Friday, April 23, 2021
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… तो क्या वाहन चेकिंग के नाम पर होती है वसूली ?

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छावनी क्षेत्र का टैंक चौराहा, जहां कभी जाम नहीं लगता। वैसे भी आर्मी पुलिस भी यहां पर तैनात रहती है। तीस कदम की दूरी पर है सोफिया स्कूल का चौराहा, यहां भी कभी जाम नहीं लगता, लेकिन ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती रहती है। इलाहाबाद बैंक चौराहा भी ऐसा है, यहां भी कभी जाम नहीं लगता, मगर फिर भी ट्रैफिक पुलिस कर्मी तैनात रहते हैं।

गांधी बाग-सरधना रोड पर भी जाम की अवस्था नहीं है। फिर भी ट्रैफिक पुलिस कर्मी तैनात रहते हैं। 510 आर्मी बेस वर्कशॉप के सामने भी जाम की कभी शिकायत नहीं मिली, लेकिन ट्रैफिक पुलिस कर्मी गाड़ी लेकर खड़े रहते हैं। इन स्थानों का जिक्र इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यहां पर जाम नहीं लगता, फिर भी ट्रैफिक पुलिस कर्मियों में चालान काटने का चस्का है या फिर वसूली का? यह बड़ा सवाल है।

ट्रैफिक सिस्टम को कठघरे में खड़ा तो किया जाता है, मगर आला पुलिस अफसर भी इस तरफ से आंखें मूंदे हुए हैं, वजह क्या है कोई नहीं जानता। देखती आंखों से सरकार की बदनामी भी आला अफसर सहन कर रहे हैं। ऐसा तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टोलरेंस की बात करते हैं, लेकिन टैÑफिक पुलिस भ्रष्टाचार की गंगा में डूबकी लगा रही है।

शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हालांकि इस वक्त ट्रैफिक पुलिस में भरा पूरा परिवार है। इसके बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था बेपटरी हो रही है। अगर देखा जाए तो टैÑफिक पुलिस अधिकांश ऐसे मार्गों पर तैनात रहती है, जहां कभी जाम लगता ही नहीं है।

इसे चालान का चस्का कहें या फिर वसूली का। वैसे शहर के अंदर वाले मार्गों पर देखने में आता है कि आमजन पूरा दिन जाम से जूझता रहता है। शहर के जाम की बात करें तो इस वक्त रैपिड रेल की लाइन बिछाने को लेकर जीरो माइल से बेगमपुल तक एक तरफ का मार्ग बंद किया हुआ है। जिस कारण प्रशासन ने बड़े वाहनों व रोडवेज बसों के लिए रूट डायवर्ट भी किया हुआ है।

जिस कारण जीरो माइल चौराहा समेत महावीर चौक, मेट्रो प्लाजा, बहादुर मोटर्स, मेवला ओवरब्रिज, भूमिया का पुल, पिलोखड़ी चौराहा, हापुड़ अड्डा, कमिश्नरी आवास चौराहा, जेल चुंगी चौराहा समेत अन्य चौराहों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। जबकि इस वक्त ट्रैफिक पुलिस में भरा पूरा कुनबा है, इसके बावजूद इन चौराहों पर दिनभर जाम लगा रहता है।

हालांकि यदि बात शहर के उन मार्गों की जाए, जिन पर कभी जाम ही नहीं लगता तो ऐसे मार्गों पर दिनभर ट्रैफिक पुलिस की गाड़ी देखी जाती है। इसे ट्रैफिक पुलिस का चालान का चस्का कहेंगे या फिर वसूली का। हालांकि ट्रैफिक पुलिस का यह मामला पुलिस विभाग के तमाम अधिकारियों के संज्ञान में है।

ट्रैफिक पुलिस में भ्रष्टाचार, एसपी ट्रैफिक का मूक समर्थन

ट्रैफिक पुलिस जो लूट कर रही है, उसे एसपी ट्रैफिक जितेन्द्र श्रीवास्तव का मूक समर्थन हैं। तभी तो इसमें एसपी ट्रैफिक जांच कराने की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। वसूली करने वाले एक भी ट्रैफिक पुलिस कर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई।

शहर जाम से जूझता रहता है और ट्रैफिक पुलिस कर्मी वसूली में व्यस्त रहते हैं। वीडियो भी इनके वायरल हो रहे हैं, लेकिन चालान काटने की बात कहकर पुलिस कर्मी पीछा छुड़ा लेते हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई पुलिस अधिकारी नहीं कर रहे हैं।

एसपी ट्रैफिक ने दस बार यही कहा कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई करें, लेकिन कोई कार्रवाई एसपी ट्रैफिक ने नहीं की। जो वसूली अभियान ट्रैफिक पुलिस का चल रहा है, लगता है उसे एसपी ट्रैफिक की मूक स्वीकृति है। सीएम के जीरो टोलरेंस के दावे को ट्रैफिक सिस्टम मुंह चिढ़ा रहा है। ट्रैफिक में जिस तरह से भ्रष्टाचार किया जा रहा है, उससे सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।

इन मार्गों पर रोजाना तैनात रहते है ट्रैफिक पुलिसकर्मी

ट्रैफिक पुलिसकर्मी शहर के इन चौराहों पर रोजाना तैनात रहते है। जिन मार्गों पर कभी जाम लगता ही नहीं है। यहीं नहीं ट्रैफिक पुलिस के हालात ऐसे है कि हर 20 कदम की दूरी पर टोली बनाकर खड़े रहते हैं और बाइक सवारों व अन्य वाहन चालकों से चेकिंग के नाम पर जमकर वसूली करते है। टैंक चौराहा, सोफिया स्कूल चौराहा, गांधी बाग, 510 वर्कशॉप, माल रोड स्थित इलाहाबाद बैंक, रोहटा रोड स्थित ओवरब्रिज, रामताल वाटिका, यूनिवर्सिटी रोड स्थित अजंता कॉलोनी के सामने, तेजगढ़ी चौराहा स्थित शराब ठेके के पास, एल ब्लॉक चौकी के पास व बिजली बंबा चौकी के पास ट्रैफिक पुलिस की टीम हर समय खड़ी रहती है।

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