Monday, September 20, 2021
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Homeसंवादईर्ष्या का भाव

ईर्ष्या का भाव

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यह उन दिनों की बात है, जब प्रख्यात कलाकार माइकल एंजेलो की पूरे यूरोप में चर्चा हो रही थी। उसकी लोकप्रियता देखकर एक चित्रकार उससे ईर्ष्या करता था। सोचता था, लोग मेरा गुणगान क्यों नहीं करते? क्या मैं खराब चित्रकार हूं? क्यों न मैं एक ऐसा चित्र बनाऊं, जिसे देखकर लोग माइकल एंजेलो को भूल जाएं और मैं ही उनकी जुबान पर चढ़ जाऊं। उसने एक स्त्री का चित्र बनाना शुरू किया। जब चित्र पूरा हो गया तो उसकी सुंदरता का परीक्षण करने चित्र को दूर से देखने लगा।

उसमें उसे कुछ कमी लगी। लेकिन कमी क्या थी, समझ में नहीं आई। संयोग से उसी समय माइकल एंजेलो उस तरफ से जा रहा था। उसकी नजर चित्र पर पड़ी। उसे चित्र बहुत सुंदर लगा। पर उसे उसकी कमी समझ में आ गई। उसने उस चित्रकार से कहा, ‘भाई, तुम्हारा चित्र तो बहुत सुंदर है, पर इसमें जो कमी रह गई है, वह आंखों में खटक रही है।’ चित्रकार ने माइकल एंजेलो को कभी देखा नहीं था। उसने सोचा, यह कोई कला कला प्रेमी होगा। चित्रकार ने एंजेलो से कहा, ‘कमी तो मुझे भी लग रही है।’ एंजेलो ने कहा, ‘क्या आप अपनी कूची देंगे? मैं कोशिश करता हूं।’ कूची मिलते ही एंजेलो ने चित्र में बनी दोनों आंखों में काली बिंदियां बना दीं।

बिंदियों का लगना था कि चित्र सजीव हो बोलता नजर आने लगा। चित्रकार ने एंजेलो से कहा, ‘धन्य है! तुमने सोने में सुगंध का काम कर दिया। मेरे चित्र की शोभा बढ़ाने वाले तुम हो कौन? क्या नाम है?’ एंजेलो ने कहा, ‘मेरा नाम माइकल एंजेलो है।’ चित्रकार के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। वह बोला, ‘भाई, क्षमा करें। आपकी उन्नति देख मैं जलता था। आपको हराने के लिए ही मैंने यह चित्र बनाया था। लेकिन आज आपकी कला-प्रवीणता और सज्जनता देख कर मैं शर्मिंदा अनुभव कर रहा हूं।’ माइकल एंजेलो ने उसे अपना दोस्त बना लिया।


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