Saturday, May 2, 2026
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तीन टोल नॉकों पर थी कैंट बोर्ड की संगठित लूट

  • बड़ा सवाल: पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर टोल वसूली बंद करने को दिसंबर तक का इंतजार क्यों ?
  • पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर कैंट ठेकेदार की अवैध टोल वसूली बन सकती है अफसरों के गले की फांस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर के तीन टोल नाकों पर कैंट बोर्ड द्वारा ठेकेदार से करायी जा रही वसूली संगठित लूट सरीखी थी। अब साबित हो चुका है कि मवाना रोड, दिल्ली रोड व रुड़की रोड जहां टोल नॉके लगाए गए हैं वह पीडब्ल्यूडी की सड़क है। जीओसी इन चीफ मध्य कमान, शासन व प्रशासन ने ये मान लिया है।

इतना ही नहीं पीडब्ल्यूडी ने इसको लेकर एक पत्र भी सीईओ कैंट को भेजा है। फिर क्यों न इस संगठित लूट की रिकवरी कैंट बोर्ड से की जाए। जहां तक कोर्ट में चल रही सुनवाई का सवाल है तो कोर्ट तो यही जानकारी दी गयी कि सभी 11 नॉकों पर जहां टोल वसूली करायी जा रही है वो जगह कैंट बोर्ड की है, लेकिन अब इससे पर से भी पर्दा हट चुका है।

इसके चलते अब जानकारी मान रहे हैं कि पीडब्ल्यूडी की शहर की तीन प्रमुख सड़कों पर अवैध रूप से करायी गयी टोल वसूली पर कैंट बोर्ड के लिए जुर्माना भरने की नौबत आ सकती है। यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो ऐसा हर सूरत में संभव है। वहीं, दूसरी ओर ये भी सवाल पूछा जा रहा है कि जब जीओसी इन चीफ मध्य कमान तथा राज्य सरकार ने मान लिया है कि मवाना रोड, रुड़की रोड व दिल्ली रोड पर एंट्री फीस के नाम पर की जा रही टोल वसूली पूरी तरह से अवैध है तो फिर तीनों टोल नाकों पर बोरिया बिस्तर समेटने के लिए कैंट बोर्ड के ठेकेदार को दिसंबर तक का समय क्यों।

बोर्ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

पीडब्ल्यूडी की सड़क पर कैंट बोर्ड की अवैध टोल वसूली को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में एक संगठन की ओर से जनहित याचिका की तैयारी है। इस संबंध में सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गयी हैं। कैंट बोर्ड कार्यालय से भी बोर्ड मीटिंगों तथा बोर्ड मीटिंगों में अफसरों तथा सदस्यों की कार्रवाई के साक्ष्य जमा किए गए हैं।

साथ ही कानूनविदों की मदद से वो साक्ष्य भी जुटाए गए हैं जहां कैंट अफसरों की चूक का फायदा टोल ठेकेदार ने उठाया। इन चूकों से कैंट बोर्ड को कई करोड़ के राजस्व की हानि भी हुई है। ये तमाम चीजें सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाने वाली याचिका में शामिल की गयी हैं।

सामाजिक दायित्व का मजबूती से निर्वाहन

टोल मुद्दे पर पहले ही दिन से जनवाणी की मजबूत रिपोर्टिंग व कैंट विधायक की तमाम स्तर मजबूती से पैरवी के चलते ही जीओसी इन चीफ व राज्य सरकार ने कैंट बोर्ड प्रशासन की गलती को माना। इतना ही नहीं कैंट बोर्ड को तीन टोल नॉके हटाए जाने के निर्देश भी दिए हैं। देश भर में टोल खत्म कर दिए गए हैं, लेकिन मेरठ कैंट बोर्ड ने आमदनी के जरिये का रोना रोते हुए पांच नॉकों पर टोल वसूली का ठेका दिया।

जिसको वर्तमान ठेके में बढ़ाकर 11 स्थानों पर कर दिया। इसको लेकर जबरदस्त आंदोलन हुआ। सांसद, विधायक व संगठन ने लोगों की नाराजगी को भांप लिया। ये बात अलग है कि इस मुददे पर बोर्ड में भाजपाई सदस्यों का खेमा सांसद व विधायक के प्रयासों के प्रति ईमानदार नहीं रहा। उनका साफ झुकाव ठेकेदार की ओर नजर आता था। इस बात को आॅफ दा रिकार्ड भाजपा के जन प्रतिनिधियों ने भी माना है।

बोर्ड के कुछ भाजपाई सदस्यों के दोहरे चरित्र के बावजूद कैंट विधायक पीछे नहीं हटे। उनके प्रयास लगातार जारी रहे। हालांकि उनके प्रयासों में अड़चने डालने की तमाम कोशिशें की गयीं, लेकिन जनवाणी मजबूती से डटा रहा। जिसके चलते पीडब्ल्यूडी की सड़कों से कैंट बोर्ड का बोरिया बिस्तर बांधने की नौबत आ सकी है।

जनता के सुविधा के लिए होना चाहिए काम

MLA Satyaprakash
सत्यप्रकाश अग्रवाल, कैंट विधायक

कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरी है। जो भी निर्णय लिए जाएं उनसे जनता को परेशानी न हो। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। अफसर आते जाते रहते हैं, लेकिन हमारी जिम्मेदारी है कि जनता जिसने हमको चुनकर जिम्मेदारी सौंपी है उसकी कसौटी पर हमेशा खरा उतरें।

कैंट बोर्ड ने साधा मौन

तीन टोल नॉकों से बोरिया बिस्तर समेटने के सवाल पर कैंट बोर्ड के अफसरों व सदस्यों ने मौन साध लिया है। कई बार कुरेदे जाने के बाद भी कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं। बोर्ड के अफसरों की प्रतिक्रिया के लिए कई बार कॉल की गयी, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। वहीं, दूसरी ओर बोर्ड के सदस्य भी इस सवाल से भाग रहे हैं।

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