Sunday, September 19, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutशहीद मयंक के अंतिम सफर में भीगी हर आंख

शहीद मयंक के अंतिम सफर में भीगी हर आंख

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  • शहीद के अंतिम दर्शनों को उमड़ी भीड़, सूरजकुंड तक निकली अंतिम यात्रा
  • हिंडन एयरबेस से कंकरखेड़ा पैतृक आवास पर पहुंचा पार्थिव शरीर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बस एक आखिरी गुजारिश है, यही मेरी ख्वाहिश है, मेरी मौत का मातम न करना, यही मैंने शहादत चाही है, मैं जीता हूं मरने के लिये क्योंकि मेरा नाम सिपाही है…किसी कवि ने भी क्या खूब लिखा है मेरा नाम सिपाही है। ये लाइनें शहीद मेजर मयंक विश्नोई पर सटीक बैठती है।

वह अक्सर कहा करते थे कि मैं जब आऊंगा तो तिरंगे में लिपटकर आऊंगा। मयंक बिश्नोई का पार्थिव शरीर रविवार को कंकरखेड़ा स्थित उनके पैतृक आवास पर तिरंगे में लिपटकर पहुंचा। यहां राजपूत रेजीमेंट और जाट रेजीमेंट ने सैन्य नियमों के साथ उनके पार्थिव शरीर को आवास पर कुछ देर रखा।

जहां उनके परिजनों को उनके अंतिम दर्शन कराए गये। उसके बाद सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर राज्यमंत्री, सेना अधिकारी, जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

गत 27 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के शोपियां में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में घायल हुए कंकरखेड़ा निवासी मेजर मयंक विश्नोई शुक्रवार देर रात को ऊधमसिंह नगर स्थित सैन्य अस्पताल में शहीद हो गये थे। शनिवार को यह सूचना उनके परिवार को दी गई थी।

जिसके बाद कंकरखेड़ा उनके निवास पर लोगों का जमावड़ा लग गया था। रविवार को शहीद मेजर मयंक विश्नोई का पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ कंकरखेड़ा शिवलोक कालोनी स्थित उनके आवास पर पहुंचा। गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पर रविवार सुबह को ही उनका पार्थिव शरीर पहुंच चुका था।

वहां से 2 बजकर 50 मिनट पर निकलने के बाद 4 बजे करीब उनके आवास पर उनका पार्थिव शरीर पहुंचा। यहां कुछ ही देर उनके परिजनों को मयंक के अंतिम दर्शन कराये गये। उनके पिता रिटायर्ड सूबेदार विरेंद्र कुमार, मां मधु, पत्नी स्वाति, बहन तुन, अनु समेत सभी परिजनों ने उनके अंतिम दर्शन किये।

राजपूत रजीमेंट, जाट रेजीमेंट पहुंची

शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर राजपूत रेजीमेंट पहुंची। यहां जाट रेजीमेंट और राजपूत रेजीमेंट ने सारी सैन्य कार्रवाई पूरी कराई। इस मौके पर एनसीसी कमांड, एनएसजी के कमांडो और सेना के अन्य जवान भी मौजूद रहे। शहीद के दर्शनों को कंकरखेड़ा में भीड़ उमड़ पड़ी। यहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची और चारों और भारत माता की जय और मेजर मयंक अमर रहे के नारे लगते रहे। आसपास के लोगों के शहीद मेजर मयंक विश्नोई को फूल बरसाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

शहीद के आवास पर उनके पार्थिव शरीर के पहुंचने से पहले ही लोगों का उनके आवास पर आना शुरू हो गया था। यहां राज्य सरकार से मंत्री कपिल देव अग्रवाल, सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक, कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, नीरज मित्तल, अंकुर गोयल समेत तमाम जनप्रतिनिधि उनके आवास पर पहुंचे और उनके पिता विरेन्द्र और मां मधु से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। इस मौके पर अन्य व्यापारी नेता व समाजसेवी भी उनके आवास पर पहुंचे और उनके परिजनों से मिले।

