Friday, September 17, 2021
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बारिश बनी विलेन, सांप ले रहे लोगों की जान

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सर्पदंश से निपटने को एंटी वैनम की जगह झाड़-फूंक पर जोर

सीएचसी और पीएचसी पर मौजूद है इंजेक्शन


मनोज राठी |

गंगानगर: बरसात के मौसम में जहरीले जीव-जंतु नजर आने लगे हैं। कभी-कभी उनका इंसानों से सामना जानलेवा तक हो जाता है। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। पिछले कुछ दिनों में जनपद में सर्पदंश के मामले सामने आए हैं। इनमें से कुछ की मौत हो गई तो समय पर इलाज मिलने से कुछ लोगों की जान भी बच गई। बारिश ने जहां लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत दिलाई हो, लेकिन मुसीबतें भी खड़ी कर दी है।

बिलों में पानी भार जाने के कारण सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे जहरीले सांपों ने लोगों की जिंदगी में खतरा पैदा कर दिया है। जिस तरह से सर्पदंश की घटनाएं बढ़ रही है। उससे निपटने के लिये लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाने के बजाय झाड़-फूंक में समय बर्बाद करके जिंदगी से हाथ धो रहे हैं।

अगर विषैले सांप के काटे जाने पर रोगी को यदि दो या तीन घंटे के अंदर एंटी वैनम का इंजेक्शन लग जाए तो रोगी को बचाया जा सकता है। वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी जहर निरोधक इंजेक्शन एंटी वैनम की उपलब्धता भी भागवान भरोसे ही है।

भारत में सबसे ज्यादा सर्पदंश की घटनाएं होती हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में सांप काटने से मौत की आधी घटनाएं भारत में दर्ज होती हैं। इसका सबसे ज्यादा शिकार किसान, मजदूर, शिकारी, गड़ेरिये, सपेरे आदि लोग होते हैं। इनमें घटनाएं इसलिए ज्यादा हैं, क्योंकि सांप काटने और उससे बचने के तरीके के बारे में जागरूकता की घोर कमी है।

सांप काटने के बाद तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाए तो पीड़ित व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है, लेकिन प्राथमिक उपचार को लेकर लोगों में जानकारी कम है और वे इसका इस्तेमाल भी ठीक से नहीं करते। कई स्थानों पर सर्पदंश से बचाने के लिए प्राथमिक उपचार की घोर कमी है। लोग विषैले और विषहीन सांपों में अंतर समझ सकें, अगर सांप काट ले तो तुरंत क्या करना चाहिए, इन सब बातों से अनजान हैं।

नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में सर्पदंश का इलाज मुफ्त है, इसके बारे में भी लोगों को कम जानकारी है। इसके चलते लोग अवैज्ञानिक तरीका अपनाते हैं और अंत में पीड़ित की मौत हो जाती है। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पतालों में सर्पदंश की घटना को सर्वोपरि मानते हुए लोगों को जागरूक करना, पीड़ितों को बचाने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। उधर, सीएचसी और पीएचसी पर सर्पदंश से निपटने के लिए एंटी वैनम इंजेक्शन भरपूर है।

सर्पदंश के मामले

कुछ साल पहले हस्तिनापुर के गांव गणेशपुर में जमीन पर सो रहीं दो किशोरियों समेत एक युवक को सांप ने डस लिया था। परिजनों ने सांप को मार डाला था और तीनों को जहर उतारने वालों के यहां ले गए थे। तमाम झाड़-फूंक के बावजूद तीनों बच नहीं सके थे।

एक ही घर में तीन मौत होने से गांव में कोहराम मच गया था। परंपरा है कि धार्मिक यात्रा से आने के बाद श्रद्धालुओं को घर में जमीन पर लेटना होता है। परिजन जमीन पर सो रहे थे। कुछ परिजन पूजा-अर्चना में लगे थे। इसी बीच एक सांप ने तीन लोगों को काट लिया।

गंगानगर थाना क्षेत्र के मामेपुर गांव में घर के बरामदे में सो रहे दपंति को सांप ने काट लिया। सर्पदंश से पति की मौत हो गई, जबकि उसकी गर्भवती पत्नी गंभीर हालत में मेडिकल अस्पताल में भर्ती है। उधर, परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के आलमगिरपुर बढला-आठ में मां के साथ बेड पर सो रही इकरा (9) और आलिया (8) की सर्पदंश से मौत हो गई।

झाड़-फूंक में चली जाती है जान

सर्पदंश के अधिकांश मामलों में ग्रामीण डॉक्टर की बजाय झाड़-फूंक करने वाले के पास पहुंच जाते हैं। यदि सांप जहरीला नहीं हुआ तो व्यक्ति ठीक हो जाता है और लोगों को लगता है कि झाड़-फूंक से उसकी तबीयत ठीक हो गई।

वहीं, सांप के जहरीला होने पर व्यक्ति की मौत हो जाती है कई बार ग्रामीण सर्पदंश से शिकार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक कराने पहुंच जाते हैं, जिससे दिक्कतें आ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि जैसे ही किसी को सांप डंसे उसे सीधे अस्पताल ले जाएं।

बरसात के मौसम में सांप के काटने पर झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें। अगर ऐसा किया गया तो सर्पदंश के शिकार व्यक्ति की मौत हो सकती है।

कैसे करें पहचान

सर्पदंश आमतौर पर काटी गई जगह पर दांत का निशान, हल्की दर्द व उसके चारों तरफ लाली से पहचाना जा सकता है। यदि काटी गई जगह के आसपास की त्वचा में अत्यधिक लचीलापन है तो यह सर्पदंश का लक्षण हो सकते हैं। बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, खून के धब्बे उभरना, पसीना आना सर्पदंश के सामान्य लक्षण है।

इन बातों का रखें ध्यान

घरों के आसपास की जंगली घास समय-समय पर कटवाते रहें। जिससे मकानों के बाहर साफ-सफाई बनी रहे। घर और मकानों में रखे कबाड़ को इकट्ठा न होने दें और समय-समय पर सफाई करते रहे। छोटे-छोटे गड्ढों और दरारों को बंद करें। खेत और पर्यटन स्थलों पर जाते समय सावधान रहें। घर की नालियों के मुहाने पर जाली लगाएं।

पर्याप्त दवाएं हैं उपलब्ध

सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि सर्पदंश के पीड़ितों के लिए तमाम दवाएं मौजूद हैं। सर्पदंश का शिकार होने वाले बजाय झाड़-फूंक न कराएं। सीधे सरकारी अस्पताल में पहुंचे। इसमें देरी जानलेवा हो सकती है।

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