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है। शनिवार को लोग जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश में लगे रहे। पीड़ित परिवार मकानों में फैले मलबे को हटाते नजर आए। ताकि गुजर बसर किया जा सके। कम से कम उसे तो सुरक्षित कर लिया जाए, जो हादसे के बाद मचा है। प्रशासन की ओर से भी लोगों को कोई मदद मिलती नजर नहीं आ रही है।

