Saturday, January 29, 2022
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नवाब ने सीएम देवेंद्र फडणवीस पर लगाए कई गंभीर आरोप

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: मुंबई क्रूज ड्रग केस मामला अब जाली नोट की ओर मुड़ गया है। आज प्रेसवार्ता आयोजित कर एनसीपी नेता नवाब मलिक ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि सीएम रहते हुए देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र में जाली नोटों का कारोबार कर रहे थे। उनके ही संरक्षण में पाकिस्तान और बांग्लादेश तक यह कारोबार हो रहा था।

मलिक ने आरोप लगाया कि आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद देश में कई जगहों पर जाली नोट पकड़े गए थे, लेकिन महाराष्ट्र में पूरे एक साल तक एक भी केस सामने नहीं आया था।

आठ अक्तूबर 2017 को महाराष्ट्र में हुई एक छापेमारी में 14 करेाड़ 56 लाख से ज्यादा के जाली नोट पकड़े गए थे। उस मामले को देवेंद्र फडणवीस ने रफादफा करने का काम किया।

छापेमारी को मात्र आठ लाख 80 हजार बताकर मामले को दबाया गया। मामला दर्ज हुआ और कुछ ही दिनों में जमानत हो गई। इस मामले को एनआईए के पास नहीं भेजा गया। क्योंकि, जो लोग जाली नोट का रैकेट चला रहे थे, उन्हें तत्कालीन सरकार का संरक्षण प्राप्त था।

दाउद के करीबी के साथ क्यों दिखते हैं फडणवीस

एनसीपी नेता ने आरोप लगाया के फडणवीस ने सीएम रहते हुए अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन रखने वाले लोगों को ही राजनैतिक पद प्रदान किए। उन्होंने मुन्ना यादव नाम के एक व्यक्ति को कंस्ट्रक्शन बोर्ड का अध्यक्ष बनाया।

जबकि, वह माफिया था, इस पर हत्या के कई मामले दर्ज थे। आरोप लगाया कि दाऊद के करीबी रियाज भाटी के जरिए सीएम फडणवीस धन उगाही का काम कर रहे थे। लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करके वसूली की जाती थी।

जमीन मालिकों को पकड़कर लाया जाता था और सारी जमीनें अपने नाम लिखा ली जाती थीं। उनके कार्यकाल में लोगों के पास विदेशों से गुंडों के फोन आते थे।

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम तक पहुंच गया रियाज भाटी

मलिक ने कहा कि दाउद इब्राहिम का करीबी रियाज भाटी दो पासपोर्ट के साथ पकड़ा गया था। जिस आदमी को दो पासपोर्ट के साथ पकड़ा जाए, उसे दो दिनों में ही जमानत मिल जाती है।

वह भाजपा के कार्यक्रमों में दिखता था। सीएम देवेंद्र फडणवीस की डिनर टेबल पर दिखता था। इतना ही नहीं फडणवीस के आशीर्वाद से ही रियाज भाटी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम तक पहुंच गया था।

समीर वानखेड़े के पास ही था जाली नोटों का मामला 

नवाब मलिक ने कहा कि जब जाली नोट का मामला सामने आया तब समीर वानखेड़े ही इस मामले की जांच कर रहे थे। यह इत्तेफाक हो सकता है, लेकिन एक ही अधिकारी हर बार कैसे?

इस मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समीर वानखेड़े, देवेंद्र फडणवीस का करीबी है। इसलिए उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है। डीआरआई ने मुंबई में जाली नोट के खिलाफ छापेमारी की थी। केस को हल्का करने के लिए समीर वानखेड़े के जरिए मदद की गई थी।

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