Saturday, June 22, 2024
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मारपीट प्रकरण में जूनियर डाक्टर हुए पेश

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  • नहीं पहुंचे शिकायत करने वाले दिन भर इंतजार करती रही जांच कमेटी
  • मेडिकल इमरजेंसी प्रकरण पर डिप्टी सीएम सख्त, कार्रवाई की रिपोर्ट तलब

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल इमरजेंसी में तीन दिन पहले हुई मारपीट के प्रकरण में बुधवार को जांच कमेटी के सामने कथित आरोपी डाक्टर पेश हुए। हालांकि पीड़ित पक्ष पेश नहीं हुआ। मामले की जांच के लिए प्राचार्य द्वारा डा. ज्ञानेश्वर टॉक की अध्यक्षता में बनायी गयी जांच कमेटी पीड़ित पक्ष का दिन भर इंतजार करती रही। वहीं, दूसरी ओर सूबे के डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री एलएलआरएम मेडिकल में हुई मारपीट की घटना को लेकर गंभीर हैं।

उन्होंने पूरे मामले पर मेडिकल प्राचार्य से बात की है और कहा है कि जो भी कार्रवाई की जाए उससे उन्हें अवगत भी कराया जाए। इस मामले में अभी पुलिस की जांच दो कदम आगे चार कदम पीछे नजर आती है। इमरजेंसी मारपीट प्रकरण में वीडियो में जो नजर आ रहे निलंबित किए गए जूनियर डाक्टर बुधवार को डा. ज्ञानेश्वर टॉक की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी के सामने पेश हुए।

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इस जांच कमेटी में डा. ज्ञानेश्वर टाक के अलावा ईएमडी डा. हर्षवर्धन व वैभव तिवारी भी शामिल हैं। सूत्रों ने जानकारी दी कि आरोपी बताए जा रहे डाक्टरों ने खुद को पूरी तरह से बेकसूर बताया। बल्कि उनका कहना था कि अभद्रता को मरीज को लेकर आए लोगों ने उनके साथ की। उनको मोबाइल छीन कर जमीन पर पटक दिया गया। पहले गाली-गलौज मरीज के तीमारदारों ने शुरू की।

पीड़ित पक्ष का करते रहे इंतजार

मारपीट प्रकरण को लेकर बनायी गयी जांच कमेटी दिन भर पीड़ित पक्ष का इंतजार करती रही, लेकिन पीड़ित बताया जा रहे लोग मेडिकल पहुंचकर जांच कमेटी के सामने पेश नहीं हुए। जांच कमेटी के अध्यक्ष डा. ज्ञानेश्वर टाक ने बताया कि पीड़ितों का पक्ष जानने के लिए कल गुरूवार को भी उनका इंतजार किया जाएगा। उनकी बात सुनने के उपरांत जो भी निष्कर्ष निकलेगा उससे प्राचार्य को अवगत करा दिया जाएगा।

मिस अंडर स्टेंडिंग सारे फसाद की जड़

इमरजेंसी में मारपीट प्रकरण के पीछे सारे फसद की जड़ मिस अंडर स्टेंडिंग और डयूटी पर मौजूद जूनियर डाक्टरों का अनमैच्योर्ड होना माना जा रहा है। अपने सीनियरों के व्यवहार से यदि थोड़ी सीख लेते हुए जूनियर डाक्टरों ने संयम से काम लिया होता तो न तो वो निलंबित होते न ही पेशी का सामना करना पड़ता। सूत्रों ने जानकारी दी कि दरअसल उस दिन हुआ यह कि जब जख्मी बच्चे को लेकर तीमारदार मेडिकल इमरजेंसी में पहुंचे और उसका इलाज शुरू किया गया तो वहां मौजूद जेआर ने बच्चे के जख्म का फोटो खींचा।

दरअसल, यह इसलिए जरूरी था ताकि बार-बार पट्Þटी ना खोलनी पडेÞ। जेआर यह सारी बातें बच्चे के जख्मी होने से बुरी से डरे व घबराए तीमारदारों को समझाने में पूरी तरह से नाकाम रहे। तीमारदार समझते रहे कि इलाज के बजाय बस बच्चे के फोटो ही खींचे जा रहे हैं। यहां से कहासुनी शुरू हुई और उसके बाद जो कुछ हुआ वह सब वीडियो में कैद हो गया। सूत्रों ने बताया है कि जांच कमेटी ने इसको लेकर जेआर को नसीहत भी दी है।

स्वास्थ्य मंत्री की कॉल

मेडिकल इमरजेंसी में मारपीट का वीडियो वायरल व सीएम को ट्वीट करने के बाद प्रदेश के डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री डा. ब्रिजेश पाठक का मेडिकल के प्राचार्य पर काल आया। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली। इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर पूरे मामले से अवगत कराए जाने की भी बात कही। वहीं, दूसरी ओर मीडिया प्रभारी डा. वीडी पांडेय ने बताया कि मेडिकल प्रशासन पूरी घटना को लेकर बेहद गंभीर है। जो भी कसूरवार होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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