स्कूल से ही आर्मी में जाने का था मयंक का सपना

मयंक के स्कूली दोस्त नरेन्द्र ने बताया कि वह इस समय एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। वह दोनों इंटर तक साथ ही थे। इंटर वर्ष 2010 में आर्मी स्कूल से की थी। मयंक का शुरू से ही आर्मी में जाने का सपना था। यह देश के प्रति लगाव उनके पिता से ही उन्हें प्राप्त हुआ था। पिता विरेन्द्र भी आर्मी में सूबेदार थे। देश के प्रति मर मिटने का जुनून था। 2010 में इंटर करने के बाद उसका चयन आईएमए में हो गया था।

उसके बाद 2013 में आईएमए पासआउट किया था। आर्मी में नौकरी करते हुए मयंक को सात साल से अधिक हो गये थे। शुरू से ही आर्मी में जाने और कुछ करने का उसका सपना पूरा हुआ। सभी दोस्त उसे याद करेंगे। उनके दोस्तों ने भी उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। परिजनों ने बताया कि मयंक की शादी को भी तीन वर्ष हो गये थे। मयंक ने वर्ष 2018 में हिमाचल के शिमला निवासी स्वाति से शादी की थी। दोनों एक-दूसरे को शादी से पहले से ही जानते थे।

शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़

शहीद के अंतिम दर्शन उनके परिजनों को कराने के बाद सैन्य गाड़ी में उनका पार्थिव शरीर रखकर उनकी अंतिक यात्रा कंकरखेड़ा से निकली। इस दौरान कंकरखेड़ा से लेकर सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट तक हजारों की संख्या में लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। सैन्य गाड़ी में ही उनके परिजनों को बैठाकर सूरजकुंड तक लाया गया। इस दौरान लोग हाथों में तिरंगा लिये और वंदे मातरम, भारत माता की जय, मेजर मयंक विश्नोई अमर रहे के नारे लगाते हुए सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट तक पहुंचे।

सूरजकुंड श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

शहीद मेजर मयंक विश्नोई का पार्थिव शरीर करीब 5 बजकर 30 मिनट पर सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर पहुंचा। यहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और सेना की ओर से सलामी दी गई। इसके उपरांत उनके पिता ने उन्हें मुखाग्नि दी। मयंक का पार्थिव शरीर सूरजकुंड पहुंचते ही सबसे पहले राजपूत रेजीमेंट के सेना अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

यहां राजपूत रेजीमेंट से सीडीएस सांभियाल, पीएस अटवाल आदि सेना अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही एनएसजी कमांडो राजेश, विवेक आदि ने भी श्रद्धांजलि दी। जाट रेजीमेंट की ओर से भी श्रद्धांजलि दी गई। इसके उपरांत सेना की ओर से शहीद को सलामी दी गई। इसके बाद सैनिक कल्याण बोर्ड, स्वतंत्रता सेनानी परिषद, मंत्री कपिल देव अग्रवाल, सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, सपा जिलाध्यक्ष चौधरी राजपाल सिंह, व्यापारी नेता अंकुर गोयल, डीएम के. बालाजी, एसएसपी प्रभाकर चौधरी, एसपी सिटी विनीत भटनागर समेत तमाम पुलिस अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

सैन्य सलामी दिये जाने के साथ ही मयंक बिश्नोई की पत्नी स्वाति ने भी उन्हें सैल्यूट किया और कहा कि उन्होंने हमेश देश को पहले और फिर घरवालों को रखा। कहा करते थे कि मैं एक दिन तिरंगे में लिपटकर आउंगा और वो बात पूरी हो गई। इसके बाद उनके पिता विरेन्द्र ने अंतिक क्रिया पूरी करने के बाद उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर तमाम सैन्य अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

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