Saturday, June 19, 2021
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ब्लैक फंगस के इंजेक्शन नहीं, रेमडेसिविर के खरीदार नहीं

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  • रेमडेसिविर के 6540 इंजेक्शन लगाए गए गंभीर मरीजों को
  • 1800 रुपये कीमत का इंजेक्शन ब्लैक में 50 हजार तक में बिका
  • डाक्टर कम लिख रहे इंजेक्शन, कमिश्नर के पास स्टाक

ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: कोरोना की दूसरी जानलेवा लहर में जिस रेमडेसिविर इंजेक्शन ने लोगों की तिजोरी भर दी उसने भले ही बहुत कम लोगों की जान बचाई हो लेकिन दस दिन से डाक्टर इस इंजेक्शन को लिखने से परहेज कर रहे हैं। इस महीने मेरठ शहर में रेमडेसिविर के 6540 इंजेक्शनों का प्रयोग हुआ।

इस इंजेक्शन को लेने के लिये इस कदर ब्लैक मार्केटिंग हुई कि 1800 रुपये कीमत का इंजेक्शन लोगों ने मजबूरी में 50 हजार रुपये तक में खरीदा गया।

कोरोना की दूसरी लहर में जब आक्सीजन के संकट ने लोगों की सांसे उखाड़नी शुरु कर दी थी तब डाक्टरों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की किस्मत खुल गई थी। मरीजों को छह इंजेक्शन का कोर्स लगवाया गया। 25 अप्रैल तक यह इंजेक्शन खैरनगर के दवा मार्केट में आराम से मिलता रहा।

मेडिकल स्टोरों ने चार हजार रुपये प्रति इंजेक्शन के हिसाब से इंजेक्शन बेचा। यह इंजेक्शन छह कंपनियां बना रही है लेकिन मारामारी सिप्ला कंपनी के रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर थी। मेरठ से इंजेक्शन लेने के लिये आसपास के जनपदों के अलावा दिल्ली और हरियाणा तक के लोग आए।

इंजेक्शन को लेकर इस कदर मारामारी हुई कि इंजेक्शन ब्लैक में बेचने लगे और देखते देखते इंजेक्शन बाजार से गायब हो गया। ड्रग इंस्पेक्टर पवन कुमार ने बताया कि मेरठ में लगभग रेमडेसिवर के 5760 इंजेक्शन मेडिकल स्टोरों में आये थे। इसके बाद इंजेक्शनों पर नियंत्रण करने के लिये कमिश्नर को प्रभारी बना दिया गया।

डाक्टर के परचे पर सीएमओ की रिपोर्ट पर इंजेक्शन दिये जाने लगे। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय को सेंटर बना दिया गया। इस इंजेक्शन को खरीदने के लिये लोगों को ब्याज पर पैसे भी लेने पड़े। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के बाद इस इंजेक्शन को डाक्टरों ने लिखना बंद कर दिया है।

शुक्रवार को प्रशासन की तरफ से रेमडेसिविर के आठ इंजेक्शन मरीजों को दिये गए। अब हालात यह है कि रेमडेसिविर का प्रयोग गंभीर मरीजों के लिये ही किया जा रहा है। दवा व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि बरसों में यह पहली बार किसी इंजेक्शन ने तहलका मचाया है। मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन जैसी मारामारी पूर्व में किसी भी दवा लेकर नहीं देखी गई। अब कोरोना में डाक्टर इसका कम इस्तेमाल कर रहे हैं।

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