Saturday, June 15, 2024
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फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति की जांच जोरों पर

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  • विवि ने सभी कॉलेजों को जारी किए निर्देश, अनुमोदन में गड़बड़ी करने वालों पर गिर सकती है गाज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विवि के संबद्धता विभाग में चल रहा खेल सहारनपुर के एक कॉलेज में एक शिक्षक के नौकरी छोड़ने के बाद भी फर्जी एप्रूवल बनवा उसे नौकरी पर दिखाने का मामला सामने आने के बाद खुल गया है। इतना ही नहीं ऐसी गड़बड़ी मेरठ और सहारनपुर के कई और कॉलेजों में भी चल रही हैं, जिसकी जांच में विवि प्रशासन जुट गया है।

यदि अब किसी कॉलेज ने शिक्षक की नियुक्ति के बारे में गलत जानकारी दी तो उसकी संबद्धता खत्म कर दी जाएगी। विवि की ओर इसकी जानकारी सभी कॉलेजों को दे दी गई है और ऐसे कॉलेजों की जांच की जा रही हैं, जहां फर्जीवाड़ा चल रहा है। विवि सूत्रों की माने तो जल्द ही कुछ और कॉलेजों के नाम भी सामने आ सकते है जहां शिक्षकों की नियुक्ति की गलत जानकारी दी गई है।

बता दें कि मेरठ और सहारनपुर मंडल में करीब एक हजार से अधिक कॉलेज है। सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति और अनुमोदन में वर्षो से गड़बड़झाला चल रहा है। एक शिक्षक कई कॉलेजों में नियुक्त है। सत्यापन के दौरान भी संस्थान सेटिंग कर लेते है। सबसे बड़ी बात यह है कि कॉलेजों के खेल में विवि का संबद्धता विभाग पूरा सहयोग दे रहा है।

सहारनपुर कॉलेज वाले मामले में शिक्षक की नियुक्ति का एप्रूवल संबद्धता विभाग से ही बनवाया गया है। ऐसे में कॉलेजों की जांच के साथ ही संबद्धता विभाग के कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है। क्योंकि इस मामले में विवि स्तर पर जांच की जा रही है। संबद्धता विभाग में तैनात कर्मचारी गलत तरह से अनुमोदन के शपथ पत्र फाइलों से बदल लेते हैं।

विवि रजिस्टार धीरेंद्र कुमार का कहना है कि इस मामले में विवि स्तर पर जांच की जा रही है। शिक्षकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा करने वाले कॉलेजों पर गाज गिरना तय है। जिसके बाद विवि के संबद्धता विभाग में अफरा-तफरी मच गई और विवि स्तर कार्रवाई भी शुरु कर दी गई है।

सूत्रों की माने तो मंगलवार को संबद्धता विभाग के कई कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। दून कॉलेज आॅॅफ एजुकेशन सहारनपुर ने एक शिक्षक को मात्र 10 माह 16 दिन की नौकरी दे और उसके नाम पर सात साल छात्रों को पढ़वाते हुए डिग्री दिलवा दी है।

2018 में शिक्षक एप्रूवल में विवि के पैनल ने कॉलेज के फर्जीवाड़े पर मुहर लगाते हुए इस्तीफा दे चुके शिक्षक को ही नियुक्त कर दिया। पूरे मामले में कॉलेज से लेकर विवि के पैनल निरीक्षण मंडल के विषय विशेषज्ञों को गाज गिरने का डर सताने लगा है।

पैनल की जिम्मेदारी शिक्षक के प्रमाण पत्रों की जांच सहित उसकी वास्तविकता जांचने की होती है। मगर इस मामले से साफ हो गया है कि पैनल ने आंख बंद कर एप्रूवल दे दिया था। इस मामले का फर्जीवाड़ा सामने आने पर कई और कॉलेजों के राज खुलकर भी सामने आ सकते है।

क्योंकि, दून कॉलेज में कागजों पर फर्जी ढंग से शिक्षक एप्रूवल में केवल अनुज अकेला नहीं है। विवि से संबंधित मेरठ व सहारनपुर मंडल के कई और कॉलेजों में ऐसे हजारों शिक्षकों के इस्तीफा देने के बाद उनके नाम पर फर्जी एप्रूवल बनवाने के मामले सामने आ सकते हैं।

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