तेजी से बढ़ रहे केस, नहीं मिल रही संक्रमण की चेन
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से कहीं ज्यादा है संक्रमित होने वालों की संख्या
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महज 10 दिन में कोरोना के 1327 संक्रमित केस और 22 संक्रमितों मरीजों की उपचार के दौरान मौत। 10 दिन में आए 1327 केसों में साढ़े आठ सौ नए संक्रमित ऐसे केस स्वास्थ्य विभाग को जिनकी चेन ही नहीं पता।
विशेषज्ञों की मानें तो जब संक्रमितों की चेन ही न पता चले और बड़ी संख्या में ऐसे संक्रमित मिलने लगे तो मान लीजिए कि कम्युनिटी स्प्रेड है या फिर उसके कगार पर खड़े हैं।
जहां तक स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की बात है तो कम्युनिटी स्प्रेड के सवाल पर बात करने से वह कन्नी काटते हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि करीब दो माह पूर्व आईसीएमआर के एक बड़े अधिकारी ने लाइव टेलीकास्ट के दौरान कम्युनिटी स्प्रेड की बात कह दी थी, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उसको एक ही घंटे में खारिज कर दिया।
जब तक सरकार न मान ले तब तक कम्युनिटी स्प्रेड की बात नहीं कही जा सकती। वही मेरठ के मामले में भी है। अब यदि आंकड़ों की बात की जाए तो पिछले 10 दिन के आंकड़े कम्युनिटी स्प्रेड सरीखे हालात की वकालत कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भले ही न माने, लेकिन आंकड़े कोरोना के बिगड़ते हालात की ओर इशारा कर रहे हैं।
मेरठ समेत यूपी के करीब दर्जन भर से ज्यादा बताए जा रहे जिलों में जहां सबसे ज्यादा संक्रमण के केस निकल रहे हैं, वहां सीरो सर्वे कराया जाना बता रहा है कि संक्रमण के तेजी से ऊपर की ओर जा रहे ग्राफ ने सरकार की भी नींद गायब कर दी है। हालांकि अब तो पूरे प्रदेश में सीरो सर्वे कराया जा रहा है।
बड़ी संख्या में नॉन डिटेक्ट संक्रमित
जिन आंकड़ों का यहां जिक्र किया जा रहा है ये वो केस हैं जिनको स्वास्थ्य विभाग ने ट्रेस कर लिया है, लेकिन ऐसे केस बड़ी संख्या में हैं। जिनको डिटेक्ट ही नहीं किया जा सका है।
साधन संपन्न परिवारों के लोग तो स्वास्थ्य विभाग के दरवाजे तक जाते ही नहीं। तमाम ऐसे मामले हैं जिनमें संक्रमित होने पर सीधे नोएडा या फिर दिल्ली का रूख किया जाता है। ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जिन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा नहीं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी कोरोना संक्रमण के आंकड़े
1 सितंबर तक को आंकड़े
कुल संक्रमित -4196
कुल मौत 120
10 सितंबर तक को आंकड़े
कुल संक्रमित -5523
कुल मौत 142
सरकार भले ही न मानें हालात खराब हैं
मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. एसके गर्ग का साफ कहना है कि भले ही सरकार न मानें, लेकिन मेरठ में निश्चित रूप से कम्युनिटी स्प्रेड सरीखे हालात हैं। ऐसे नए केसों का आना जिनकी चेन ही न पता चल सके ऐसे केस कम्युनिटी स्प्रेड की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके लिए सरकार के कुछ फैसले भी कम जिम्मेदार नहीं। अनलॉक किया जाना एक बड़ी वजह है।
नॉन डिटेक्ट केस बड़ी संख्या में
आईएमए के स्टेट सेक्रेटरी डा. शिशिर जैन का कहना है कि संक्रमण के केसों में तेजी से इजाफा हो रहा है, लेकिन ये आंकड़े उन केसों के हैं जो डिटेक्ट किए जा चुके हैं। बड़ी संख्या उन केसों की है जिनको डिटेक्ट ही नहीं किया जा सका। इसके लिए सोसाइटी सामुहिक रूप से जिम्मेदार है।
पूरी तरह से तैयार है मेडिकल
मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि केस लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जहां तक तैयारियों की बात है एलएलआरएम मेडिकल के पास फिलहाल 250 बेड का इंतजाम हैं। इसमें से सौ से ज्यादा बेड अभी भी खाली हैं। इसी तर्ज पर एमएसवाई मेडिकल कालेज तथा सुभारती मेडिकल कालेज में भी चार-चार सौ बेड का इंतजाम है। इसके अलावा सीएचसी पांचली में भी एल-3 लेबल के संक्रमितों को रखा जा रहा है।