Saturday, June 15, 2024
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खुद तो फंसे ही, जेई ने एसडीओ को भी दिया फंसा

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  • दफ्तर में बैठकर जिस लोड की बिजली चोरी की रिपोर्ट की गयी वो लोड तो कभी लिया ही नहीं गया
  • बिजली चोरी की फर्जी रिपोर्ट कर फंस गए अवर अभियंता
  • अधिशासी अभियंता की अधीक्षण अभिंयता को मामले की जांच में भेजी गयी आख्या में जेई को बताया कसूरवार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पांच हजार के चक्कर में अवर अभिंयता खुद तो फंसे ही मेडिकल इलाके के उपखंड अधिकारी प्रथम को भी अपने साथ रिश्वत मांगने की जांच में फंसा दिया। दोनों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। दरअसल हुआ यह कि पीवीवीएनएल से जिस लोड के लिए कभी आवेदन नहीं किया। जो लोड कभी स्वीकृत नहीं किया गया,

उस लोड की बिजली चोरी की रिपोर्ट कर अवर अभियंता राम सिंह अब फंस गए हैं। इतना ही नहीं जांच में उन पर उपभोक्ता से पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में भी कार्रवाई किए जाने की संस्तुति अधीशासी अभियंता सचिन कुमार की जांच आख्या में की गई है।

ये है पूरा मामला

गांव भावनपुर, पोस्ट स्याल थाना भावनपुर के शाहिद अली पुत्र अब्दुल सत्तार को ज्ञात हुआ कि उसके खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज करा दिया गया है। उसने भाग दौड़ की तो जानकारी मिली कि जो चेकिंग स्लिप जारी की गयी है उस पर 4.50 किलोवाट का भार दिखाया गया है। जबकि उसने कभी भी इतने भार के लिए न तो कभी आवेदन किया था

और न ही पीवीवीएनएल ने कभी इतना भार उसको स्वीकृत किया था। कनेक्शन की लिखापढ़ी में कहीं भी कभी भी जिस भार की बिजली चोरी की रिपोर्ट की गयी है उसका जिक्र तक नहींं है। इसकी जांच के लिए पुराना मीटर उतरा गया और नया मीटर भी लगाया गया। इन मीटर की जो रिपोर्ट आयी उसमें भी कहीं उक्त भार नहीं दर्शाया गया।

पांच हजार की थी डिमांड

पीड़ित शाहिद ने विगत 14 सितंबर 2023 को जो पत्र अधिशासी अभिंयता विद्युत वितरण खंड-चतुर्थ, विक्टोरिया पार्क को लिखा, उसने आरोप लगाया है कि अवर अभियंता राम सिंह ने उससे पांच हजार रुपये मांगे थे। न देने पर उन्हें बिजली चोरी के झूठे मामले में फंसा दिया। मनमाने तरीके से फर्जी चेकिंग स्लिप दफ्तर में बैठकर बना दी गयी। शिकायती पत्र में खुलासा किया गया कि चेकिंग स्लिप में 4.50 किलोवाट का भार दिखाया गया है।

जांच में हो गए बेनकाब

अधिशासी अभियंता से की गयी शिकायत की जब जांच की गयी तो अवर अभियंत राम सिंह जहां बेनकाब हुए वहीं दूसरी ओर अपने साथ उपखंड अधिकारी प्रथम को भी रिश्वत मांगने में सहयोग करने के गंभीर आरोप में फंसा दिया। दरअसल, हुआ यह कि जब जांच के लिए शाहिद के पुराने मीटर कनेक्शन संख्या 771700678487 व नए मीटर एकाउंट आईडी संख्या-1012469161 की जांच की गयी तो दूध का दूध पानी का पानी हो गया।

छोड़ी गयी गंभीर खामियां

पीड़ित उपभोक्ता के लिए इस मामले में संकट मोचन बने उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल जिन्होंने मामले को अंजाम तक पहुंचने में भी मदद की ने बताया कि विद्युत प्रदांय संहिता 6.8 (श्) के अनुसार प्रार्थी के यहां चैकिंग स्लिप चस्पा नहीं की गयी। प्रार्थी को चेकिंग स्लिप पंजीकृत डाक द्वारा नहीं भेजी गयी। इससे साफ है कि यह पूरा मामला बजाय चेकिंग के धन उगाही का है।

दफ्तर में बैठकर फर्जी स्लिप बना दी गयी। उन्होंने खुलासा किया कि इस मामले में फंसे जेई व एसडीओ की वजह से अब उपभोक्ता को परेशान किया जा रहा है। नए विद्युत कनेक्शन का उसे बिल नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने बताया कि जब पूरा मामला अधिशासी अभियंता के संज्ञान में लाया गया तो एक साथ सात माह का बिल बनाकर उपभोक्ता को थमा दिया गया।

ये कार्रवाई की जाए

लोकेश अग्रवाल ने इस संबंध में महकमे के आलाधिकारियों से भी बात की। उन्होंने अधिशासी अभियता की जांच रिपोर्ट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि-

  • उपभोक्ता के विरुद्ध बनायी गयी चेकिंग स्लिप संख्या-20/5304, 11 जनवरी 2023 को निरस्त किया जाए। उन्होंने खुलासा किया कि डेट डालने में भी जेई ने खेल किया।
  • विद्युत अवर अभियंता राम कुमार सिंह को फर्जी चेकिंग स्लिप बनाने व उपभोक्ता से पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली के प्रयास के लिए विद्युत अधिनियम-2003 की धारा-142 के तहत दंडित किया जाए।
  • उपखंड अधिकारी सर्वेश कुमार को पीड़ित के विरुद्ध साजिश में शामिल होने के कारण दोषी मानकर कार्रवाई की जाए। सर्वेश कुमार ने इस कुटरचित चोरी की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने का गुनाह किया है।
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