Friday, September 17, 2021
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मुजफ्फरनगर दंगे 2013: कोर्ट में पेश हुए पूर्व सांसदों, विधायकों समेत अन्य आरोपी

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  • खालापार में हुई सभा में भड़काऊ भाषण देने का है आरोप
  • सभी पर तय होने थे आरोप, 13 सितम्बर को होगी सुनवाई

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: साल 2013 में हुए साम्प्रदायिक दंगों के मामले में पूर्व सांसद कादिर राणा, पूर्व सांसद सईदुज्जमां, पूर्व विधायक नूरसलीम राणा, पूर्व विधायक जमील अहमद व अन्य आरोपी कोर्ट में पेश हुए। सभी पर खालापार में हुई सभा में भडकाऊ भाषण दिये जने का आरोप है। इस मामले में आज सभी आरोपियों पर आरोप तय होने थे, परन्तु तय नहीं हो पाये। इस मामले की सुनवाई अब 13 सितम्बर को की जायेगी।

गुरूवार को मुजफ्फरनगर की एमपी एमएलए कोर्ट नंबर चार में बहुजन समाज पार्टी के पूर्व सांसद कादिर राणा, बसपा से पूर्व चरथावल विधायक नूर सलीम राणा उर्फ पप्पू ,बसपा के पूर्व मीरापुर विधायक मौलाना जमील पहुंचे थे, जंहा आज इन सभी पर आरोप तय होने थे, लेकिन मुजफ्फरनगर की एमपी एमएलए कोर्ट नंबर चार ने आरोप तय करने की अगली तारीख 13 सितंबर तय की है।

गौरतलब है कि  मुजफ्फरनगर के सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव कवाल में मलिकपुरा निवासी एक छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपी शाहनवाज की छात्रा के भाइयो गौरव और सचिन द्वारा हत्या करने के बाद कवाल गांव के मुस्लिमो ने मोके पर गौरव और सचिन को पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया था एक दिन  हत्या की सुचना पर तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी और जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने गांव में पहुँच कर गौरव और सचिन की हत्या के मामले में एक दर्जन से ज्यादा लोगो को गिरफ्तार कर लिया बाद में सत्ता पक्ष के नेताओ के दबाव में पुलिस ने कई मुलजिमो को थाने से छोड़ दिया।

मुस्लिम गांव में दो जाट समाज के युवको की हत्या के बाद जनपद में राजनीती शुरू हो गयी। बालियान खाप के चैधरी नरेश टिकैत और भारतीय किसान यूनियन  प्रवक्ता चैधरी राकेश टिकैत के साथ साथ भाजपा के कई नेता 28 अगस्त को गौरव और सचिन की शोक सभा में गए और और 31 अगस्त को महा पंचायत का ऐलान कर दिया। जिसके बाद 30 अगस्त को  मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र खालापार में जुम्मे की नमाज के बाद पंचायत का आयोजन किया गया जिसकी परमिशन जिला प्रशासन से ली गयी थी तत्कालीन एसएसपी सुभाष बघेल और जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने खालापार पंचायत में पहुँच कर ज्ञापन लिया था।

खालापार पंचायत में विवादित और उन्माद फैलाने के साथ साथ भड़काऊ भाषण देने के मामले में बसपा से पूर्व सांसद कादिर राणा ,बसपा के पूर्व विधायक नुर सलीम राणा ,बसपा के पूर्व मीरापुर विधायक मौलाना जमील ,कांग्रेस के पूर्व मंत्री सईद उल जमा सहित 10 नामजद और 600 से ज्यादा लोगो के खिलाफ 188, 153, 353, 435 आईपीसी के तहत शहर कोतवाली में सरकार बनाम मुकदमा दर्ज किया गया था।

पिछले 8 साल से मुजफ्फरनगर दंगो के मामलो में मुजफ्फरनगर की स्पेशल कोर्ट नंबर 4 में सुनवाई चल रही है। आज इन सभी 10 आरोपियों पर चार्ज तय होना था। कांग्रेस के पूर्व मंत्री सईदुज्जमां और उनके पुत्र सलमान सईद को छोड़कर सभी 8 आरोपी कोर्ट में पेश हुए।

इस मामले में आज आरोपियों की ओर से अधिवक्ता चन्द्रवीर सिंह, फिरोज राणा और नकली सिंह एडवोकेट ने बहस की, जबकि असद जमा ने अपने बचाव में स्वयं बहस की। इसके साथ ही आज पूर्व सांसद सईदुज्जमा और उनके पुत्र सलमान सईद के अधिवक्ताओं की ओर से हाजिरी माफी अदालत में पेश की गयी है। जिसमे कोर्ट ने आरोप तय होने की तारीख 13 सितंबर नियत की है।

कादिर राणा ने योगी आदित्यनाथ पर कसे तंज

मुजफ्फरनगर की एम पी एम एल ए कोर्ट पहुंचे बसपा के पूर्व सांसद कादिर राणा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि  मुख्यमंत्री का अपना फैसला है वो किसके केस वापस ले और किस पर केस  लगा दे। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

न्याय पालिका ही देश को बचाने वाली है और न्यायपालिका ही इस देश को चलाने वाली है। सच्चाई तो सभी को पता है 31 अगस्त की पंचायत में एसएसपी और जिलाधिकारी मौजूद थे। मुझे शुक्रवार को पार्लियामेंट से बुलाया गया था मुझे तो पता भी नहीं था की यंहा क्या हो रहा है।

कादिर राणा ने आगामी 2022 के चुनाव को लेकर कहा कि  चुनाव तो आते और जाते रहते है। उन्होंने कहा कि विधान सभा चुनाव में खुदा जिस को मौका देगा वो कुश्ती लड़ेगा।

नूरसलीम के अधिवक्ता ने ये कहा

पूर्व विधायक नूरसलीम राणा के अधिवक्ता चन्द्रवीर सिंह एडवोकेट ने बताया कि आज चार्ज को लेकर बहस हुई है। हमने अदालत को बताया है कि 30 अगस्त की खालापार मीटिंग को प्रशासन की अनुमति थी। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से इसके लिए अनुमति जारी की गयी थी।

इसके साथ ही डीएम और एसएसपी भी मुस्लिम समाज के द्वारा उठाई गई समस्याओं पर ज्ञापन लेने के लिए वहां पर पहुंचे थे। इसको देखते हुए इस मामले में निषेधाज्ञा के उल्लंघन का मामला नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि धारा 188 के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज करने के लिए भी पुलिस ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है और सीधे मुकदमा दर्ज कराया गया है, जोकि गलत है। इन्हीं मुद्दों पर हमने अपना पक्ष रखा है।

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