Wednesday, February 21, 2024
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मेडिकल का सेप्टिक वार्ड खुद बीमार

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  • नर्सिंग स्टॉफ तक नदारद, सिजेरियन डिलीवरी के बाद पेट में होने वाले इंफेक्शन का होता है इलाज
  • बदहाल है सेप्टिक वार्ड, मरीज को देखने नहीं आते डाक्टर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुलभ व अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिले इसके लिए सरकार ने हर जिले में अच्छे स्वास्थ्य केन्द्र चला रखे है। जबकि मेरठ की बात की जाए तो यहां जिला अस्पताल के साथ एलएलआरएम कॉलेज है जिसमें सभी तरह की आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावें किये जाते है।

मेडिकल कॉलेज में उन मरीजों का भी इलाज होता है जिन्हें जिला अस्पताल से सुविधाओं के आभाव में मेडिकल के लिए रैफर किया जाता है। लेकिन मेडिकल का सेप्टिक वार्ड खुद बीमार है, यहां न साफ सफाई की व्यवस्था है न ही स्टॉफ नजर आता है।

हाल-ए-सेप्टिक वार्ड

ग्राउंड फ्लोर पर गायनिक वार्ड के पास स्थित सेप्टिक वार्ड में कुल 17 बैड है लेकिन इन बैडों की हालत बेहर खस्ताहाल है। एक दो बैडों को छोड़कर किसी पर भी चादरें तक नहीं थी। गंदगी का आलम यह कि सांस लेना भी दूभर हो जाए। इस वार्ड में उन महिलाओं को भर्ती किया जाता है जिन्हें सिजिरियन डिलीवरी के बाद पेट में इंफैक्शन हो जाता है। लेकिन यहां नर्सिंग स्टॉफ तक मौजदू नहीं था।

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एक महिला अपने पति व बच्चे के साथ पेट में रसौली होने का इलाज करानें बैड पर दर्द से कराह रही थी लेकिन उसे देखने वाला कोई नहीं था। महिला के पति ने बताया वह सुबह 8 बजे से यहां भर्ती है मगर 12 बजे तक भी कोई डाक्टर या नर्स उसे देखने नहीं पहुंची। खिड़कियों पर पर्दे तक नहीं है, ऐसे में मरीज के संक्रमित होने का खतरा लगातार बना रहता है।

आक्सीजन लाइन भी बंद

किसी भी मरीज की स्थिति गंभीर होने पर यदि उसे आॅक्सीजन की जरूरत पड़े तो यहां इसकी सुविधा नहीं है। बैडों के पास लगे आॅक्सीजन पाइप केवल दिखाने के लिए लगे है। फर्नीचर के नाम पर मौजूद अन्य सामान भी जर्जर हालत में है।

बिना सुविधाओं के कैसे होगा इलाज

सेप्टिक वार्ड बेहद संवेदनशील होता है, इसमें हर तरह की सुविधा होनी चाहिए लेकिन मेडिकल के सेप्टिक वार्ड में साफ-सफाई से लेकर अन्य सुविधाओं का भी आभाव नजर आया। बैडों पर बिछे गद्दे फटी हालत में है और अच्छी रोशनी का भी आभाव नजर आया। वहीं मरीजों की देखभाल के लिए तैनात डाक्टर व नर्सिंग स्टॉफ का भी कुछ पता नहीं था। ऐसे में अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करने वाला मेडिकल प्रशासन सवालों के घेरे में नजर आया।

जिस वार्ड पर सेप्टिक वार्ड लिखा है वहां अब उन मरीजों को रखा जाता है जिन्हें अन्य बीमारियां है। जबकि इस वार्ड की नई बिल्डिंग तैयार हो रही है। इस वार्ड में मरीजों के तीमारदार खुद ही बैडशीट फाड़ देते हैं। ऐसे में यहां केवल तभी बैड तैयार किया जाता है जब मरीज भर्ती होता है। जो परिवार कह रहा है कि सुबह से कोई देखने नहीं आया तो यह गलत है। गायनिक वार्ड में 24 घंटे स्टॉफ की तैनाती रहती है। -डा. रचना चौधरी, एचओडी, गायनिक वार्ड।

मेडिकल में कोई भी सेप्टिक वार्ड नहीं है। जिस वार्ड पर सेप्टिक वार्ड लिखा है वह गलत है, उस वार्ड में गायनिक के उन मरीजों को रखा जाता है जो किसी न किसी रूप से इंन्फैक्टिड रहते है। इस वार्ड को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना है जिसकी बिल्डिंग का काम चल रहा है। इसे इंन्फैक्शन वार्ड का नाम दिया जा रहा है। -डा. वीडी पांड्ेय, मीडिया प्रभारी मेडिकल कॉलेज।

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