Wednesday, December 1, 2021
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थाली बजा कृषि कानून और ‘मन की बात’ का विरोध

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  • भाकियू और रालोद कार्यकर्ताओं ने बजाई ताली-थाली

जनवाणी ब्यूरो |

शामली: केंद्र सरकार द्वारा बनाए नए कृषि कानून और प्रधानमंत्री के साल के अंतिम ‘मन की बात’ का विरोध भारतीय किसान यूनियन तथा राष्ट्रीय लोकदल कार्यकर्ताओं ने ताली और थाली बजाकर किया।

रविवार को शहर के बुढाना रोड स्थित भाकियू कार्यालय पर प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार के नेतृत्व में भाकियू कार्यकर्ताओं ने हाथों में चम्मच प्लेट लेकर ताली और थाली बजाकर नए कृषि कानून तथा प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का विरोध किया।

इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार ने कहा कि रविवार को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशवासियों से अपने मन की बात कर रहे हैं, जिसका भाकियू हाईकमान के निर्देश पर विरोध कर रहे है। प्रधानमंत्री मन की बात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसानों के मन की बात सुनने के लिए तैयार नहीं।

उन्होने कहा कि पिछले 32 दिनों से देश का अन्नदाता दिल्ली हाईवे पर कडाके की ठंड में आन्दोलन करने को मजबूर है, लेकिन किसानों की कोई सुनने को तैयार नही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोरोना भागने के लिए देश के लोगों से ताली और थाली बजवाई थी, लेकिन किसान देश से कृषि कानून भगाने के लिए ताली और थाली बजा रहे हैं।

इस अवसर पर संजीव राठी, अजीत निर्वाल, अमीर गंदराउ, प्रमोद पटवारी, चिंता निर्वाल, सुभाष कुमार, मुनव्वर आदि मौजूद रहे।

डा. विक्रांत के नेतृत्व में बजाई ताली-थाली

कांधला में रविवार को क्षेत्र के गांव मखमूलपुर में रालोद के वरिष्ठ नेता डा. विक्रांत जावला के नेतृत्व में ताली और थाली बजाकर केन्द्र सरकार के द्वारा लगा गए तीन कृषि कानूनों का विरोध किया। इस दौरान रालोद नेता डा. विक्रांत जावला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्री सुविधायुक्त कमरों में बैठकर ब्यानबाजी रहे हैं। देश का अन्नदाता किसान हाड कंपाती ठंड में खुले आसमान के नीचे धरना देने पर मजबूर है।

दर्जनों किसानों की मौत हो चुकी है। किन्तु सरकार ने आंखों पर पट्टी बांध ली है। कोरोना कम था वह किसी को दिखाई भी नहीं दे रहा था, तब मोदी जी ने पूरे देश से ताली और थाली बजवाई थी, मोमबत्ती जलवाई, आज लाखों किसान यूपी बॉर्डर व बडौत में धरनारत हैं किन्तु प्रधानमंत्री को वह दिखाई नहीं दे रहे हैं।

धरने पर हमारे बुजुर्गो के साथ माताएं व बहनें भी बैठी है, किन्तु इस सरकार के अहंकार व दमनकारी नीतियों के चलते उनको देश की अन्नदाताओं की कोई फ्रिक नही है। सरकार को किसानों के ऊपर थोपे गए इस काले कानून को वापस लेना होगा अन्यथा यह आन्दोलन समाप्त होने वाला नहीं है। इस मौके पर दर्जनों किसान मौजूद रहे।

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