Thursday, May 30, 2024
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चर्चसिटी जूनियर हाईस्कूल में कम हो रही छात्रों की संख्या

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  • वजह प्रबंधक और शिक्षकों के बीच चल रहा विवाद
  • प्रबंधक की शिकायत पर शिक्षकों को 2022 में किया मुचलका पाबंद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में बच्चों के जीवन को सांचे में ढाला जाता है। अभिभावक बच्चों को स्कूलों में इसलिये पढ़ाने भेजते है जिससे उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके और उनका भविष्य उज्जवल बन सके। इसके लिए सरकार द्वारा स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए तमाम तरह के कदम उठाए जाते है।

अलग अगल योजनाएं चलाकर बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास किया जाता है। लेकिन जब स्कूल चलाने वाली प्रबंधन समिति और शिक्षकों में ही आपस में तालमेल नही हो तो बच्चों को किस तरह की शिक्षा मिल रही है इसको लेकर ही सवाल उठने लाजमी है। ऐसा ही हाल है अन्दरकोट (मोरीपाड़ा) स्थित चर्चसिटी जूनियर हाई स्कूल का जहां लंबे समय से शिक्षकों व स्कूल प्रबंधक में विवाद चल रहा है।

जिसका खामियाजा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को उठाना पड़ रहा है। यहां पिछले तीन सालों में ही लगातार छात्रों की संख्या में कमी होती जा रही है। स्कूल की जर्जर बिल्डिंग कब धराशाई हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। प्रबंधक व शिक्षकों के विवाद के चलते हालात लगातार बिगड़ते जा रहें है।

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चर्चसिटी जूनियर हाई स्कूल अंदरकोट में लगातार छात्रों की संख्या कम हो रही है। सत्र 2021-22 के अक्टूबर माह में कक्षा एक से आठवीं तक कुल छात्रों की संख्या 400 थी। इनमें बालकों की संख्या 213 व बालिकाओं की 187 थी। जबकि सत्र 2022-23 के अक्टूबर माह में छात्रों की संख्या घटकर 393 रह गई।

जिनमें बालकों की संख्या 209 व बालिकाआें की 184 रही। जबकि मौजूदा सत्र 2023-24 के अगस्त माह तक यह संख्या घटकर महज 209 रह गई है इनमें बालकों की संख्या 119 व बालिकाओं की केवल 90 है। हालांकि अभी सितंबर माह तक दाखिले चल रहें है लेकिन स्कूल की प्रिंसिपल का कहना है अब नए बच्चों के आने की उम्मीद काफी कम है।

प्रिंसिपल के आरोप

चर्चसिटी जूनियर हाई स्कूल अंदरकोट की प्रिंसिपल प्रियदर्शनी शर्मा के आरोप है विद्यालय में छात्रों की संख्या कम होने की वजह स्कूल प्रबंधक रमेश गिल द्वारा शिक्षकों का उत्पीड़न है। वर्ष 2021 में विद्यालय का एक शौचालय टूट गया था जबकि 2022 में दूसरा भी टूट गया। इन्हें ठीक कराने के लिए प्रबंधक को लिखा गया तो उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद शासन स्तर तक शिकायत करने के बाद प्रबंधक ने कुछ समय पहले शौचालयों को ठीक कराया।

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अगस्त 2022 में प्रबंधक ने स्कूल में पुलिस का पहरा बिठा दिया जिसके बाद बच्चे स्कूल में आने से डरने लगे साथ ही शिक्षकों को भी शिक्षणकार्य में परेशानी होने लगी। प्रिंसिपल प्रियदर्शनी का दावा है पिछले 32 वर्षो से स्कूल में इसाई धर्म की प्रार्थना कराई जाती रही जो एक धर्म विशेष से जुड़ी है। जिसे अब जुलाई 2023 में बंद किया गया है

क्या कहते स्कूल के प्रबंधक?

चर्चसिटी जूनियर हाई स्कूल अंदरकोट के प्रबंधक रमेश गिल ने उनके ऊपर लगे आरोपों को सिरे से नकार दिया। उनका कहना है स्कूल में छात्रों की संख्या कम होने की वजह स्कूल की प्रिंसिपल है। उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की है जिसको लेकर जांच चल रही है।

शिक्षकों को नौकरी पर रखा था वह फर्जी थी। स्कूल में पुलिस का पहरा भी प्रिंसिपल द्वारा ही लगवाया गया था। झूठे आरोप लगाए थे। जिसके बाद बचाव में पुलिस से शिकायत की गई थी। मुचलका पाबंद इसलिये कराया गया क्योंकि शिक्षिकाएं फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रही है वह दूसरी शिक्षिकाओं के साथ बदसलूकी करती थी। पुलिस कभी स्कूल में नहीं बैठी बल्कि शिक्षिकाएं ही खुद पुलिस के पास गई थी।

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शिक्षिकाओं ने स्कूल का जेनरेटर बेच दिया, हमने एक लाख रूपये लगाकर स्कूल की छत व शौचालय ठीक कराएं है। यह सभी कार्य बीएसए की निगरानी में हुए है। प्रिंसिपल खुद स्कूल की बिल्डिंग को क्षतिग्रस्त कर रही है। 150 साल पुरानी बिल्डिंग है जिसके साथ छेड़छाड़ की जाती है। 1889 में बिल्डिंग का निर्माण हुआ था तभी से यह स्कूल चल रहा है।

जीजीआईसी: सात साल से जमीन पर पढ़ाई

मेरठ: पुराने कमेले के पास स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की स्थापना को सात साल हो चुके हैं लेकिन आज तक भी यहां छात्राओं के बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं है। इस मामले में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जिला विद्यालय निरीक्षक से लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और यहां तक कि सरकार तक से कई बार मांग की जा चुकी है लकिन अभी तक भी विद्यालय को फर्नीचर उपलब्ध नहीं कराया गया है।

इस मामले में सोमवार को भाजपा अल्पसंख्यक मार्चा के नेताओं का एक प्रतिनिधिमण्डल प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश अंसारी से मिला और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। संगठन की पश्चिमी इकाई के मीडिया प्रभारी नासिर सैफी के नेतृत्व में मिले इस प्रतिनिधिमण्डल ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री से कहा कि इस इंटर कॉलेज की स्थापना 2016 में की गई थी और तभी से यहां फर्नीचर का आभाव है।

प्रतिनिधिमण्डल में शामिल दिलशाद चौहान ने बताया कि इस कॉलेज में दो हजार से अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं लेकिन इसके बावजूद विद्यालय में सात सालों से फर्नीचर का न होना अपने आप में गंभीर प्रकरण है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि तीन साल पहले 10 अतिरिक्त कमरों का निर्माण यहां केन्द्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय द्वारा कराया गया था।

लेकिन इस निर्माण में बेहद घटिया सामग्री लगाए जाने के आरोपों के चलते निर्माण कार्यों को रोक दिया गया था। यह कमरे आज भी अधूरे ही हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंंत्री से मांग की गई है कि अधूरे पड़े निमार्ण कार्यों को पूरा कराया जाए और साथ ही कॉलेज की बरसों पुरानी फर्नीचर उपलब्ध कराने की मांग को पूरा किया जाए। मंत्री ने आश्वासन दिया है कि वो इस प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई करवाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में महानगर सह मीडिया प्रभारी शादाब अल्वी और डॉ. वसीम भी मौजूद थे।

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